त्रिशूल वाली अंगूठी देती है खूब फायदे, जानें पहनने का सही तरीका और दिन
वास्तु और ज्योतिष शास्त्र की मान्यता है कि त्रिशूल की शेप वाली अंगूठी अगर सही तरीके और नियम से पहनी जाए तो ये और भी असरदार हो सकती है। जानें इसे धारण करने के फायदे और इससे जुड़े नियम।

आजकल मार्केट में त्रिशूल के डिजाइन वाली अंगूठी का खूब चलन है। तमाम लोग इसे फैशन स्टेटमेंट के रूप में देखते हैं हालांकि ज्योतिष और वास्तु शास्त्र में इसे सिर्फ ज्वेलरी के रूप में नहीं देखा जाता है। माना जाता है कि अगर सच्ची श्रद्धा और सही तरीके से इस अंगूठी को धारण किया जाए तो ये जिंदगी में पॉजिटिव बदलाव ला सकता है। हालांकि ये काफी हद तक व्यक्ति की आस्था और मान्यता पर निर्भर करता है लेकिन शास्त्र के हिसाब से इसके क्या मायने हैं और इसके पहनने के क्या-क्या फायदे हैं और इसे पहनने का सही तरीका क्या है? नीचे जानें त्रिशूल वाली अंगूठी से जुड़ी सारी डिटेल्स।
त्रिशूल की अंगूठी को धारण करने का फायदा
1. त्रिशूल को बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। ऐसे में इसे लोग सुरक्षा और पॉजिटिव एनर्जी के लिए धारण करना करते हैं। वास्तु और ज्योतिषीय मान्यता है कि इससे मन में पनप रहा बेवजह का डर कम होता है। वहीं इसे धारण करने के बाद एक अलग सी हिम्मत महसूस हो सकती है। ऐसा भी माना जाता है कि जिन लोगों को मन में बार-बार गलत ख्याल आते हैं उनके लिए भी ये अंगूठी पहनना शुभ होगा।
2. त्रिशूल वाली अंगूठी को लेकर एक मान्यता ये भी है कि ये कॉन्फिडेंस बूस्ट अप करती है। ऐसा कई बार होता है ना कि लोग मंजिल तक पहुंचने के लिए मेहनत तो बहुत करते हैं लेकिन उनमें कॉन्फिडेंस उतना नहीं होता है। ऐसे में त्रिशूल के शेप वाली अंगूठी मन को शांत रख सकती है। जिन लोगों को तनाव महूसस होता है या फिर मन में घबराहट होती है तो उनके लिए ये अंगूठी फायदेमंद साबित हो सकती है।
इस उंगली में पहनें त्रिशूल वाली अंगूठी
वास्तुशास्त्र के नियम के हिसाब से त्रिशूल वाली अंगूठी को हमेशा दाहिए हाथ की उंगली में धारण करना चाहिए। अगर इसे तर्जनी उंगली में पहना जाएगा तो इससे फैसले लेने की क्षमता में मजबूती आएगी। साथ ही कॉन्फिडेंस बढ़ेगा लीडरशिपल क्वालिटी में भी निखार आएगा। वहीं इसे अनामिका उंगली में भी पहना जा सकता है। मान्यता है कि इस उंगली में पहनने से मान-सम्मान में वृद्धि होती है।
पहनते वक्त ध्यान में रखें ये बातें
1. जब भी त्रिशूल वाली अंगूठी पहनें तो ध्यान रखें कि इसकी नोक बाहर की ओर हो। इसे हथेली की साइड करना सही नहीं माना जाता है।
2. इस अंगूठी को सोमवार के दिन पहनना शुभ माना जाता है। सुबह स्नान करने के बाद गंगाजल और कच्चे दूध से साफ करके इसे धारण किया जा सकता है।
3. धारण करते हुए ॐ नमः शिवाय मंत्र का जाप करें। मंत्र जाप के बाद अंगूठी पहनना शुभ माना जाता है।
4. त्रिशूल वाली अंगूठी चांदी या फिर तांबे में बनवानी शुभ मानी जाती है।
डिस्क्लेमर- इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।
लेखक के बारे में
Garima Singhशॉर्ट बायो:
गरिमा सिंह एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव है। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में कार्यरत हैं। वह वास्तु, अंक शास्त्र, रत्न शास्त्र, फेंगशुई और राशिफल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं।
परिचय और अनुभव
गरिमा सिंह डिजिटल मीडिया में लंबे समय से सक्रिय हैं। इस समय वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने अपने करियर में न्यूज, फीचर और एक्सप्लेनर कंटेंट पर काम किया है। अब वह ज्योतिष से जुड़े विषयों को सरल और व्यावहारिक तरीके से पाठकों तक पहुंचाती हैं। उनके आर्टिकल की खास बात ये है कि वह जटिल ज्योतिषीय बातों को आसान भाषा में समझाने की पूरी कोशिश करती हैं ताकि जिसे एस्ट्रोलॉजी का ए भी नहीं पता है वह भी आसान तरीके से चीजों को समझ सके और उस पर अमल कर सके।
करियर
गरिमा ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत रेडियो चैनल रेड एफएम से की। यहां पर उन्होंने रेडियो से जुड़ी बारिकियों को समझने की कोशिश की और मॉर्निंग शो को प्रोड्यूस करने के साथ-साथ कॉपी राइटिंग का भी काम संभाला। साथ में कई विज्ञापनों में वॉइस ओवर भी दिया। इसके अलावा उन्होंने डीडी न्यूज, जी न्यूज जैसे मीडिया संस्थानों में डिजिटल और टीवी पत्रकारिता को करीब से जाना और समझा। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का यह अनुभव आज उनके डिजिटल राइटिंग और स्टोरीटेलिंग के तरीके को और भी प्रभावशाली बनाता है।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
गरिमा ने साइकोलॉजी, इकोनॉमिक्स और इंग्लिश विषयों में बैचलर ऑफ आर्ट्स (B.A.) की डिग्री प्राप्त की है। इसके बाद उन्होंने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन दिल्ली और जामिया मिलिया इस्लामिया से टीवी और रेडियो पत्रकारिता की पढ़ाई की है। इस दौरान उन्होंने इंटर्नशिप भी की। वह जामिया मिलिया इस्लामिया की गोल्ड मेडलिस्ट भी रह चुकी हैं।
एस्ट्रोलॉजी लेखन की सोच
गरिमा का मानना है कि ज्योतिष का उद्देश्य डर पैदा करना नहीं, बल्कि लोगों को सही दिशा और सकारात्मक सोच देना होना चाहिए। उनका फोकस होता है- सरल जानकारी, संतुलित सलाह, भरोसेमंद और उपयोगी कंटेंट। वह शिव पुराण और कई और शास्त्रों की जटिल कथाओं को अपने शब्दों में लिखकर पाठकों तक पहुंचाती हैं। गरिमा वास्तु शास्त्र और न्यूमरोलॉजी के अलावा फेंगशुई की किताबें पढ़ती रहती हैं और वहां की उपयोगी जानकारियों को पाठकों के साथ समय-समय पर साझा करती हैं।
व्यक्तिगत रुचियां
काम के अलावा गरिमा को गार्डनिंग, कुकिंग और टेबल टेनिस खेलना पसंद है। वह कानपुर से ताल्लुक रखती हैं और एक संतुलित जीवनशैली में विश्वास करती हैं।
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