घर की सीढ़ियों का वास्तु बिगाड़ सकता है सुख-शांति! जानें सही दिशा और जरूरी नियम

लाइव हिन्दुस्तान
Follow us on Google News
share

घर में सीढ़ियों की सही दिशा और वास्तु नियम जानना क्यों जरूरी है? जानिए दक्षिण-पश्चिम दिशा का महत्व, ईशान कोण के नियम और सीढ़ियों की सही बनावट।

Staircase Vastu
सीढ़ियों का वास्तु

घर बनवाते समय कमरा, रसोई, पूजा घर और मुख्य द्वार की दिशा पर लोग विशेष ध्यान देते हैं, लेकिन सीढ़ियां अक्सर छूट जाती हैं। वास्तु में सीढ़ियां भी घर की ऊर्जा से जुड़ी मानी जाती हैं। घर का माहौल सकारात्मक बनाए रखने के लिए सीढ़ियों का स्थान और दिशा वास्तु के अनुसार रखना चाहिए। नया मकान बनाते समय या पुराने घर में बदलाव करते समय सीढ़ियों से जुड़े जरूरी वास्तु नियमों को जान लेना बहुत जरूरी है।

सीढ़ियों के लिए कौन सी दिशा शुभ है?

वास्तु के अनुसार, दक्षिण, पश्चिम और दक्षिण-पश्चिम दिशा सीढ़ियों के लिए बेहतर बताई गई है। इन दिशाओं में सीढ़ी होने से घर की बनावट संतुलित रहती है। दक्षिण-पश्चिम यानी नैऋत्य कोण भारी वस्तुओं के लिए ठीक माना जाता है। सीढ़ियां भी घर का भारी हिस्सा हैं, इसलिए यह कोना उनके लिए अच्छा कहा जाता है।

उत्तर-पूर्व में सीढ़ी क्यों ना बनाएं?

उत्तर-पूर्व दिशा ईशान कोण कहलाती है। इसे पूजा, ध्यान और हल्की ऊर्जा से जोड़ा जाता है। वास्तु शास्त्र इस हिस्से को खुला और हल्का रखने का सलाह देता है। इसलिए यहां सीढ़ियां बनाने से बचना चाहिए। मान्यता है कि ईशान कोण में भारी निर्माण होने से घर का संतुलन बिगड़ सकता है। इस कोण में रोशनी और खुलापन रहे, तो घर हल्का लगता है।

चढ़ाई किस दिशा में हो?

वास्तु नियमों में केवल सीढ़ियों के स्थान का ही ध्यान नहीं रखा जाता, बल्कि उन पर चढ़ने के क्रम को भी उतना ही महत्वपूर्ण माना जाता है। सीढ़ियों की बनावट ऐसी होनी चाहिए कि जब भी कोई व्यक्ति उन पर ऊपर की ओर चढ़े, तो उसकी गति पूर्व से पश्चिम या फिर उत्तर से दक्षिण दिशा की ओर हो।

जन्माष्टमी के बाद तुरंत ना हटाएं लड्डू गोपाल का झूला! जानें क्या है सही नियम

सीढ़ियों के नीचे क्या रखें?

आजकल मॉडर्न घरों में सीढ़ियों के नीचे की खाली जगह स्टोरेज या अलमारी बन जाती है। वास्तु में इस स्थान को साफ और व्यवस्थित रखना बेहतर माना जाता है। जगह हो, तो सामान रखने के लिए उपयोग में ले सकते हैं। पूहालांकि इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि सीढ़ियों के निचले हिस्से में कभी भी पूजा घर या मंदिर का निर्माण नहीं करना चाहिए।

8 सितंबर को भौम प्रदोष व्रत, नोट करें प्रदोष काल का सटीक समय और पूजा की सही विधि

सीढ़ियों के घुमाव की सही दिशा

सीढ़ियों के निर्माण के समय उनके घुमाव और मुंह की दिशा पर भी विशेष ध्यान देना जरूरी है। वास्तु शास्त्र के अनुसार सीढ़ियां हमेशा दक्षिणावर्त यानी घड़ी की सुइयों की दिशा में ऊपर की ओर बढ़नी चाहिए। इसका तात्पर्य यह है कि जब आप सीढ़ियों से ऊपर की ओर जाएं, तो उनका घुमाव दाईं तरफ होना चाहिए। इस तरह की दक्षिणावर्त बनावट को घर में शुभ और सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाती है।

घर की नेगेटिविटी होगी दूर, ये 8 आसान उपाय लाएंगे सुख-शांति

क्या दिशा सच में माहौल बदलती है?

वास्तु शास्त्र सीढ़ियों की जगह और दिशा को घर की ऊर्जा से जोड़ता है। हालांकि, ऐसा नहीं है कि घर में सुख-शांति केवल सीढ़ियों की सही दिशा और बनावट से आती है। लेकिन गलत जगह पर सीढ़ियों के होने से घर का माहौल भारी हो सकता है।

सीढ़ियां घर का बोझ उठाती हैं, इसलिए इसे बनाने के लिए दिशा को हल्के में ना लें। दक्षिण-पश्चिम इसके लिए बेहतर दिशा है। ईशान कोण में गलती से भी सीढ़ियों का निर्माण ना कराएं।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

Navaneet Rathaur

लेखक के बारे में

Navaneet Rathaur

संक्षिप्त विवरण

नवनीत राठौर नए युग के डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें इस क्षेत्र में करीब 7 साल का अनुभव है। वर्तमान में वो भारत की प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान लाइव हिंदुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन के हिस्सा हैं। यहां वह अंक ज्योतिष, हस्तरेखा विज्ञान, वास्तु शास्त्र, वैदिक ज्योतिष से जुड़ी खबरें लिखते हैं।


विस्तृत बायो परिचय और अनुभव

डिजिटल मीडिया में अपनी अलग पहचान बना रहे नवनीत राठौर धर्म से जुड़ी खबरों को प्रमाणिक तौर पर और आमबोल चाल की भाषा में पाठकों के लिए परोसते हैं। वो अंक ज्योतिष, हस्तरेखा विज्ञान, वास्तु शास्त्र, वैदिक ज्योतिष जैसे विषयों पर लेख लिखकर पाठक को उसकी अहमियत के बारे में बताते हैं। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़े हैं और करीब 5 सालों से काम कर रहे हैं। अपने करियर के दौरान नवनीत ने वेबस्टोरी, फीचर, और एक्सप्लेनर कंटेंट में काम करते हुए अब ज्योतिषीय विषयों को डिजिटल पाठकों तक पहुंचाने में विशेष पहचान बनाई है।


शैक्षणिक पृष्ठभूमि

नवनीत ने शारदा विश्वविद्यालय, ग्रेटर नोएडा से जनसंचार एवं पत्रकारिता में स्नातक और शुभारती विश्वविद्यालय से परास्नातक की पढ़ाई की। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान संस्थानों से विषयों को तत्थात्मक और प्रभावी तरीके से समझने का सलीका सीखा। यहीं से उन्हें पत्रकारिता की सीढ़ी मिली।


नवनीत राठौर ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत जनतंत्र न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने सूर्या समाचार और अमर उजाला जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। इसके बाद नवनीत लाइव हिंदुस्तान की एस्ट्रोलॉजी टीम का हिस्सा बने। पाठकों को सरल, विश्वसनीय और प्रेरणादायक जानकारी प्रदान करना ही नवनीत राठौर का मुख्य उद्देश्य है।


विशेषज्ञता (Areas of Expertise)

अंक ज्योतिष
हस्तरेखा विज्ञान
वास्तु शास्त्र
वैदिक ज्योतिष

और पढ़ें
जानें Navratri 2026, Rashifal और Panchang की सटीक जानकारी। रोजाना पूजा-पाठ के लिए पढ़ें Durga Aarti, Durga Chalisa, Durga Stuti, Shiv Chalisa, Hanuman Chalisa और Bajrang Baan।
Hindi Newsधर्म न्यूज़घर की सीढ़ियों का वास्तु बिगाड़ सकता है सुख-शांति! जानें सही दिशा और जरूरी नियम