मेनडोर पर लगे तोरण को कितने दिनों में बदलना चाहिए? ध्यान में रखेंगे ये 3 बातें तो नहीं लगेगा वास्तु दोष

Apr 08, 2026 10:10 am ISTGarima Singh लाइव हिन्दुस्तान
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वास्तु शास्त्र में तोरण से जुड़े ऐसे कई नियम हैं जिनके बारे में कम ही लोगों को पता होता है। आइए जानते हैं कि आखिर शास्त्र में तोरण से जुड़े जरूरी नियम कौन-कौन से हैं? साथ ही जानेंगे कि आखिर इसे कितने दिन बाद मेनडोर से हटा देना चाहिए?

मेनडोर पर लगे तोरण को कितने दिनों में बदलना चाहिए? ध्यान में रखेंगे ये 3 बातें तो नहीं लगेगा वास्तु दोष

वास्तु शास्त्र की दुनिया में वैसे तो घर का हर कोना ही खास होता है लेकिन मेनडोर यानी मुख्य दरवाजे को सबसे ज्यादा अहमियत दी जाती है। दरअसल यही वो जगह है जहां से घर में पॉजिटिविटी या फिर नेगेटिविटी की एंट्री होती है। ऐसे में इस जगह को लेकर वास्तु शास्त्र में कई तरह के उपाय बताए गए हैं। शास्त्र के हिसाब से मेनडोर को हमेशा सजाकर रखना चाहिए और समय-समय पर इसकी साफ-सफाई भी जरूरी है। उपाय के तौर पर मेनडोर पर काफी चीजें लगाई जाती हैं और इन्हीं में से एक है तोरण यानी बंदनवार का लगाया जाना।

लोग घरों में आम के पत्ते के अलावा अशोक के पत्ते के तोरण लगाते हैं। हालांकि इससे जुड़े नियमों को अक्सर लोग नजरअंदाज कर देते हैं। ऐसे में आइए जानते हैं कि आखिर बंदनवार यानी तोरण को कितने दिनों में मेनडोर से हटाना या बदल लेना चाहिए?

कितने दिनों में बदलना चाहिए तोरण?

वैसे तो अमूनन लोग मेनडोर पर आर्टिफिशियल तोरण लगाकर रखते हैं लेकिन वास्तु में असली पत्तों और फूलों से बने तोरण को ही महत्व दिया जाता है। नियम के अनुसार इसे 7 से 10 दिन में बदल लेना चाहिए। वैसे स्थिति को देखकर 12-15 दिन में भी ये काम किया जा सकता है। बस ध्यान रखें कि तोरण में लगे फूल और पत्ते ना सूखे। वहीं त्योहार के समय लगाए जाने वाले तोरण को कभी भी ज्यादा दिन तक नहीं रखना चाहिए। कोशिश यही होनी चाहिए कि वो हमेशा फ्रेश दिखें।

आर्टिफिशियल तोरण से जुड़ा नियम

अगर आप कपड़े, मोती या फिर प्लास्टिक वाले तोरण या बंदनवार को मेनडरो पर लगाते हैं तो इसके लिए भी कुछ नियम हैं। आप उसे समय-समय पर साफ जरूर करें। गंदा या धूल से भरा हुआ तोरण घर के वास्तु को खराब करेगा। ऐसे में महीने में कम से कम उसे हर 4-5 दिन में साफ कर लेना चाहिए। इस बात का ध्यान रखें कि मेनडोर के पास आपको गंदगी नहीं रखनी है।

ध्यान में रखें तोरण से जुड़ी ये 3 बातें-

टूटा या फिर खराब तोरण न लगाएं

अगर आपके मेनडोर का तोरण कहीं से टूट गया है या फिर उसके धागे निकलने लगे हैं तो इसे जल्द से जल्द बदल लें। टूटी हुई चीजें घर का वास्तु खराब करती हैं और इससे जिंदगी में रुकावटें पैदा होने लगती हैं और फालतू का तनाव भी बढ़ने लगता है। ऐसे में कोशिश यही होनी चाहिए कि हमेशा सही और सुंदर तोरण ही मेनडोर पर लगाया जाए।

तोरण में कितने पत्ते जरूरी?

वास्तु शास्त्र के नियम के हिसाब से तोरण में पत्तियों की संख्या सही होनी चाहिए। नियम के अनुसार पत्ते हमेशा विषम संख्या में ही लगे होने चाहिए। नियम के हिसाब से किसी भी तोरण में 5, 7, 11, या 21 पत्तों का होना शुभ माना जाता है। इससे घर में वास्तु दोष नहीं लगता है।

तोरण की सही दिशा

वास्तु शास्त्र के हिसाब से तोरण को हमेशा दरवाजे के ठीक ऊपर ही लगाना चाहिए। दरवाजे पर लगा हुआ टेढ़ा तोरण सही नहीं माना जाता है। ना ही इसे लटकाते हुए लगाने की कोशिश करें। ध्यान रखें कि तोरण हमेशा अच्छी तरह से बंधा हो। अगर आप तोरण से जुड़े इन नियमों का पालन कर लेंगे तो घर में वास्तु दोष नहीं लगेगा।

डिस्क्लेमर- (इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए वास्तु शास्त्र विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।)

Garima Singh

लेखक के बारे में

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शॉर्ट बायो


गरिमा सिंह एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव है। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में कार्यरत हैं। वह वास्तु, न्यूमरोलॉजी, फेंगशुई और राशिफल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं।


परिचय और अनुभव

गरिमा सिंह डिजिटल मीडिया में लंबे समय से सक्रिय हैं। वह पिछले 8 महीनों से लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने अपने करियर में न्यूज, फीचर और एक्सप्लेनर कंटेंट पर काम किया है। अब वह ज्योतिष से जुड़े विषयों को सरल और व्यावहारिक तरीके से पाठकों तक पहुंचाती हैं। उनके आर्टिकल की खास बात ये है कि वह जटिल ज्योतिषीय बातों को आसान भाषा में समझाने की पूरी कोशिश करती हैं ताकि जिसे एस्ट्रोलॉजी का ए भी नहीं पता है वह भी आसान तरीके से चीजों को समझ सके और उस पर अमल कर सके।


करियर

गरिमा ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत रेडियो चैनल रेड एफएम से की। यहां पर उन्होंने रेडियो से जुड़ी बारिकियों को समझने की कोशिश की और मॉर्निंग शो को प्रोड्यूस करने के साथ-साथ कॉपी राइटिंग का भी काम संभाला। साथ में कई विज्ञापनों में वॉइस ओवर भी दिया। इसके अलावा उन्होंने डीडी न्यूज, जी न्यूज जैसे मीडिया संस्थानों में डिजिटल और टीवी पत्रकारिता को करीब से जाना और समझा। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का यह अनुभव आज उनके डिजिटल राइटिंग और स्टोरीटेलिंग के तरीके को और भी प्रभावशाली बनाता है।


शैक्षणिक पृष्ठभूमि

गरिमा ने साइकोलॉजी, इकोनॉमिक्स और इंग्लिश विषयों में बैचलर ऑफ आर्ट्स (B.A.) की डिग्री प्राप्त की है। इसके बाद उन्होंने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन दिल्ली और जामिया मिलिया इस्लामिया से टीवी और रेडियो पत्रकारिता की पढ़ाई की है। इस दौरान उन्होंने इंटर्नशिप भी की। वह जामिया मिलिया इस्लामिया की गोल्ड मेडलिस्ट भी रह चुकी हैं।


एस्ट्रोलॉजी लेखन की सोच

गरिमा का मानना है कि ज्योतिष का उद्देश्य डर पैदा करना नहीं, बल्कि लोगों को सही दिशा और सकारात्मक सोच देना होना चाहिए। उनका फोकस होता है- सरल जानकारी, संतुलित सलाह, भरोसेमंद और उपयोगी कंटेंट। वह शिव पुराण और कई और शास्त्रों की जटिल कथाओं को अपने शब्दों में लिखकर पाठकों तक पहुंचाती हैं। गरिमा वास्तु शास्त्र और न्यूमरोलॉजी के अलावा फेंगशुई की किताबें पढ़ती रहती हैं और वहां की उपयोगी जानकारियों को पाठकों के साथ समय-समय पर साझा करती हैं।


व्यक्तिगत रुचियां

काम के अलावा गरिमा को गार्डनिंग, कुकिंग और टेबल टेनिस खेलना पसंद है। वह कानपुर से ताल्लुक रखती हैं और एक संतुलित जीवनशैली में विश्वास करती हैं।


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वास्तु शास्त्र, न्यूमरोलॉजी, फेंगशुई, डेली और वीकली राशिफल

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