
Utpanna ekadashi :उत्पन्ना एकादशी कब है व्रत, पारण, जानें त्रिस्पृशा एकादशी किसे कहते हैं? इस दिन प्रकट हुई एकादशी माता
संक्षेप: Utpanna Ekadashi Vrat kab hai: उत्पन्ना एकादशी पर एकादशी माता प्रकट हुई थी, इसलिए इसे उत्पन्ना कहा जाता है। यह व्रत कब रखा जाएगा, इसके साथ ही यहां हम आपको बताएंगे त्रिस्पृशा एकादशी क्या है, इसके बारे में भी बताएंगे।
मार्गशीर्ष माह के कृष्णपक्ष की ग्यारस को भगवान विष्णु से एकादशी तिथि प्रकट यानी उत्पन्न हुई थीं। इस लिए इसे उत्पन्ना एकादशी कहते हैं। एकादशी ने समस्त देवगणों की मुj नामक राक्षस से रक्षा की थी, इसलिए श्रीविष्णु ने उन्हें वरदान दिया। भगवान विष्णु को एकादशी तिथि बहुत प्रिय है। ऐसा कहा जाता है कि जो एकादशी के दिन व्रत करता है, उसे श्री हरि की कृपा मिलती है। भगवान् श्रीकृष्ण कहते हैं कि युधिष्ठिर ! भगवान विष्णु से वर पाकर महात्रता एकादशी बहुत प्रसन्न हुई। पुराणों में लिखा है कि दोनों पक्षों की एकादशी समान रूप से कल्याण करने वाली है। इसमें शुक्ल और कृष्ण का भेद नहीं करना चाहिए। दोनों एकादशी एक समान हैं, और दोनों में व्रत करना चाहिए।

उत्पन्ना एकादशी तिथि कब और पारण कब होगा?
जो मानव हर समय एकादशीके माहात्म्यका पाठ करता है, उसे पुण्य फल प्राप्त होता है । एकादशीके समान पापनाशक व्रत दूसरा कोई नहीं है। इस साल एकादशी पर उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र और विष्कुंभ योग का संयोग बन रहा है। इस साल एकादशी तिथि15 नवम्बर 2025 को 12:49 आधी रात को एकादशी तिथि शुरू होगी और अगले दिन 16 नंवबर को रात को 02:37 ए एम बजे समाप्त होगी। इसका पारण 16 नवंबर को 01:10 पी एम से 03:18 पी एम पारण तिथि के दिन किया जाएगा। इस दिन हरि वासर 09:09 ए एम बजे तक है।
क्या है त्रिस्पृशा एकादशी
अगर उदयकाल में थोड़ी-सी एकादशी हो, मध्य में पूरी द्वादशी हो, और आखिर में थोड़ी त्रयोदशी हो तो वह त्रिस्पृशा एकादशी कहलाती है। त्रिस्पृशा एकादशी का बहुत अधिक फल बताया गया है। यह त्रिस्पृशा एकादशी भगवान को बहुत ही प्रिय है। अगर एक त्रिस्पृशा एकादशी को उपवास कर लिया जाए तो एक हजार एकादशी व्रतों का फल प्राप्त होता है और इसी प्रकार द्वादशी में पारण करने पर सहसत्रगुना फल माना गया है। ऐसा कहा जाता है कि जो मनुष्य एकादशीको उपवास करता है, वह वैकुण्ठधाम में जाता है।





