त्र्यंबकेश्वर मंदिर नासिक में पितृ दोष और काल सर्प के लिए होती है विशेष पूजा, शास्त्रों में है उल्लेख

Feb 19, 2026 11:49 am ISTNavaneet Rathaur लाइव हिन्दुस्तान
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त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां पितृ दोष, काल सर्प दोष, नाग दोष और अकाल मृत्यु से जुड़े दोषों का निवारण करने वाली विशेष पूजा होती है।

त्र्यंबकेश्वर मंदिर नासिक में पितृ दोष और काल सर्प के लिए होती है विशेष पूजा, शास्त्रों में है उल्लेख

त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर महाराष्ट्र के नासिक जिले में गोदावरी नदी के तट पर स्थित है। यह 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है और भगवान शिव के त्रिनेत्र स्वरूप का प्रतीक माना जाता है। लेकिन इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां पितृ दोष, काल सर्प दोष, नाग दोष और अकाल मृत्यु से जुड़े दोषों का निवारण करने वाली विशेष पूजा होती है। गरुड़ पुराण, स्कंद पुराण और शिव पुराण में त्र्यंबकेश्वर को पितृ दोष निवारण का प्रमुख तीर्थ बताया गया है। आइए जानते हैं इसकी महिमा और पूजा विधि।

त्र्यंबकेश्वर मंदिर का पौराणिक महत्व

त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग की कथा के अनुसार, यहां भगवान शिव ने गौतम ऋषि को पितृ दोष से मुक्ति दिलाई थी। गौतम ऋषि की पत्नी अहिल्या पर गौ हत्या का दोष लगने से पितृ दोष उत्पन्न हुआ था। भगवान शिव ने यहां प्रकट होकर उन्हें मुक्ति दी। इसी कारण त्र्यंबकेश्वर को पितृ दोष निवारण का प्रमुख स्थान माना जाता है। गरुड़ पुराण में स्पष्ट उल्लेख है कि यहां त्रिपिंडी श्राद्ध, नारायण बली और काल सर्प पूजा करने से पितरों को शांति मिलती है और वंशजों पर दोष का प्रभाव समाप्त हो जाता है।

पितृ दोष निवारण की विशेष पूजा

पितृ दोष तब होता है, जब किसी की अकाल मृत्यु हो या श्राद्ध-तर्पण ठीक से ना हुआ हो। त्र्यंबकेश्वर में पितृ दोष निवारण के लिए त्रिपिंडी श्राद्ध किया जाता है। यह पूजा तीन पीढ़ियों के पितरों के लिए होती है। यहां गोदावरी नदी में स्नान के बाद पिंडदान और तर्पण किया जाता है। मान्यता है कि यहां एक बार पितृ तर्पण करने से काशी में 100 बार तर्पण के बराबर पुण्य मिलता है। पितृ पक्ष में यहां लाखों श्रद्धालु आते हैं।

काल सर्प दोष पूजा

काल सर्प दोष तब होता है, जब कुंडली में सभी ग्रह राहु-केतु के बीच फंस जाते हैं। इससे जीवन में बाधाएं, आर्थिक हानि, संतान प्राप्ति में रुकावट और मानसिक तनाव आता है। त्र्यंबकेश्वर में काल सर्प दोष निवारण के लिए विशेष पूजा होती है। नाग पूजा, नाग बली और काल सर्प पूजा यहां बहुत प्रभावी मानी जाती है। पूजा में नाग देवता को दूध, शहद, चावल और फूल चढ़ाए जाते हैं। नाग बली पूजा करने से काल सर्प दोष दूर होता है और जीवन में सुख-शांति आती है।

पूजा विधि और सावधानियां

त्र्यंबकेश्वर में पूजा के लिए पहले गोदावरी में स्नान करें। फिर मंदिर में शिवलिंग के दर्शन करें। पंडित से त्रिपिंडी श्राद्ध या काल सर्प पूजा करवाएं। पूजा में काले तिल, जौ, कुश, पिंड और जल का उपयोग होता है। 'ॐ नमः शिवाय' और 'ॐ त्र्यंबकं यजामहे' मंत्र का जाप करें। पूजा के बाद गरीबों को दान दें। सावधानी: पूजा के दौरान मन में सच्ची श्रद्धा रखें और किसी भी प्रकार की नकारात्मक सोच से बचें।

त्र्यंबकेश्वर मंदिर पितृ दोष और काल सर्प दोष निवारण का प्रमुख केंद्र है। यहां पूजा करने से परिवार की कई पीढ़ियों पर अशुभ प्रभाव समाप्त हो जाता है। गरुड़ पुराण में इसका विशेष उल्लेख है।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

Navaneet Rathaur

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नवनीत ने शारदा विश्वविद्यालय, ग्रेटर नोएडा से जनसंचार एवं पत्रकारिता में स्नातक और शुभारती विश्वविद्यालय से परास्नातक की पढ़ाई की। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान संस्थानों से विषयों को तत्थात्मक और प्रभावी तरीके से समझने का सलीका सीखा। यहीं से उन्हें पत्रकारिता की सीढ़ी मिली।


नवनीत राठौर ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत जनतंत्र न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने सूर्या समाचार और अमर उजाला जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। इसके बाद नवनीत लाइव हिंदुस्तान की एस्ट्रोलॉजी टीम का हिस्सा बने। पाठकों को सरल, विश्वसनीय और प्रेरणादायक जानकारी प्रदान करना ही नवनीत राठौर का मुख्य उद्देश्य है।


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