
महादेव का अनोखा मंदिर जहां भोग में चढ़ाया जाता है बैंगन, जानें इससे जुड़ी मान्यताएं
हर एक मंदिर की अपनी अनोखी मान्यताएं हैं, जिनपर शिव भक्तों की पूरी आस्था है। आज हम आपको एक अनोखे शिव मंदिर के बारे में जानते हैं, जहां महादेव को बैंगन चढ़ाया जाता है। जी हां, आपने सही पढ़ा, बैंगन जो एक सब्जी है। चलिए जानते हैं कि कहां है यह मंदिर और इससे जुड़ी क्या मान्यताएं हैं।
भारत में भगवान शिव के कई प्राचीन मंदिर हैं, जिनका अपना इतिहास है। हर एक मंदिर की अपनी अनोखी मान्यताएं हैं, जिनपर शिव भक्तों की पूरी आस्था है। भोलेबाबा बेहद दयालु हैं। भक्त उन्हें प्रसन्न करने के लिए तरह-तरह की चीजें चढ़ाते हैं। इतना ही नहीं प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज जी कहते हैं कि जो कोई स्वीकार नहीं करता, वो महादेव स्वीकार करते हैं। वो जल चढ़ाने से भी प्रसन्न हो जाते हैं। वो बिल्व पत्र चढ़ाने से भी खुश हो जाते हैं। कुल मिलाकर उनकी पूजा में ज्यादा पैसों वाली सामग्री नहीं है। ऐसे ही आज हम आपको एक अनोखे शिव मंदिर के बारे में जानते हैं, जहां महादेव को बैंगन चढ़ाया जाता है। जी हां, आपने सही पढ़ा, बैंगन जो एक सब्जी है। चलिए जानते हैं कि कहां है यह मंदिर और इससे जुड़ी क्या मान्यताएं हैं।
बटेश्वर नाथ मंदिर
जिस मंदिर में महादेव को बैंगन चढ़ाया जाता है, वह मंदिर बिहार के वैशाली जिले के अंडवाड़ा गांव में स्थित है। इस मंदिर का नाम बटेश्वर नाथ मंदिर है। यहां शिव भक्त बैंगन का चढ़ावा चढ़ाते हैष खासकर महाशिवरात्रि के अवसर हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं और महादेव पर जलाभिषेक करने के साथ ही बैगन चढ़ाते हैं। यहां पर कच्चा बैंगन का भोग लगता है। साथ ही उसको प्रसाद के रूप में बांटा जाता है।
मनोकामनाएं होती है पूरी
बटेश्वर नाथ मंदिर को लेकर यह मान्यता है कि जो भी भक्त मन में जो मनोकामना मानकर श्रद्धालु बैंगन चढ़ते हैं, उनकी भगवान मनोकामना जरूर पूरी करते हैं। मान्यता है कि जिस भी भक्त की मनोकामना पूरी हो जाती है, वो यहां अपनी क्षमता अनुसार भोलेनाथ पर 11, 21, 51 और 101 किलो बैंगन का भार चढ़ाते हैं।
मंदिर से जुड़ी किवदंती
इस अनोखी परंपरा के पीछे कई किवदंतियां हैं। एक किवदंती है कि सदियों पहले इस क्षेत्र में भीषण अकाल पड़ा था। यहां के भक्तों के पास भगवान शिव को चढ़ाने के लिए कुछ नहीं बचा, तो उस समय बैंगन का पैदावार होता था। इसके बाद भक्तों ने भोलेबाबा को बैंगन अर्पित किया। इससे महादेव प्रसन्न हुए और इस क्षेत्र में खुशहाली लौट आई। मान्यता है कि मंदिर के गर्भ गृह में वट का वृक्ष है, उसी वटवृक्ष से शिवलिंग उत्पन्न हुआ, जिसके बाद मंदिर का निर्माण कराया गया। इतना ही नहीं यहां के किसान खेतों में सब्जी उगाते हैं। जब सब्जी उपज जाती है, तो उसे चढ़ाने के लिए इस मंदिर में किसान आते हैं। मान्यता है कि इससे फसल अच्छी होती है।
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शैक्षणिक पृष्ठभूमि
धीरज ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए इन मीडिया स्टडीज और राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज से जनसंचार एवं पत्रकारिता से परास्नातक की पढ़ाई की। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान संस्थानों से विषयों को तत्थात्मक और प्रभावी तरीके से समझने का सलीका सीखा। यहीं से उन्हें पत्रकारिता की सीढ़ी मिली।
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