Vaishakh Maah 2026: कल से शुरू हो रहा है वैशाख का महीना, जानिए महत्व, क्या करें और क्या नहीं
Vaishakh Month 2026: पुराणों में कहा गया है कि जो व्यक्ति इस महीने में सूर्योदय से पहले स्नान करता है और व्रत रखता है। वो कभी दरिद्र नहीं होता। उस पर भगवान की कृपा बनी रहती है और उसे सभी दुखों से मुक्ति मिलती है।

हिंदू कैलेंडर का दूसरा महीना वैशाख है, जिसका खास महत्व होता है। चैत्र मास के बाद वैशाख मास का आरंभ हो जाता है। इस बार वैशाख माह की शुरुआत 3 अप्रैल से हो रही है। यह माह 1 मई पूर्णिमा तिथि को समाप्त होगा। इन दिनों में भगवान विष्णु की पूजा करने का विशेष महत्व है। साथ ही इन दिनों तीर्थ में जाकर, सूर्योदय से पहले स्नान और पूजा की जाती है। वैशाख महीने में इस तरह स्नान और पूजा के साथ व्रत-उपवास रखने से महायज्ञ करने जितना पुण्य फल मिलता है।
वैशाख माह की तिथि
पंचांग के मुताबिक वैशाख मास की शुरुआत 3 अप्रैल से मानी जाएगी। प्रतिपदा तिथि का आरंभ 2 अप्रैल को सुबह 7 बजकर 42 मिनट पर होगा और यह 3 अप्रैल को सुबह 8 बजकर 43 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर 3 अप्रैल से ही वैशाख महीने का प्रारंभ माना जाएगा।
वैशाख माह का महत्व
स्कंद पुराण में वैशाख मास को सभी महीनों में उत्तम बताया गया है। स्कंद पुराण के एक श्लोक के अनुसार “न वैशाखसमो मासो न कृतं समं तपः। न दानं सममस्त्येव न गंगा सममं जलम्॥” इसका अर्थ है कि वैशाख के समान कोई महीना नहीं, न ही इसके समान कोई तप, दान या गंगा जल है। पुराणों में कहा गया है कि जो व्यक्ति इस महीने में सूर्योदय से पहले स्नान करता है और व्रत रखता है। वो कभी दरिद्र नहीं होता। उस पर भगवान की कृपा बनी रहती है और उसे सभी दुखों से मुक्ति मिलती है। क्योंकि इस महीने के देवता भगवान विष्णु ही है। वैशाख महीने में जल दान का विशेष महत्व है।
नदी में स्नान का महत्व
पद्म पुराण के अनुसार महीरथ नामक राजा ने केवल वैशाख मास में किए गए स्नान के पुण्य से ही वैकुण्ठ धाम की प्राप्ति की थी। मान्यता है कि इस पवित्र महीने में सूर्योदय से पहले किसी तीर्थ, सरोवर, नदी या कुएं पर स्नान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। यदि बाहर जाना संभव न हो, तो घर पर स्नान करते समय पवित्र नदियों का स्मरण और उनके नामों का जप करना चाहिए। स्नान के पश्चात सूर्योदय के समय भगवान सूर्य को अर्घ्य अर्पित करना विशेष फलदायी माना गया है।
वैशाख माह में क्या करें
- वैशाख मास में जल दान का विशेष महत्व माना गया है। इस दौरान प्याऊ लगवाना या किसी प्याऊ में घड़े/मटके का दान करना अत्यंत पुण्यदायी होता है।
- जरूरतमंद लोगों को पंखा, खरबूजा, फल, अन्न आदि का दान करना शुभ माना जाता है।
- मंदिरों में अन्न और भोजन का दान करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।
- इस पवित्र महीने में ब्रह्मचर्य का पालन करें और सात्विक भोजन ग्रहण करें।
- पूजा-पाठ, जप और यज्ञ के साथ संयमित जीवन अपनाएं और एक समय भोजन करना लाभकारी माना गया है।
- वैशाख मास में रोजाना शाम के समय तुलसी के सामने दीपक जरूर जलाएं। ऐसा करने से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
वैशाख माह में क्या नहीं करें
- इस महीने में मांसाहार, शराब और किसी भी प्रकार के नशे से दूर रहना चाहिए।
- शरीर पर तेल की मालिश करवाने से परहेज करना चाहिए।
- दिन में सोना अशुभ माना जाता है, इसलिए इससे बचें।
- कांसे के बर्तन में भोजन करने से भी परहेज करना चाहिए।
- रात में भोजन करने और पलंग पर सोने से बचना चाहिए।
डिस्क्लेमरः इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।
लेखक के बारे में
Dheeraj Palसंक्षिप्त विवरण
धीरज पाल एक डिटिजल पत्रकार है, जिन्हें इस क्षेत्र में 7 से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वो भारत की प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान लाइव हिंदुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन का हिस्सा हैं। यहां वह ग्रह गोचर, वास्तु शास्त्र, न्यूमरोलॉजी, रत्न शास्त्र से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
विस्तृत बायो
परिचय और अनुभव
धीरज पाल डिजिटल मीडिया में उभरता एक ऐसा नाम है, जो पाठक को धर्म से जुड़ी खबरों को प्रमाणिक तौर पर और आमबोल चाल की भाषा परोसते हैं। वो ग्रह नक्षत्रों, वास्तु शास्त्र, अंक ज्योतिष,रत्न शास्त्र जैसे विषयों पर लेख लिखकर पाठक को उसकी अहमियत के बारे में बताते हैं। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़े हैं और पिछले 4 सालों से काम कर रहे हैं। अपने करियर के दौरान धीरज ने समाचार, फीचर, और एक्सप्लेनर कंटेंट में काम करते हुए अब ज्योतिषीय विषयों को डिजिटल पाठकों तक पहुंचाने में विशेष पहचान बनाई है।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
धीरज ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए इन मीडिया स्टडीज और राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज से जनसंचार एवं पत्रकारिता से परास्नातक की पढ़ाई की। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान संस्थानों से विषयों को तत्थात्मक और प्रभावी तरीके से समझने का सलीका सीखा। यहीं से उन्हें पत्रकारिता की सीढ़ी मिली।
धीरज पाल ने अपने पत्रकारिता कर की शुरुआत एपीएन न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने लोकमत न्यूज हिंदी और एनडीटीवी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। इसके बाद वो लाइव हिंदुस्तान की एस्ट्रोलॉजी टीम का हिस्सा बने। अब इनका एकमात्र उद्देश्य ज्योतिषीय जानकारी को रुचिगत, सरल, प्रमाणिक रूप में प्रस्तुत करना है।
व्यक्तिगत रुचियां
उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के निवासी धीरज पाल को पत्रकारिता और ज्योतिषीय अध्ययन के साथ-साथ घूमने, किताबें पढ़ने और क्रिकेट खेलने का शौक है।
विशेषज्ञता (Areas of Expertise):
ग्रह और नक्षत्रों का असर
वास्तु शास्त्र
न्यूमरोलॉजी
रत्न विज्ञान


