
धनतेरस पर यम दीपक में आज डालें ये 3 चीजें, मां लक्ष्मी बरसाएंगी कृपा
संक्षेप: Yam Deepak Rules and Direction: धनतेरस पर यम दीपदान का बड़ा महत्व है। जानिए आखिर इस दीए में क्या-क्या रखना चाहिए और इसे जलाकर रखने की सही दिशा क्या है? साथ ही जानिए इसे जलाते वक्त किस मंत्र का उच्चारण करना सही होता है।
Yam Deepak Muhurat 2025: आज यानी 18 अक्टूबर को धनतेरस है। इस खास दिन पर लोग खरीददारी करते हैं। ये पुरानी परंपरा है, जिसे लोग काफी समय से निभाते आ रहे हैं। धनतेरस को धन त्रयोदशी भी कहते हैं। दरअसल आज के दिन ही समुद्र मंथन से भगवान धन्वंतरि सोने का कलश लेकर अवतरित हुए थे, जिसमें अमृत था। इस खास दिन को धनतेरस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन मां लक्ष्मी और भगवान गणेश के साथ-साथ भगवान कुबेर और धन्वंतरि की पूजा होती है। साथ ही इस दिन मृत्यु के देवता यमराज के लिए यम दीपदान किया जाता है। आज बात करेंगे इस यम दीपदान के बारे में। धार्मिक मान्यता के अनुसार यम दीपदान का दीया सही दिशा और सही समय पर घर के बाहर रख देना चाहिए। वहीं इसे जलाते वक्त इसमें खास चीजों को डालना चाहिए।

यम दीपदान के दीए में डालें ये चीजें
ज्योतिषीय मान्यता के हिसाब से यम दीपदान के दीए को कभी भी खाली नहीं जलाना चाहिए। इसमें एक सुपारी, एक पीली कौड़ी और एक सिक्का डालकर जलाना शुभ होता है। 18 अक्टूबर की शाम 5:48 बजे से 7:04 बजे के बीच में यम दीपदान का दीया जलाना शुभ होगा। इस दीए को घर के मुख्य द्वार पर दक्षिण दिशा में रख देना चाहिए। वहीं ये चौमुखी होना चाहिए। चाहे तो आप चार दीयों को जला सकते हैं। हालांकि एक ही दीए में चार दिशाओं में बाती रखना ज्यादा सही होता है। इस दीए में सरसों का ही तेल डालें।
यम दीपदान के समय पढ़ें ये मंत्र
मृत्युनाऽ पाशहस्तेन कालेन भार्या सह।
त्रयोदशीं दीपदानात् सूर्यजः प्रीयतामिति॥
यम दीपदान करने की वजह
यम दीपदान घर में अकाल मृत्यु को टालती है। इसी के साथ यमराज से घरवालों के अच्छे स्वास्थ्य की कामना की जाती है। साथ ही इस दीए की वजह से घरवाले बुरी नजर से बच जाते हैं। दीए के चौमुख में से एक बाती यमराज के लिए होती है तो दूसरी चित्रगुप्त और बाकी दो यमदूत के लिए होती है। यम दीपदान के शक्तिशाली मंत्र का उच्चारण सही तरीके से करते हुए अपने और अपने परिवार के स्वास्थ्य की मंगल कामना करना शुभ होता है।
डिस्क्लेमर- (इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए वास्तुशास्त्र विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।)

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