Varuthini ekadashi 2026: वरुथिनी एकादशी पर करें तुलसी से जुड़े ये उपाय, जीवन में बढ़ेगा धन-धान्य
वरुथिनी एकादशी का व्रत रखने से संतान सुख, पारिवारिक खुशहाली और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है। साथ ही, एकादशी के दिन तुलसी पूजन का खास महत्व होता है। अगर इस दिन तुलसी से जुड़े कुछ सरल उपाय कर लिए जाएं, तो जीवन की कई परेशानियां दूर हो सकती हैं।

हिंदू धर्म में पूरे साल 24 एकादशी व्रत होते हैं, जो हर महीने दो बार रखे जाते हैं और हर एक का अपना खास महत्व होता है। इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने से विशेष फल मिलता है। मान्यता है कि सच्चे मन से व्रत और पूजा करने पर घर में सुख, शांति और समृद्धि आती है। वैशाख महीने की पहली एकादशी को बहुत शुभ माना जाता है। इसे वरुथिनी एकादशी कहा जाता है, जो 13 अप्रैल 2026 को पड़ रहा है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण और माता लक्ष्मी की पूजा करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं, पापों का नाश होता है और जीवन में सकारात्मक बदलाव आता है। वरुथिनी एकादशी का व्रत रखने से संतान सुख, पारिवारिक खुशहाली और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है। साथ ही, एकादशी के दिन तुलसी पूजन का खास महत्व होता है। अगर इस दिन तुलसी से जुड़े कुछ सरल उपाय कर लिए जाएं, तो जीवन की कई परेशानियां दूर हो सकती हैं।
वरुथिनी एकदशी पर करें तुलसी से जुड़े उपाय
तुलसी की माला से श्रीहरि के मंत्र का जाप
भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए वरूथिनी एकादशी के दिन तुलसी की माला से श्रीहरि के मंत्रों का जप करना बेहद शुभ माना जाता है। जप करते समय मन को शांत रखें और पूरी श्रद्धा के साथ भगवान का स्मरण करें। इसके बाद सच्चे मन से सुख-समृद्धि और आर्थिक उन्नति के लिए प्रार्थना करें। मान्यता है कि इस विधि से किया गया मंत्र जाप जीवन में सकारात्मक ऊर्जा लाता है और धीरे-धीरे आर्थिक परेशानियां दूर होने लगती हैं, साथ ही घर में सुख और शांति का वास होता है।
भगवान विष्णु के मंत्र
1. ॐ नमोः नारायणाय॥
2. ॐ नमोः भगवते वासुदेवाय॥
3. ॐ अच्युताय नमः
4. ॐ अनंताय नमः
5. ॐ गोविंदाय नमः
तुलसी के पौधे के पास दीपक जलाएं
अगर नौकरी में बार-बार रुकावटें आ रही हैं और मेहनत के बावजूद सफलता नहीं मिल रही है, तो वरुथिनी एकादशी के दिन तुलसी के पौधे के पास 11, 21 या 51 दीपक जलाएं और श्रद्धा के साथ तुलसी चालीसा का पाठ करें। मान्यता है कि इस उपाय को करने से जीवन की बाधाएं धीरे-धीरे दूर होने लगती हैं और सफलता के रास्ते खुलने लगते हैं।
तुलसी की करें परिक्रमा
धन से जुड़ी परेशानियों से छुटकारा पाने के लिए वरूथिनी एकादशी के दिन तुलसी की विधि-विधान से पूजा करें। ध्यान रखें कि इस दिन तुलसी पर जल चढ़ाना वर्जित माना जाता है। पूजा के बाद तुलसी के पौधे की 7 बार परिक्रमा करें और मन ही मन सुख-समृद्धि की कामना करें। हिंदू मान्यता के अनुसार तुलसी को मां लक्ष्मी का स्वरूप माना जाता है, इसलिए इस दिन उनकी पूजा करने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और घर में धन-धान्य की वृद्धि होती है।
अन्य उपाय
- वरूथिनी एकादशी के दिन तुलसी के पौधे पर कलावा चढ़ाना शुभ माना जाता है। इससे घर की नकारात्मक ऊर्जा कम होती है और सकारात्मक माहौल बनता है।
- दांपत्य जीवन को सुखी बनाने के लिए इस दिन तुलसी माता को श्रृंगार की सामग्री अर्पित करना लाभकारी होता है, जिससे रिश्तों में प्रेम और मधुरता बढ़ती है।
- यदि विवाह में देरी हो रही है, तो इस दिन तुलसी और शालिग्राम की पूजा करना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे अच्छे विवाह योग बनते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
तुलसी से जुड़ी ना करें ये गलतियां
1. वरूथिनी एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते को नहीं तोड़ना चाहिए। यदि आप पूजा में इसका इस्तेमाल करना चाहते हैं, तो पत्ते एक दिन पहले तोड़कर रखे जा सकते हैं।
2. हर दिन तुलसी को जल देना शुभ माना जाता है, लेकिन एकादशी के दिन तुलसी पर जल अर्पित नहीं किया जाता है।
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3. सुबह बहुत जल्दी कम रोशनी में तुलसी को छूना या हिलाना अशुभ माना गया है। जब तक सूर्य प्रकाश न हो, तुलसी को छूने से परहेज करना चाहिए।
4. कुछ लोग पूजा स्थान पर रखी तुलसी माला को साफ करने के लिए तोड़ देते हैं, लेकिन एकादशी के दिन ऐसा करना एक बड़ा दोष माना गया है। माला को पूरी श्रद्धा से पूजा स्थान पर रहने दें।
5. धार्मिक मान्यता है कि तुलसी के पास कठोर शब्द बोलना, गुस्सा करना या झगड़ा करना अत्यंत अपवित्र माना जाता है। इससे पूजा का फल कम हो जाता है।
डिस्क्लेमरः इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।
लेखक के बारे में
Dheeraj Palसंक्षिप्त विवरण
धीरज पाल एक डिटिजल पत्रकार है, जिन्हें इस क्षेत्र में 7 से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वो भारत की प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान लाइव हिंदुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन का हिस्सा हैं। यहां वह ग्रह गोचर, वास्तु शास्त्र, न्यूमरोलॉजी, रत्न शास्त्र से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
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धीरज पाल डिजिटल मीडिया में उभरता एक ऐसा नाम है, जो पाठक को धर्म से जुड़ी खबरों को प्रमाणिक तौर पर और आमबोल चाल की भाषा परोसते हैं। वो ग्रह नक्षत्रों, वास्तु शास्त्र, अंक ज्योतिष,रत्न शास्त्र जैसे विषयों पर लेख लिखकर पाठक को उसकी अहमियत के बारे में बताते हैं। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़े हैं और पिछले 4 सालों से काम कर रहे हैं। अपने करियर के दौरान धीरज ने समाचार, फीचर, और एक्सप्लेनर कंटेंट में काम करते हुए अब ज्योतिषीय विषयों को डिजिटल पाठकों तक पहुंचाने में विशेष पहचान बनाई है।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
धीरज ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए इन मीडिया स्टडीज और राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज से जनसंचार एवं पत्रकारिता से परास्नातक की पढ़ाई की। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान संस्थानों से विषयों को तत्थात्मक और प्रभावी तरीके से समझने का सलीका सीखा। यहीं से उन्हें पत्रकारिता की सीढ़ी मिली।
धीरज पाल ने अपने पत्रकारिता कर की शुरुआत एपीएन न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने लोकमत न्यूज हिंदी और एनडीटीवी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। इसके बाद वो लाइव हिंदुस्तान की एस्ट्रोलॉजी टीम का हिस्सा बने। अब इनका एकमात्र उद्देश्य ज्योतिषीय जानकारी को रुचिगत, सरल, प्रमाणिक रूप में प्रस्तुत करना है।
व्यक्तिगत रुचियां
उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के निवासी धीरज पाल को पत्रकारिता और ज्योतिषीय अध्ययन के साथ-साथ घूमने, किताबें पढ़ने और क्रिकेट खेलने का शौक है।
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