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उत्पन्ना एकादशी व्रत आज, इस विधि से करें पूजा, जानें पारण टाइम

उत्पन्ना एकादशी व्रत आज, इस विधि से करें पूजा, जानें पारण टाइम

संक्षेप:

हिंदू धर्म में उत्पन्ना एकादशी का बहुत अधिक महत्व है। यह वही तिथि मानी जाती है जब स्वयं देवी एकादशी का प्राकट्य हुआ था। हर साल यह व्रत मार्गशीर्ष महीने के कृष्ण पक्ष की एकादशी पर रखा जाता है। इसे सभी एकादशी व्रतों की पहली और मुख्य एकादशी कहा जाता है, क्योंकि इसी दिन एकादशी माता का जन्म हुआ था।

Nov 15, 2025 09:57 am ISTYogesh Joshi लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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हिंदू धर्म में उत्पन्ना एकादशी का बहुत अधिक महत्व है। यह वही तिथि मानी जाती है जब स्वयं देवी एकादशी का प्राकट्य हुआ था। हर साल यह व्रत मार्गशीर्ष महीने के कृष्ण पक्ष की एकादशी पर रखा जाता है। इसे सभी एकादशी व्रतों की पहली और मुख्य एकादशी कहा जाता है, क्योंकि इसी दिन एकादशी माता का जन्म हुआ था। इस वर्ष उत्पन्ना एकादशी का व्रत 15 नवंबर 2025 को रखा गया। पुराणों के अनुसार, जब भगवान विष्णु योगनिद्रा में थे, तब मुर नामक राक्षस ने उन पर आक्रमण कर दिया। उसी समय भगवान विष्णु के शरीर से एक दिव्य तेज निकला और एक स्त्री प्रकट हुईं। यही थीं देवी एकादशी। उन्होंने मुर का वध किया। भगवान विष्णु उनकी शक्ति से प्रसन्न हुए और उन्हें “एकादशी” नाम देकर यह वरदान दिया कि जो भी भक्त इस तिथि पर व्रत रखेगा उसके सभी पाप नष्ट होंगे और उसे मोक्ष की प्राप्ति होगी।

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एकादशी पूजा-विधि:

सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और पीले कपड़े पहनें।

हाथ में जल, फूल और अक्षत लेकर व्रत का संकल्प लें।

पूजा स्थान पर भगवान विष्णु की प्रतिमा स्थापित करें।

पंचामृत से स्नान कराएं।

चंदन, पीले वस्त्र, पीले पुष्प और तुलसी दल अर्पित करें।

एकादशी व्रत कथा पढ़ें या सुनें।

भगवान विष्णु और एकादशी माता की आरती करें।

गरीबों, ब्राह्मणों या जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र या धन का दान करें।

श्री हरि पूजन मंत्र- ॐ नमो भगवते वासुदेवाय॥

ये भी पढ़ें:एकादशी व्रत की शुरुआत कब से करें? जानें तिथि और विधि

उत्पन्ना एकादशी 2025 व्रत पारण का सही समय

उत्पन्ना एकादशी का पारण हमेशा द्वादशी तिथि पर सूर्योदय के बाद और हरी वासर समाप्त होने के बाद किया जाता है। हरी वासर 16 नवंबर 2025 को सुबह 9:09 बजे समाप्त होगा।

पारण का शुभ समय- 16 नवंबर 2025 को दोपहर 1:10 बजे से 3:18 बजे तक।

पारण विधि:

द्वादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र पहनें।

दीपक जलाएं, गंगाजल छिड़कें और विष्णु चालीसा या सहस्रनाम का पाठ करें।

भगवान को सात्त्विक भोग लगाएं।

पूजा के बाद तुलसी दल मुंह में रखें और निगल लें, चबाएं नहीं। इसके बाद सात्विक भोजन ग्रहण करें।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य है और सटीक है। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

Yogesh Joshi

लेखक के बारे में

Yogesh Joshi
योगेश जोशी हिंदुस्तान डिजिटल में सीनियर कंटेंट प्रड्यूसर हैं। उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के मेहला गांव के रहने वाले हैं। पिछले छह सालों से पत्रकरिता कर रहे हैं। एनआरएआई स्कूल ऑफ मास कम्युनिकेश से जर्नलिज्म में स्नातक किया और उसके बाद 'अमर उजाला डिजिटल' से अपने करियर की शुरुआत की, जहां धर्म और अध्यात्म सेक्शन में काम किया।लाइव हिंदुस्तान में ज्योतिष और धर्म- अध्यात्म से जुड़ी हुई खबरें कवर करते हैं। पिछले तीन सालों से हिंदुस्तान डिजिटल में कार्यरत हैं। अध्यात्म के साथ ही प्रकृति में गहरी रुचि है जिस कारण भारत के विभिन्न मंदिरों का भ्रमण करते रहते हैं। और पढ़ें
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