Varuthini Ekadashi 2026 Daan: वरुथिनी एकादशी पर इन 10 चीजों का करे दान, मिलेगा अक्षय पुण्य

Dheeraj Pal लाइव हिन्दुस्तान
share

वैशाख महीने के कृष्ण पक्ष की एकादशी को वरुथिनी एकादशी कहा जाता है, जो इस साल 13 अप्रैल को पड़ रही है। पूजा और व्रत के अलावा इस दिन दान का भी खास महत्व होता है। मान्यता है कि इस दिन दान करने से भगवान विष्णु की कृपा भक्तों पर रहती है।

Varuthini Ekadashi 2026 Daan: वरुथिनी एकादशी पर इन 10 चीजों का करे दान, मिलेगा अक्षय पुण्य

हिंदू धर्म में एकादशी व्रत को बहुत शुभ और श्रेष्ठ माना जाता है। मान्यता है कि जो व्यक्ति इस दिन श्रद्धा से व्रत करता है, उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। वैशाख महीने के कृष्ण पक्ष की एकादशी को वरुथिनी एकादशी कहा जाता है, जो इस साल 13 अप्रैल को पड़ रही है। ‘वरुथिनी’ शब्द का अर्थ होता है रक्षा करने वाला कवच। यह व्रत भगवान विष्णु की कृपा पाने और परिवार में सुख-समृद्धि बनाए रखने के लिए किया जाता है। साथ ही इस दिन विधि-विधान से पूजा और व्रत करने से अक्षय पुण्य मिलता है, यानी ऐसा पुण्य जिसका फल लंबे समय तक जीवन में बना रहता है। पूजा और व्रत के अलावा इस दिन दान का भी खास महत्व होता है। मान्यता है कि इस दिन दान करने से भगवान विष्णु की कृपा भक्तों पर रहती है।

वरुथिनी एकादशी 2026: तिथि और मुहूर्त

वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की वरुथिनी एकादशी इस वर्ष 13 अप्रैल 2026, सोमवार को मनाई जाएगी। द्रिक पंचांग के अनुसार, एकादशी तिथि 13 अप्रैल की रात 1:17 बजे शुरू होकर 14 अप्रैल की रात 1:08 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर व्रत 13 अप्रैल को ही रखा जाएगा, जबकि व्रत का पारण 14 अप्रैल 2026 को द्वादशी तिथि में किया जाएगा।

दान का महत्व

वरुथिनी एकादशी के दिन किया गया दान पुण्य कई गुना फल देता बढ़कर मिलता है। खास कर गर्मियों का दिन है। छाता, जल, जूता-चप्पल जैसी जरूरी चीजों को किसी जरूरतमंद को दान करने से पुण्य कई गुणा बढ़ जाता है। साथ ही दान करने से व्यक्ति समस्त पापों से मुक्त हो जाता है।

इन चीजों का करें दान

  1. तिल
  2. अन्न
  3. भोजन
  4. जूते-चप्पल
  5. छाता
  6. मटका
  7. जल
  8. धन
  9. हल्दी का दान
  10. वस्त्र दान

दान से लाभ

मान्यता है कि अगर कोई व्यक्ति इन चीजों का दान श्रद्धापूर्वक करता है, तो पुण्य फल की प्राप्ति होती है। साथ ही ये सभी दान सोना, चांदी, हाथी और घोड़े जैसे महादानों से भी अधिक फल देने वाले माने जाते हैं। साथ ही इन चीजों के दान से न केवल आपके वर्तमान जीवन के कष्ट दूर होते हैं, बल्कि मृत्यु के पश्चात मोक्ष की प्राप्ति होती है।

भगवान विष्णु को अर्पित करें ये चीजें

- वरुथिनी एकादशी पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का दक्षिणावर्ती शंख से अभिषेक करें।
- अभिषेक के जल में केसर मिलाकर उपयोग करना बहुत शुभ माना जाता है।
- पूजा के दौरान भगवान को लाल और पीले रंग के चमकीले वस्त्र अर्पित करें।
- भगवान विष्णु और लक्ष्मी जी को चंदन या हल्दी का तिलक लगाएं।
- पूजा में धूप और दीप जलाकर विधि-विधान से आरती करें।
- भगवान को पीले फूल और फूलों की माला अर्पित करें।
- भोग में केला, गुड़ और मिठाई तुलसी के पत्तों के साथ चढ़ाएं।
- मान्यता है कि तुलसी के बिना भगवान विष्णु भोग स्वीकार नहीं करते।

डिस्क्लेमरः इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

Dheeraj Pal

लेखक के बारे में

Dheeraj Pal

संक्षिप्त विवरण
धीरज पाल एक डिटिजल पत्रकार है, जिन्हें इस क्षेत्र में 7 से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वो भारत की प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान लाइव हिंदुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन का हिस्सा हैं। यहां वह ग्रह गोचर, वास्तु शास्त्र, न्यूमरोलॉजी, रत्न शास्त्र से जुड़ी खबरें लिखते हैं।

विस्तृत बायो
परिचय और अनुभव

धीरज पाल डिजिटल मीडिया में उभरता एक ऐसा नाम है, जो पाठक को धर्म से जुड़ी खबरों को प्रमाणिक तौर पर और आमबोल चाल की भाषा परोसते हैं। वो ग्रह नक्षत्रों, वास्तु शास्त्र, अंक ज्योतिष,रत्न शास्त्र जैसे विषयों पर लेख लिखकर पाठक को उसकी अहमियत के बारे में बताते हैं। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़े हैं और पिछले 4 सालों से काम कर रहे हैं। अपने करियर के दौरान धीरज ने समाचार, फीचर, और एक्सप्लेनर कंटेंट में काम करते हुए अब ज्योतिषीय विषयों को डिजिटल पाठकों तक पहुंचाने में विशेष पहचान बनाई है।

शैक्षणिक पृष्ठभूमि
धीरज ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए इन मीडिया स्टडीज और राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज से जनसंचार एवं पत्रकारिता से परास्नातक की पढ़ाई की। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान संस्थानों से विषयों को तत्थात्मक और प्रभावी तरीके से समझने का सलीका सीखा। यहीं से उन्हें पत्रकारिता की सीढ़ी मिली।

धीरज पाल ने अपने पत्रकारिता कर की शुरुआत एपीएन न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने लोकमत न्यूज हिंदी और एनडीटीवी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। इसके बाद वो लाइव हिंदुस्तान की एस्ट्रोलॉजी टीम का हिस्सा बने। अब इनका एकमात्र उद्देश्य ज्योतिषीय जानकारी को रुचिगत, सरल, प्रमाणिक रूप में प्रस्तुत करना है।

व्यक्तिगत रुचियां
उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के निवासी धीरज पाल को पत्रकारिता और ज्योतिषीय अध्ययन के साथ-साथ घूमने, किताबें पढ़ने और क्रिकेट खेलने का शौक है।

विशेषज्ञता (Areas of Expertise):
ग्रह और नक्षत्रों का असर
वास्तु शास्त्र
न्यूमरोलॉजी
रत्न विज्ञान

और पढ़ें
जानें लेटेस्ट Dharm News, Aaj ka Rashifal और सटीक Panchang की जानकारी। अपनी डेली पूजा के लिए यहाँ पढ़ें Shiv Chalisa, Hanuman Chalisa और Bajrang Baanहिंदू कैलेंडर 2026 की शुभ तिथियों के साथ अपने हर दिन को खास बनाएं!