Varuthini ekadashi vrat katha: आज है वरुथिनी एकादशी, पढ़ें राजा मन्धाता की कथा, इस एकादशी का फल 10000 साल तपस्या जितना

Anuradha Pandey लाइव हिन्दुस्तान
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Varuthini ekadashi vrat katha in hindi:वरूथिनी के व्रत से सदा सौभाग्य लाभ और पापकी हानि होती है। यह समस्त लोकोंको भोग और मोक्ष प्रदान करनेवाली है। वरूथिनी के ही ब्रत से मान्धाता और धुन्धुमार आदि अन्य अनेक राजा स्वर्गलोक को प्राप्त हुए हैं। 

Varuthini ekadashi vrat katha: आज है वरुथिनी एकादशी, पढ़ें राजा मन्धाता की कथा, इस एकादशी का फल 10000 साल तपस्या जितना

Varuthini ekadashi vrat katha: वैशाख मासके कृष्ण पक्ष में किस नामकी एकादशी होती है। इस साल वरुथिनी एकदशी 13 अप्रैल को रखी जाएगी। भगवान्‌ श्रीकृष्ण ने कहा है कि राजन् वैशाख कृष्णपक्ष की एकादशी वरूथिनी के नामसे प्रसिद्ध है। यह इस लोक और परलोकमें भी सौभाग्य प्रदान करनेवाली है। वरूथिनी के व्रत से सदा सौभाग्य लाभ और पापकी हानि होती है। यह समस्त लोकोंको भोग और मोक्ष प्रदान करनेवाली है। वरूथिनी के ही ब्रत से मान्धाता और धुन्धुमार आदि अन्य अनेक राजा स्वर्गलोक को प्राप्त हुए हैं। जो दस हजार वर्षो तक तपस्या करता है, उसके समान ही फल वरूथिनी व्रत से भी मनुष्य प्राप्त कर लेता है। घोड़े के दान से हाथी का दान , उससे बड़ा भूमिदान और भूमिदानसे भी अधिक महत्त्व तिलदान और तिलदानसे बढ़कर स्वर्णदान ओर स्वर्णदान से बढ़कर अन्नदान है। पुरुषों ने कन्‍यादान को भी अन्नदानके ही समान बताया है। कन्यादान के तुल्य ही धेनु का दान है। इन सब दानों से बड़ा विद्यादान है। मनुष्य वरूथिनी एकादशीका व्रत करके विद्यादान का भी फल प्राप्त कर लेता है।

कौन सा दान बड़ा दान होता है? एकादशी से क्या फल मिलता है?

जो अपनी शक्तिके अनुसार आभूषणों से विभूषित करके पवित्र भाव से कन्याका दान करता है, उसके पुण्य की संख्या बतानेमें चित्रगुप्त भी असमर्थ हैं। वरूथिनी एकादशी करके भी मनुष्य उसी के समान फल प्राप्त करता है। इस व्रत में कुछ चीजों का त्याग करना चाहिए। इस विधिसे वरूथिनी एकादशी की जाती है । रात को जागरण करके जो भगवान्‌ मधुसूदनका पूजन करते हैं, वे सब पापोंसे मुक्त हो परमगतिको प्राप्त होते हैं। अतः पापभीरु मनुष्योंको पूर्ण प्रयल करके इस एकादशीका ब्रत करना चाहिए। यमराजसे डरने वाला मनुष्य. अवश्य 'वरूथिनी'का ब्रत करेम। इसके पढ़ने और सुननेसे सहस्र गोदानका फल मिलता है और मनुष्य सब पापोंसे मुक्त होकर विष्णुलोकमें प्रतिष्ठित होता है।

मान्धाता नाम के राजा की कथा

प्राचीन समय में नर्मदा नदी के किनारे मान्धाता नाम के राजा रहते थे। राजा का धर्म निभाने के साथ ही वह जप तप करते रहते थे। साथ ही प्रजा के प्रति दयाभाव रखते थे। एक बार वह तपस्या में लीन थे तो एक भालू ने उनका पैर चबा लिया और राजा को जंगल की ओर खींचकर ले गया। तब राजा ने विष्णु भगवान से प्रार्थना की। भक्त की पुकार सुनकर पहुंचे विष्णु भगवान ने अपने चक्र से भालू को मार डाला। लेकिन राजा का पैर भालू ने नोचकर खा लिया था। इस बात का राजा को बहुत दुख था। राजा को दुखी देखकर विष्णु भगवान ने कहा कि राजन भालू ने जो तुम्हारा पैर काटा है। वह तुम्हारे पूर्व जन्म का पाप है, जिसकी सजा तुम्हें इस जन्म में भुगतनी पड़ रही है। राजा ने इससे मुक्ति पाने का उपाय पूछा तो भगवान विष्णु ने कहा कि राजन, तुम मेरी वाराह अवतार मूर्ति की पूजा वरूथिनी एकादशी का व्रत धारण करके करो। इससे तुम्हारे पाप कट जाएंगे और व्रत के प्रभाव से दोबारा अंगों वाले हो जाआगे। इसके बाद राजा ने वरुथिनी एकादशी का व्रत धारण किया तो उनका पैर फिर से सही हो गया।

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शार्ट बायो

अनुराधा पांडेय पिछले 16 सालों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में एस्ट्रोलॉजी और करियर टीम का नेतृत्व कर रही हैं।


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अनुराधा पांडे पत्रकारिता जगत का एक अनुभवी चेहरा हैं, जिन्हें मीडिया में 16 वर्षों का व्यापक अनुभव है। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में असिस्टेंट एडिटर के पद पर कार्यरत हैं और संस्थान के एस्ट्रोलॉजी और करियर सेक्शन की इंचार्ज हैं। अनुराधा पिछले 10 सालों से लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में लिख रही हैं। डिजिटल पत्रकारिता के दौर में उन्होंने धर्म जैसे महत्वपूर्ण विषय पर अपनी लेखनी से करोड़ों पाठकों का भरोसा जीता है। उनके पास खबरों को न केवल प्रस्तुत करने, बल्कि सरल जानकारी, संतुलित सलाह, भरोसेमंद और विश्लेषणात्मक कंटेंट देने का लंबा अनुभव है। वह शिव महापुराण, नारद पुराण, पद्म पुराण और कई अन्य शास्त्रों के जटिल तथ्यों को अपने शब्दों में लिखकर पाठकों तक पहुंचाती हैं।


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