Hindi Newsधर्म न्यूज़Tulsi Puja vidhi: when tulsi ji went away from Lord Vishnu how did Shri Hari pacify her
Tulsi Puja vidhi: जब तुलसी जी भगवान विष्णु से दूर चली गईं, तो कैसे श्रीहरि ने उन्हें मनाया?

Tulsi Puja vidhi: जब तुलसी जी भगवान विष्णु से दूर चली गईं, तो कैसे श्रीहरि ने उन्हें मनाया?

संक्षेप:

तुलसी की पूजा हर घर में होती है। आपको बता दें कि तुलसी भगवान्‌ नारायण की प्रिया हैं, इसलिये परम पवित्र हैं। जब भगवान्‌ श्रीहरि ने तुलसी को अपना लिया तो तुलसीको पाकर उसके और लक्ष्मी के साथ आनन्द करने लगे।

Dec 25, 2025 09:34 am ISTAnuradha Pandey लाइव हिन्दुस्तान
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तुलसी की पूजा हर घर में होती है। आपको बता दें कि तुलसी भगवान्‌ नारायण की प्रिया हैं, इसलिये परम पवित्र हैं। जब भगवान्‌ श्रीहरि ने तुलसी को अपना लिया तो तुलसीको पाकर उसके और लक्ष्मी के साथ आनन्द करने लगे। उन्होंने तुलसी को भी गौरव और सौभाग्य में लक्ष्मी के समान बना दिया। लक्ष्मी ने तो तुलसी के भाग्य और गौरव को सह लिया, किंतु सरस्वती यह सब सहन न कर सकीं। सरस्वती के द्वारा अपना अपमान होने से तुलसी अन्तर्धान हो गईं। भगवान ने उसे न देखकर सरस्वती को समझाया और उससे आज्ञा लेकर वे तुलसीवनमें गये। तुलसी की की स्तुति की।

कैसे की तुलसी की पूजा

तुलसी के लिए घी का का दीपक जलाया , धूप, सिन्दूर, चन्दन, नैवेद्य और पुष्प आदि उपचारों से तथा स्तोत्र द्वारा पूजा की, इसके अलावा उनकी बीज मंत्रों से पूजा की और कहां कि जो भी मां तुलसी के बीज मंत्रों को अच्छे से सुनेगा और बोलेगा, वो सभी प्रकार की सिद्धियां पा लेगा। इस प्रकार तुलसी को प्रसन्नता हुई। अत: वह वृक्षसे तुरंत बाहर निकल आईं और परम प्रसन्न होकर भगवान्‌ श्री हरि के चरणकमलों की शरण में चली गईं। तब भगवान ने उसे वर दिया- हे देवी! तुम सर्वपूज्या हो जाओ। मैं स्वयं तुम्हें अपने मस्तक तथा वक्ष:स्थलपर धारण करूंगा। सम्पूर्ण देवता तुम्हें अपने मस्तक पर धारण करेंगे। ये कहकर उसे साथ ले भगवान् श्रीहरि अपने स्थान पर लौट गए।

ऐसा कहा जाता है कि जो मां तुलसी की भक्तिभाव से पूजा करता है, वह सम्पूर्ण पापोंसे मुक्त होकर भगवान्‌ विष्णुके लोक में चला जाता है। भगवान विष्णु की पूजा भी बिना तुलसी के अधूरी है। इसलिए खासतौर पर कार्तिक मास में भगवान्‌ विष्णु को तुलसीपत्र अर्पण करता है, वह दस हजार गोदानका फल निश्चितरूपसे पा जाता है। आपको बता दें कि गंगाजल और तुलसी कभी बासी नहीं माने जाते हैं। तुलसी जी के बिना श्रीहरि भोग स्वीकार नहीं करते हैं। तुलसी की माला पहनने वालों का भी कल्याण होता है।

Anuradha Pandey

लेखक के बारे में

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शार्ट बायो

अनुराधा पांडेय पिछले 16 सालों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में एस्ट्रोलॉजी और करियर टीम का नेतृत्व कर रही हैं।


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अनुराधा पांडे पत्रकारिता जगत का एक अनुभवी चेहरा हैं, जिन्हें मीडिया में 16 वर्षों का व्यापक अनुभव है। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में असिस्टेंट एडिटर के पद पर कार्यरत हैं और संस्थान के एस्ट्रोलॉजी और करियर सेक्शन की इंचार्ज हैं। अनुराधा पिछले 10 सालों से लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में लिख रही हैं। डिजिटल पत्रकारिता के दौर में उन्होंने धर्म जैसे महत्वपूर्ण विषय पर अपनी लेखनी से करोड़ों पाठकों का भरोसा जीता है। उनके पास खबरों को न केवल प्रस्तुत करने, बल्कि सरल जानकारी, संतुलित सलाह, भरोसेमंद और विश्लेषणात्मक कंटेंट देने का लंबा अनुभव है। वह शिव महापुराण, नारद पुराण, पद्म पुराण और कई अन्य शास्त्रों के जटिल तथ्यों को अपने शब्दों में लिखकर पाठकों तक पहुंचाती हैं।


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अनुराधा ने अपने करियर की शुरुआत साल 2010 में आज समाज अखबार से की। इसके बाद उन्होंने 'आज तक' (Aaj Tak) में एजुकेशन सेक्शन में तीन साल तक अपनी सेवाएं दीं। साल 2015 से वह लाइव हिन्दुस्तान से जुड़ी हैं और एस्ट्रोलॉजी सेक्शन का नेतृत्व कर रही हैं। उनका गहरा अनुभव उन्हें जटिल विषयों पर सरल और प्रभावी ढंग से लिखने में सक्षम बनाता है। उन्होंने देश के प्रतिष्ठित संस्थान भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया है। इसके साथ ही दिल्ली विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन, सीसीएसयू से एम.कॉम और कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन एवं मीडिया में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है।


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