तुलसी की माला किस दिन धारण करें? जानिए पहनने के नियम और फायदे

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Tulsi Mala Niyam: हिंदू धर्म में तुलसी के पौधे को बेहद पवित्र और पूजनीय माना गया है। इसे विष्णु प्रिया कहा जाता है, इसलिए भगवान विष्णु की पूजा तुलसी के बिना अधूरी मानी जाती है।

तुलसी की माला किस दिन धारण करें? जानिए पहनने के नियम और फायदे

हिंदू धर्म में तुलसी के पौधे को बेहद पवित्र और पूजनीय माना गया है। इसे विष्णु प्रिया कहा जाता है, इसलिए भगवान विष्णु की पूजा तुलसी के बिना अधूरी मानी जाती है। मान्यता है कि तुलसी में मां लक्ष्मी का वास होता है और जिस घर में यह पौधा होता है, वहां सकारात्मक ऊर्जा और देवी-देवताओं का आशीर्वाद बना रहता है। ठीक इसी तरह तुलसी की कंठी माला भी अत्यंत शुभ मानी जाती है। कहा जाता है कि इसे धारण करने से व्यक्ति को नकारात्मक ऊर्जा और दोषों से रक्षा मिलती है। हालांकि, इसे पहनने के कुछ विशेष नियम बताए गए हैं, जिनका पालन करना जरूरी माना जाता है। आइए जानते हैं इन नियमों के बारे में।

तुलसी की माला पहनने के नियम

मथुरा-वृंदावन के प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज के मुताबिक तुलसी की माला हर कोई धारण कर सकता है। लेकिन इसे धारण करने के बाद मांस मदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए। इसे धारण करने के बाद हमेशा प्रभु का नाम जपते रहना चाहिए। इस बात का ध्यान रखें कि यदि आपने तुलसी की माला धारण की है, तो भूलकर भी अशब्द या गंदी बातें ना बोलें। इतना ही नहीं तुलसी की माना कभी भी मरण सूतक के अंतराल में धारण नहीं करना चाहिए। आप मरण सूतक के 13वें दिन स्नानादि करके तुलसी की माला धारण कर सकते हैं। इसके अलावा अपनी पहनी हुई तुलसी की माला रोज पूजा करें और नियमित धारण करें। किसी भी स्थिति में उसे ना उतारें।

इन बातों का रखें ध्यान

- भगवान राम, भगवान कृष्ण और भगवान विष्णु की कृपा ​पाने के तुलसी की माला से जप करना विशेष फलदायी माना गया है।
- तुलसी की माला को धारण करने से पहले देख लें कि वह खंडित न हो।
- यदि संभव हो तो तुलसी माला को किसी योग्य संत से पूजन करवाने के बाद प्रसाद स्वरूप धारण करना चाहिए।
- तुलसी की माला को यदि किसी कारणवश उतारना पड़े तो उसे गंगाजल से धोकर धारण करना चाहिए।
- यदि आप तुलसी की माला को गले की बजाय हाथ में धारण करना चाहते हैं तो उसे अपने दाएं हाथ में ही धारण करें।

किस दिन पहनें तुलसी की माला

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार तुलसी की माला धारण करने के लिए गुरुवार का दिन विशेष रूप से शुभ माना जाता है। इसके अलावा एकादशी, पूर्णिमा या किसी अन्य शुभ तिथि पर भी इसे पहना जा सकता है। यदि आप पहली बार तुलसी माला धारण कर रहे हैं, तो सुबह के समय पूजा स्थान या मंदिर में बैठकर भगवान का स्मरण करते हुए इसे पहनना उत्तम माना जाता है। ऐसा करने से मन में सकारात्मक ऊर्जा और शांति का संचार होता है।

पहनने की विधि

तुलसी की मालाना पहनने के लिए सबसे पहले शुद्धता की जरुरत होती है। तुलसी माला हमेशा साफ शरीर से पहननी चाहिए। सुबह स्नान करने के बाद माला धारण करना सबसे अच्छा माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि इससे मन और तन दोनों पवित्र रहते हैं।

तुलसी की माला पहनने के फायदे

- तुलसी की माला धारण करने से धार्मिक, आध्यात्मिक और स्वास्थ्य संबंधी कई लाभ मिलते हैं।
- तुलसी का पौधा भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय माना जाता है।
- इसे पहनने से भगवान विष्णु की कृपा और आशीर्वाद प्राप्त होता है।
- तुलसी माला धारण करने से व्यक्ति के भीतर ईश्वर के प्रति भक्ति भाव बढ़ता है।
- यह मन को शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करती है।
- मान्यता है कि इसके प्रभाव से व्यक्ति जीवन में सुखों का आनंद प्राप्त करता है।
- अंततः पुण्य फल के प्रभाव से वैकुंठ धाम की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।

डिस्क्लेमरः इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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धीरज पाल एक डिटिजल पत्रकार है, जिन्हें इस क्षेत्र में 7 से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वो भारत की प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान लाइव हिंदुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन का हिस्सा हैं। यहां वह ग्रह गोचर, वास्तु शास्त्र, न्यूमरोलॉजी, रत्न शास्त्र से जुड़ी खबरें लिखते हैं।

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धीरज पाल डिजिटल मीडिया में उभरता एक ऐसा नाम है, जो पाठक को धर्म से जुड़ी खबरों को प्रमाणिक तौर पर और आमबोल चाल की भाषा परोसते हैं। वो ग्रह नक्षत्रों, वास्तु शास्त्र, अंक ज्योतिष,रत्न शास्त्र जैसे विषयों पर लेख लिखकर पाठक को उसकी अहमियत के बारे में बताते हैं। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़े हैं और पिछले 4 सालों से काम कर रहे हैं। अपने करियर के दौरान धीरज ने समाचार, फीचर, और एक्सप्लेनर कंटेंट में काम करते हुए अब ज्योतिषीय विषयों को डिजिटल पाठकों तक पहुंचाने में विशेष पहचान बनाई है।

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धीरज ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए इन मीडिया स्टडीज और राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज से जनसंचार एवं पत्रकारिता से परास्नातक की पढ़ाई की। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान संस्थानों से विषयों को तत्थात्मक और प्रभावी तरीके से समझने का सलीका सीखा। यहीं से उन्हें पत्रकारिता की सीढ़ी मिली।

धीरज पाल ने अपने पत्रकारिता कर की शुरुआत एपीएन न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने लोकमत न्यूज हिंदी और एनडीटीवी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। इसके बाद वो लाइव हिंदुस्तान की एस्ट्रोलॉजी टीम का हिस्सा बने। अब इनका एकमात्र उद्देश्य ज्योतिषीय जानकारी को रुचिगत, सरल, प्रमाणिक रूप में प्रस्तुत करना है।

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उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के निवासी धीरज पाल को पत्रकारिता और ज्योतिषीय अध्ययन के साथ-साथ घूमने, किताबें पढ़ने और क्रिकेट खेलने का शौक है।

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