हरिद्वार जा रहे हैं तो कहां से लाएं गंगाजल? हरिद्वार के किस घाट पर गिरी थीं अमृत की बूंदें

Apr 15, 2026 11:30 pm ISTGarima Singh लाइव हिन्दुस्तान
share

हरिद्धार में पूरे साल श्रद्धालुओं और पर्यटक आते हैं। यहां के हर की पौड़ी पर बने ब्रह्मकुंड घाट की मान्यता काफी पुरानी है। इसका कनेक्शन समुद्र मंथन से भी है। इसी वजह से लोग यहां से गंगाजल जरूर लाते हैं।

हरिद्वार जा रहे हैं तो कहां से लाएं गंगाजल? हरिद्वार के किस घाट पर गिरी थीं अमृत की बूंदें

देवभूमि उत्तराखंड में कई ऐसे धार्मिक और पवित्र जगहें हैं जिनका शास्त्रों में भी वर्णन होता है। इन्हीं में से एक हरिद्वार है। ये एक ऐसी विश्व प्रसिद्ध तीर्थ नगरी है जहां पूरे साल देश विदेश से कई श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं। किसी खास त्योहार या फिर तिथि पर लोग स्नान करने यहां पहुंचते हैं। वहीं कांवड़ यात्रा के दौरान भी लाखों की संख्या में लोग यहां गंगा स्नान करने आते हैं। वैसे तो हरिद्वार के सभी गंगा घाट पवित्र और शुभ माने जाते हैं लेकिन हर की पौड़ी का महत्व काफी अलग है और इसका जिक्र पुराणों में भी है।

हिंदू धर्म मान्यता के अनुसार हर की पौड़ी का ब्रह्म कुंड घाट सबसे पवित्र जगह है। माना जाता है कि यहां गंगा स्नान करने के बाद गंगाजल घर जरूर लाना चाहिए। इससे मन को शांति मिलती है। यही वजह है कि लोग हरिद्वार जाकर ब्रह्म कुंड घाट से ही गंगाजल ले आते हैं। अब इसके पीछे क्या मान्यता है इसे जानते हैं।

समुद्र मंथन का कनेक्शन

पौराणिक कथा के अनुसार अनादि काल के दौरान ही देवताओं और राक्षसों के बीच समुद्र मंथन हुआ था। इस मंथन में वासुकी नाग का सिर राक्षसों की ओर था उसकी पूंछ देवताओं की तरफ थी। अब जब समुद्र मंथन हुआ तो उसमें से 14 बेशकीमती रत्न निकले। इसमें एक अमृत से भरा कलश भी था। माना जाता है कि जब देवता उस अमृत कलश को अपने साथ लेकर जा रहे थे तभी उसमें से कुछ बूंदें हरिद्वार के हर की पौड़ी के ब्रह्म कुंड घाट पर गिरी थी और इसी वजह से इस घाट को इतना पवित्र माना जाता है।

इन तिथियों पर होती है खूब भीड़

हिंदू धर्म मान्यता के अनुसार अमावस्या से लेकर किसी भी शुभ तिथि पर यहां पर स्नान करना शुभ होता है। माना जाता है कि हर शुभ दिन पर यहां का जल अमृत बन जाता है। मान्यता है कि सोमवती अमावस्या से लेकर मौनी अमावस्या, वैशाख अमावस्या, गंगा दशहरा और कार्तिक पूर्णिमा समेत कई विशेष दिनों पर यहां स्नान जरूर करना चाहिए। ऐसा कहा जाता है कि इस दौरान यहां पर स्नान करने से सारे पाप मिट जाते हैं और फिर मोक्ष की प्राप्ति होती है।

भगवान ब्रह्मा ने की तपस्या

एक मान्यता ऐसी भी है कि समुद्र मंथन से काफी पहले भगवान ब्रह्मा ने ब्रह्म कुंड में ही कई हजार साल तक कठिन तपस्या की थी। इसी वजह से इस जगह का नाम ब्रह्म कुंड पड़ा। बता दें कि इस कुंड का जिक्र तो स्कंद पुराण के अलावा कई अलग-अलग धार्मिक ग्रंथों में भी है। इसी वजह से हर साल श्रद्धालु हर की पौड़ी आकर ब्रह्म कुंड घाट से गंगाजल जरूर ले आते हैं। माना जाता है कि यहां से लाए गए गंगाजल को घर पर लाने से पॉजिटिव एनर्जी आती है।

डिस्क्लेमर- (इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए आसपास के जानकार की सलाह जरूर लें।)

Garima Singh

लेखक के बारे में

Garima Singh

शॉर्ट बायो: गरिमा सिंह एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव है। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में कार्यरत हैं। वह वास्तु, अंक शास्त्र, रत्न शास्त्र, फेंगशुई और राशिफल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं।

परिचय और अनुभव
गरिमा सिंह डिजिटल मीडिया में लंबे समय से सक्रिय हैं। इस समय वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने अपने करियर में न्यूज, फीचर और एक्सप्लेनर कंटेंट पर काम किया है। अब वह ज्योतिष से जुड़े विषयों को सरल और व्यावहारिक तरीके से पाठकों तक पहुंचाती हैं। उनके आर्टिकल की खास बात ये है कि वह जटिल ज्योतिषीय बातों को आसान भाषा में समझाने की पूरी कोशिश करती हैं ताकि जिसे एस्ट्रोलॉजी का ए भी नहीं पता है वह भी आसान तरीके से चीजों को समझ सके और उस पर अमल कर सके।

करियर
गरिमा ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत रेडियो चैनल रेड एफएम से की। यहां पर उन्होंने रेडियो से जुड़ी बारिकियों को समझने की कोशिश की और मॉर्निंग शो को प्रोड्यूस करने के साथ-साथ कॉपी राइटिंग का भी काम संभाला। साथ में कई विज्ञापनों में वॉइस ओवर भी दिया। इसके अलावा उन्होंने डीडी न्यूज, जी न्यूज जैसे मीडिया संस्थानों में डिजिटल और टीवी पत्रकारिता को करीब से जाना और समझा। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का यह अनुभव आज उनके डिजिटल राइटिंग और स्टोरीटेलिंग के तरीके को और भी प्रभावशाली बनाता है।

शैक्षणिक पृष्ठभूमि
गरिमा ने साइकोलॉजी, इकोनॉमिक्स और इंग्लिश विषयों में बैचलर ऑफ आर्ट्स (B.A.) की डिग्री प्राप्त की है। इसके बाद उन्होंने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन दिल्ली और जामिया मिलिया इस्लामिया से टीवी और रेडियो पत्रकारिता की पढ़ाई की है। इस दौरान उन्होंने इंटर्नशिप भी की। वह जामिया मिलिया इस्लामिया की गोल्ड मेडलिस्ट भी रह चुकी हैं।

एस्ट्रोलॉजी लेखन की सोच
गरिमा का मानना है कि ज्योतिष का उद्देश्य डर पैदा करना नहीं, बल्कि लोगों को सही दिशा और सकारात्मक सोच देना होना चाहिए। उनका फोकस होता है- सरल जानकारी, संतुलित सलाह, भरोसेमंद और उपयोगी कंटेंट। वह शिव पुराण और कई और शास्त्रों की जटिल कथाओं को अपने शब्दों में लिखकर पाठकों तक पहुंचाती हैं। गरिमा वास्तु शास्त्र और न्यूमरोलॉजी के अलावा फेंगशुई की किताबें पढ़ती रहती हैं और वहां की उपयोगी जानकारियों को पाठकों के साथ समय-समय पर साझा करती हैं।

व्यक्तिगत रुचियां
काम के अलावा गरिमा को गार्डनिंग, कुकिंग और टेबल टेनिस खेलना पसंद है। वह कानपुर से ताल्लुक रखती हैं और एक संतुलित जीवनशैली में विश्वास करती हैं।

विशेषज्ञता (Areas of Expertise)
वास्तु शास्त्र
अंक शास्त्र
रत्न शास्त्र
फेंगशुई
हस्तरेखा शास्त्र

और पढ़ें
जानें लेटेस्ट Dharm News, Aaj ka Rashifal और सटीक Panchang की जानकारी। अपनी डेली पूजा के लिए यहाँ पढ़ें Shiv Chalisa, Hanuman Chalisa और Bajrang Baanहिंदू कैलेंडर 2026 की शुभ तिथियों के साथ अपने हर दिन को खास बनाएं!