Tulsi Puja Niyam: तुलसी के पास दीया जलाने का ये है सबसे सही टाइम, जानें सही दिशा से लेकर सारी जरूरी बातें
Tulsi Puja: हिंदू धर्म में तुलसी की पूजा करने का बड़ा महत्व है। हालांकि कई लोग पूजा से जुड़ी चीजों को लेकर काफी कन्फ्यूज होते हैं। नीचे जानें कि तुलसी के आगे दीया किस समय जलाना उचित माना जाता है?

सनातन धर्म में रोजाना पूजा पाठ करने की परंपरा बहुत पुरानी है और इसका बहुत महत्व होता है। ऐसा करने से ना सिर्फ मन शांत होता है बल्कि विपरीत परिस्थितियों में खुद को संभाल पाना भी आसान हो जाता है। माना जाता है कि नियमित रूप से भगवान की पूजा करने से घर में पॉजिटिव एनर्जी बनी रहती है। इसी तरह हिंदू धर्म में तुलसी के पौधे को भी बहुत पवित्र माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि तुलसी के पौधे में मां लक्ष्मी का वास होता है। माना जाता है कि नियमित रूप से तुलसी के पौधे की पूजा करना शुभ माना जाता है। अगर हर रोज तुलसी के आगे दीया जलाया जाए तो इससे घर में सुख-समृद्धि और खुशहाली का आगमन होता है। हालांकि कई बार लोग इस बात को लेकर कन्फ्यूजन में होते हैं कि आखिर तुलसी के आगे दीया जलाने का सबसे सही टाइम कौन सा है?
तुलसी के आगे कब जलाएं दीया?
तुलसी के आगे हमेशा शाम के समय ही दीया जलाना सही माना जाता है। हिंदू धर्म मान्यता के अनुसार इसके लिए गोधूलि बेला सबसे उत्तम होती है। गोधूलि बेला शाम के समय को ही कहा जाता है। आसान भाषा में समझा जाए तो सूर्यास्त के आसपास या फिर शाम में 5 से 6 बजे के बीच यहां पर दीया जला देना चाहिए। मान्यता है कि इस दौरान दीया जलाने से मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की कृपा हमेशा बरसती है।
दीए की दिशा
तुलसी के आगे दीया तो जला दीया लेकिन क्या दीए की दिशा सही है? इस ओर कई लोग ध्यान ही नहीं देते हैं। बता दें कि तुलसी के आगे दीया जलाते वक्त इसकी दिशा का ध्यान मुख्य रूप से रखना चाहिए। अगर दीए को पूजा के बाद गलत दिशा में रखकर जलाया जाए तो इसे काफी अशुभ माना जाता है। इस वजह से तुलसी के आगे हमेशा सही दिशा में दीए को रखना चाहिए। नियम के अनुसार उत्तर और पूर्व दिशा की ओर ही दीए को रखना सही माना जाता है।
तुलसी के आगे कितने दीए रखें?
ये भी एक सवाल है जिसे लेकर लोग कन्फ्यूज रहते हैं। तमाम लोग अपने मन से तुलसी के आगे दीया रख देते हैं बिना ये जाने कि इनकी संख्या कितनी होनी चाहिए। मान्यता के हिसाब से तुलसी के आगे हमेशा 3 या फिर 5 दीए जलाने चाहिए। इस बात का ध्यान रखें कि दीए हमेशा विषम संख्या में ही हो। अगर एक साथ इतने दीए नहीं जलाना चाहते हैं तो चौमुखी दीया भी जलाया जा सकता है। अगर आप अपनी आर्थिक स्थिति को स्टेबल रखना चाहते हैं तो तुलसी के आगे चौमुखी दीया जरूर जलाना चाहिए।
दीए में तेल या घी?
तुलसी के आगे जलाए जाने वाले दीए में तेल डाला जाए या फिर घी? ये सवाल लगभग हर किसी के मन में आया होगा। पूजा के नियम के हिसाब से तुलसी के पास रखे हुए दीए में हमेशा घी होना चाहिए। घी का दीया यहां पर जलाना सबसे शुभ माना जाता है। ऐसे में तुलसी की पूजा करते वक्त इन बातों का विशेष रूप से ध्यान देना चाहिए।
डिस्क्लेमर- (इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।)
लेखक के बारे में
Garima Singhशॉर्ट बायो
गरिमा सिंह एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव है। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में कार्यरत हैं। वह वास्तु, न्यूमरोलॉजी, फेंगशुई और राशिफल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं।
परिचय और अनुभव
गरिमा सिंह डिजिटल मीडिया में लंबे समय से सक्रिय हैं। वह पिछले 8 महीनों से लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने अपने करियर में न्यूज, फीचर और एक्सप्लेनर कंटेंट पर काम किया है। अब वह ज्योतिष से जुड़े विषयों को सरल और व्यावहारिक तरीके से पाठकों तक पहुंचाती हैं। उनके आर्टिकल की खास बात ये है कि वह जटिल ज्योतिषीय बातों को आसान भाषा में समझाने की पूरी कोशिश करती हैं ताकि जिसे एस्ट्रोलॉजी का ए भी नहीं पता है वह भी आसान तरीके से चीजों को समझ सके और उस पर अमल कर सके।
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गरिमा ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत रेडियो चैनल रेड एफएम से की। यहां पर उन्होंने रेडियो से जुड़ी बारिकियों को समझने की कोशिश की और मॉर्निंग शो को प्रोड्यूस करने के साथ-साथ कॉपी राइटिंग का भी काम संभाला। साथ में कई विज्ञापनों में वॉइस ओवर भी दिया। इसके अलावा उन्होंने डीडी न्यूज, जी न्यूज जैसे मीडिया संस्थानों में डिजिटल और टीवी पत्रकारिता को करीब से जाना और समझा। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का यह अनुभव आज उनके डिजिटल राइटिंग और स्टोरीटेलिंग के तरीके को और भी प्रभावशाली बनाता है।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
गरिमा ने साइकोलॉजी, इकोनॉमिक्स और इंग्लिश विषयों में बैचलर ऑफ आर्ट्स (B.A.) की डिग्री प्राप्त की है। इसके बाद उन्होंने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन दिल्ली और जामिया मिलिया इस्लामिया से टीवी और रेडियो पत्रकारिता की पढ़ाई की है। इस दौरान उन्होंने इंटर्नशिप भी की। वह जामिया मिलिया इस्लामिया की गोल्ड मेडलिस्ट भी रह चुकी हैं।
एस्ट्रोलॉजी लेखन की सोच
गरिमा का मानना है कि ज्योतिष का उद्देश्य डर पैदा करना नहीं, बल्कि लोगों को सही दिशा और सकारात्मक सोच देना होना चाहिए। उनका फोकस होता है- सरल जानकारी, संतुलित सलाह, भरोसेमंद और उपयोगी कंटेंट। वह शिव पुराण और कई और शास्त्रों की जटिल कथाओं को अपने शब्दों में लिखकर पाठकों तक पहुंचाती हैं। गरिमा वास्तु शास्त्र और न्यूमरोलॉजी के अलावा फेंगशुई की किताबें पढ़ती रहती हैं और वहां की उपयोगी जानकारियों को पाठकों के साथ समय-समय पर साझा करती हैं।
व्यक्तिगत रुचियां
काम के अलावा गरिमा को गार्डनिंग, कुकिंग और टेबल टेनिस खेलना पसंद है। वह कानपुर से ताल्लुक रखती हैं और एक संतुलित जीवनशैली में विश्वास करती हैं।
विशेषज्ञता
वास्तु शास्त्र, न्यूमरोलॉजी, फेंगशुई, डेली और वीकली राशिफल
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