कहीं आप भी तो नहीं कर रहे तुलसी तोड़ते समय ये गलतियां? जानें सही विधि और मंत्र

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जानिए तुलसी तोड़ने की सही विधि, पवित्र मंत्र और उन दिनों के बारे में जब तुलसी पत्र तोड़ना शास्त्रों में वर्जित है। सही नियमों से पाएं पूजा का पूर्ण फल।

Tulsi Todne Ke Niyam
तुलसी तोड़ने के नियम

हिंदू धर्म में तुलसी के पौधे को अत्यंत पवित्र माना जाता है। भगवान की पूजा में तुलसी दल का विशेष महत्व है। कई लोग रोज पूजा के लिए तुलसी तोड़ते हैं, लेकिन सही विधि और नियमों की जानकारी नहीं रखते हैं। गलत तरीके से तुलसी दल तोड़ने से पुण्य कम हो सकता है। सनातन धर्म में तुलसी तोड़ना भी पूजा का ही अंग माना जाता है, इसलिए इसे श्रद्धा और सही नियमों के साथ करना चाहिए।

तुलसी का धार्मिक महत्व

पद्मपुराण के सृष्टिखंड में तुलसी की महिमा बताई गई है। एक श्लोक में कहा गया है -

तुलसीं ये विचिन्वन्ति धन्यास्ते करपल्लवाः।

अर्थात जो हाथ भगवान की पूजा के लिए तुलसी चुनते हैं वे धन्य हैं। स्कंद और पद्मपुराण में भी तुलसी तोड़ने वाले हाथों की प्रशंसा की गई है। तुलसी के बिना भगवान की पूजा अधूरी मानी जाती है। यह पौधा पवित्रता और शुभता का प्रतीक है, इसलिए इसे सम्मान के साथ व्यवहार में लाना चाहिए।

तुलसी तोड़ने की सही विधि

पूजा के लिए तुलसी दल का चयन करते समय एक-एक पत्ता ना तोड़ें। पत्तियों के साथ अग्रभाग यानी मुलायम डंठल सहित तोड़ना चाहिए। तुलसी की मंजरी सबसे श्रेष्ठ मानी जाती है। मंजरी तोड़ते समय उसमें पत्तियां जरूर रहनी चाहिए। पौधे को हिलाए बिना और पुण्य भाव से अग्रभाग को तोड़ें। इस तरीके से तोड़ने पर पूजा का फल लाख गुना बढ़ जाता है। जल्दबाजी या लापरवाही से तुलसी दल तोड़ने से बचें। शुद्ध मन से किया गया चयन ही फलदायी होता है।

तुलसी दल तोड़ने का मंत्र

तुलसी तोड़ते समय यह मंत्र जरूर पढ़ें -

तुलस्यमृतजन्मासि सदा त्वं केशवप्रिया।

चिनोमि केशवस्यार्थे वरदा भव शोभने ॥

त्वदङ्गसम्भवैः पत्रैः पूजयामि यथा हरिम्।

तथा कुरु पवित्राङ्गि कलौ मलविनाशिनि॥

इसका अर्थ है हे तुलसी तुम अमृत से उत्पन्न हुई हो और केशव को सदैव प्रिय हो। मैं तुम्हें भगवान के लिए तोड़ रहा हूं। हे तेजस्विनी वरदान दो। तुम्हारे पत्तों से हरि की पूजा करता हूं। हे पवित्र अंगों वाली कलियुग के मल को नष्ट करने वाली इस पूजा को सफल बनाओ। मंत्र के साथ तुलसी दल तोड़ने से श्रद्धा बढ़ती है।

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इन दिनों में तुलसी ना तोड़ें

कुछ विशेष दिनों और समयों में तुलसी तोड़ने से बचना चाहिए। वैधृति और व्यतीपात योग में, मंगलवार, शुक्रवार और रविवार को, द्वादशी, अमावस्या और पूर्णिमा पर, संक्रांति के दिन और संध्या काल में तुलसी ना तोड़ें। जन्म या मृत्यु के सूतक में भी परहेज रखें। निषिद्ध समय में खुद से गिरी पत्तियों से पूजा कर सकते हैं या एक दिन पहले तोड़कर पवित्र स्थान पर रख सकते हैं।

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अन्य जरूरी सावधानियां

बिना नहाए तुलसी के पत्ते कभी ना तोड़ें। जूते पहनकर पौधे के पास ना जाएं। तुलसी के आसपास स्वच्छता बनाए रखें। तोड़ने के बाद बचे हुए हिस्से को सम्मान के साथ व्यवहार करें। नियमित रूप से सही विधि अपनाने से पूजा का फल बढ़ता है और मन में पवित्रता का भाव बना रहता है।

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तुलसी तोड़ते समय गलतियों से बचें। सही विधि और मंत्र अपनाकर पूजा करें, तो भगवान की विशेष कृपा प्राप्त होती है। श्रद्धा और नियमों का पालन भक्ति भाव को मजबूत बनाता है और पूजा का पूरा फल प्रदान कराता है।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

Navaneet Rathaur

लेखक के बारे में

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संक्षिप्त विवरण

नवनीत राठौर नए युग के डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें इस क्षेत्र में करीब 7 साल का अनुभव है। वर्तमान में वो भारत की प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान लाइव हिंदुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन के हिस्सा हैं। यहां वह अंक ज्योतिष, हस्तरेखा विज्ञान, वास्तु शास्त्र, वैदिक ज्योतिष से जुड़ी खबरें लिखते हैं।


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डिजिटल मीडिया में अपनी अलग पहचान बना रहे नवनीत राठौर धर्म से जुड़ी खबरों को प्रमाणिक तौर पर और आमबोल चाल की भाषा में पाठकों के लिए परोसते हैं। वो अंक ज्योतिष, हस्तरेखा विज्ञान, वास्तु शास्त्र, वैदिक ज्योतिष जैसे विषयों पर लेख लिखकर पाठक को उसकी अहमियत के बारे में बताते हैं। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़े हैं और करीब 5 सालों से काम कर रहे हैं। अपने करियर के दौरान नवनीत ने वेबस्टोरी, फीचर, और एक्सप्लेनर कंटेंट में काम करते हुए अब ज्योतिषीय विषयों को डिजिटल पाठकों तक पहुंचाने में विशेष पहचान बनाई है।


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नवनीत ने शारदा विश्वविद्यालय, ग्रेटर नोएडा से जनसंचार एवं पत्रकारिता में स्नातक और शुभारती विश्वविद्यालय से परास्नातक की पढ़ाई की। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान संस्थानों से विषयों को तत्थात्मक और प्रभावी तरीके से समझने का सलीका सीखा। यहीं से उन्हें पत्रकारिता की सीढ़ी मिली।


नवनीत राठौर ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत जनतंत्र न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने सूर्या समाचार और अमर उजाला जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। इसके बाद नवनीत लाइव हिंदुस्तान की एस्ट्रोलॉजी टीम का हिस्सा बने। पाठकों को सरल, विश्वसनीय और प्रेरणादायक जानकारी प्रदान करना ही नवनीत राठौर का मुख्य उद्देश्य है।


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