वरुथिनी एकादशी 2026: कब रखें व्रत? जानें सही तारीख, पारण समय और नियम

Yogesh Joshi लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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भगवान विष्णु को समर्पित वरुथिनी एकादशी वैशाख महीने के कृष्ण पक्ष में आती है और इसे काफी फलदायी व्रत माना जाता है। इस दिन भक्त उपवास रखकर भगवान विष्णु की पूजा करते हैं और पूरे दिन सात्विक जीवनशैली अपनाते हैं। इस साल एकादशी की तारीख को लेकर लोगों में कन्फ्यूजन बना हुआ है।

वरुथिनी एकादशी 2026: कब रखें व्रत? जानें सही तारीख, पारण समय और नियम

Varuthini Ekadashi 2026: भगवान विष्णु को समर्पित वरुथिनी एकादशी वैशाख महीने के कृष्ण पक्ष में आती है और इसे काफी फलदायी व्रत माना जाता है। इस दिन भक्त उपवास रखकर भगवान विष्णु की पूजा करते हैं और पूरे दिन सात्विक जीवनशैली अपनाते हैं। इस साल एकादशी की तारीख को लेकर लोगों में कन्फ्यूजन बना हुआ है। वजह वही है- तिथि का दो अलग-अलग दिनों में पड़ना। ऐसे में सवाल उठता है कि व्रत 13 अप्रैल को रखा जाए या 14 अप्रैल को।

दरअसल, हिंदू पंचांग में एकादशी व्रत का नियम साफ है। व्रत उसी दिन रखा जाता है, जिस दिन सूर्योदय के समय एकादशी तिथि होती है। इसी आधार पर सही तारीख तय की जाती है। इस साल वरुथिनी एकादशी तिथि 13 अप्रैल की रात 1 बजकर 16 मिनट से शुरू हो रही है और 14 अप्रैल की रात 1 बजकर 8 मिनट तक रहेगी। लेकिन खास बात यह है कि 13 अप्रैल की सुबह सूर्योदय के समय एकादशी तिथि मौजूद रहेगी। इसलिए व्रत 13 अप्रैल, सोमवार को ही रखा जाएगा, 14 अप्रैल को नहीं।

पारण कब करें?

एकादशी व्रत का पारण अगले दिन यानी 14 अप्रैल, मंगलवार को किया जाएगा। पारण का समय सुबह 6 बजकर 54 मिनट से लेकर 8 बजकर 31 मिनट तक रहेगा। इसी समय के बीच व्रत खोलना शुभ माना जाता है।

क्या है वरुथिनी एकादशी का महत्व- धार्मिक मान्यता के अनुसार, यह व्रत व्यक्ति को नकारात्मक प्रभावों से बचाता है और जीवन में सकारात्मकता लाता है। ऐसा भी कहा जाता है कि इस दिन व्रत रखने से पुराने पापों से मुक्ति मिलती है और सुख-समृद्धि के रास्ते खुलते हैं। “वरुथिनी” शब्द का मतलब ही होता है रक्षा करना। यानी यह एकादशी भक्तों को मुश्किलों से बचाने और सही दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।

व्रत के दौरान किन बातों का रखें ध्यान- इस दिन खान-पान और दिनचर्या दोनों पर ध्यान देना जरूरी होता है। अनाज, चावल, प्याज और लहसुन से परहेज किया जाता है। ज्यादातर लोग फल, दूध और सूखे मेवे जैसे हल्के और सात्विक आहार लेते हैं। कुछ लोग निर्जला व्रत भी रखते हैं, लेकिन अगर ऐसा करना संभव न हो तो शरीर के अनुसार पानी पीना ठीक रहता है। साथ ही, भगवान विष्णु की पूजा, मंत्र जाप और व्रत कथा सुनना या पढ़ना भी इस दिन का अहम हिस्सा माना जाता है।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य है और सटीक है। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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लेखक के बारे में

Yogesh Joshi

योगेश जोशी डिजिटल पत्रकारिता में 8 वर्षों से सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। ज्योतिष और धार्मिक विषयों पर उनका लेखन पाठक-केंद्रित और व्यावहारिक दृष्टिकोण के लिए जाना जाता है। राशिफल, ग्रह-गोचर, दशा-महादशा, अंकज्योतिष, सामुद्रिक शास्त्र, वास्तु, फेंगशुई और पूजा-विधि जैसे विषय उनके काम का प्रमुख हिस्सा हैं।


परिचय और अनुभव


योगेश जोशी ने डिजिटल मीडिया में काम करते हुए खबर और कंटेंट के बदलते स्वरूप को नजदीक से समझा है। पत्रकारिता में 8 वर्षों के अनुभव के साथ वह फिलहाल लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर की भूमिका निभा रहे हैं।


न्यूज़ और फीचर कंटेंट से शुरू हुआ उनका सफर आज ज्योतिष और धार्मिक विषयों तक पहुंच चुका है, जहां वह पारंपरिक ज्ञान को मौजूदा समय और डिजिटल पाठक की जरूरतों के हिसाब से प्रस्तुत करते हैं। उनका फोकस हमेशा इस बात पर रहता है कि कंटेंट जानकारी दे, उलझाए नहीं।


शैक्षणिक पृष्ठभूमि


योगेश जोशी ने मास कम्युनिकेशन में स्नातक की पढ़ाई की है। पत्रकारिता की इस पढ़ाई ने उन्हें तथ्यों के साथ जिम्मेदारी और संतुलन बनाए रखने की समझ दी, जो उनके लेखन में साफ झलकती है।


करियर की शुरुआत और प्रोफेशनल सफर


योगेश ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत अमर उजाला के डिजिटल प्लेटफॉर्म से की। यहां उन्होंने डिजिटल न्यूज़, कंटेंट राइटिंग और एडिटिंग पर काम करते हुए मजबूत आधार तैयार किया। इसके बाद डिजिटल मीडिया में लगातार काम करते हुए उन्होंने एस्ट्रोलॉजी और धार्मिक विषयों से जुड़े कंटेंट में विशेषज्ञता विकसित की।
पाठक किस भाषा में बात समझता है और किस तरह की जानकारी उसके लिए उपयोगी होती है—यह समझ उनके प्रोफेशनल सफर की सबसे बड़ी ताकत रही है।

एस्ट्रोलॉजी लेखन और उद्देश्य


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काम के अलावा योगेश को सामाजिक विषयों पर पढ़ना, लिखना और भारतीय परंपराओं को समझना पसंद है। उनका मानना है कि एक पत्रकार के लिए सीखना और खुद को अपडेट रखना सबसे जरूरी है।


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