
Tulsi ji ki aarti: कार्तिक मास में करें तुलसी जी की आरती, तुलसा महारानी नमो-नमो
संक्षेप: Tulsi Ji Ki Aarti hindi:कार्तिक मास के दौरान घर में तुलसी लगाने और इसकी सेवा करने से शुभ फल मिलते हैं। कार्तिक मास में पूजा के दौरान तुलसी के पास दीपक जलाना, जल अर्पित करना चाहिए। वामन पुराण में लिखा है कि जो श्री हरि कोमल तुलसीदल अर्पित करता है, वह तीन पीढ़ियों के साथ ब्रह्मलोकमें जाता है।
कार्तिक के महीने में तुलसी की पूजा बहुत खास मानी गई है। कार्तिक मास के दौरान घर में तुलसी लगाने और इसकी सेवा करने से शुभ फल मिलते हैं। तुलसी पूजन से न केवल पापों का नाश होता है, बल्कि परिवार में सौभाग्य और समृद्धि भी बढ़ती है। कार्तिक मास में पूजा के दौरान तुलसी के पास दीपक जलाना, जल अर्पित करना चाहिए। वामन पुराण में लिखा है कि जो श्री हरि कोमल तुलसीदल अर्पित करता है, वह तीन पीढ़ियों के साथ ब्रह्मलोकमें जाता है। जो तुलसी को सुरक्षित रखने के लिए या चहारदीवारी बनवाता है, वह भी 21 पीढ़ियों के साथ भगवान् विष्णु के धाम में आनन्द का अनुभव करता है। नरेश्वर! जो तुलसी के कोमल दलों से भगवान् विष्णु के चरण कमलों की पूजा करता है, वह विष्णुलोक को प्राप्त होता है। तुलसी माता की आरती सुबह शाम करना बहुत उत्तम रहता है। यहां पढ़ें तुलसी जी की आरती

तुलसी जी की आरती
तुलसी महारानी नमो-नमो, हरि की पटरानी नमो-नमो । धन तुलसी पूरण तप कीनो, शालिग्राम बनी पटरानी ।
जाके पत्र मंजरी कोमल, श्रीपति कमल चरण लपटानी ॥ धूप-दीप-नवैद्य आरती, पुष्पन की वर्षा बरसानी ।
छप्पन भोग छत्तीसों व्यंजन, बिन तुलसी हरि एक ना मानी ॥ सभी सखी मैया तेरो यश गावें, भक्तिदान दीजै महारानी ।
नमो-नमो तुलसी महारानी, तुलसी महारानी नमो-नमो ॥ तुलसी महारानी नमो-नमो, हरि की पटरानी नमो-नमो ।
.जय जय तुलसी माता, मैया जय तुलसी माता । सब जग की सुख दाता, सबकी वर माता ॥ जय तुलसी माता...॥
सब योगों से ऊपर, सब रोगों से ऊपर । रज से रक्ष करके, सबकी भव त्राता ॥ ॥ जय तुलसी माता...॥
बटु पुत्री है श्यामा, सूर बल्ली है ग्राम्या । विष्णुप्रिय जो नर तुमको सेवे, सो नर तर जाता ॥ ॥ जय तुलसी माता...॥
हरि के शीश विराजत, त्रिभुवन से हो वंदित । पतित जनों की तारिणी, तुम हो विख्याता ॥ ॥ जय तुलसी माता...॥
लेकर जन्म विजन में, आई दिव्य भवन में । मानव लोक तुम्हीं से, सुख-संपति पाता ॥ ॥ जय तुलसी माता...॥
हरि को तुम अति प्यारी, श्याम वर्ण सुकुमारी । प्रेम अजब है उनका, तुमसे कैसा नाता ॥ हमारी विपद हरो तुम, कृपा करो माता ॥ ॥ जय तुलसी माता...॥
जय जय तुलसी माता, मैया जय तुलसी माता । सब जग की सुख दाता, सबकी वर माता ॥





