आज विवाह पंचमी पर हुआ था श्रीसीताराम विवाहोत्सव, मंगल आजु जनकपुर,चहुंदिश मंगल मंगल हे
Vivah Panchami:कहने को तो जनकपुर के लिए बारात जा चुकी है। फिर भी संत- श्रद्धालु सभी श्रीअवध में है और यहां जनकपुर की घटना का साक्षात्कार कर रहे हैं अर्थात् अवध भी मिथिला के रंग में पूरी तरह से रंग गयी है

‘गिरा अरथ जल बीचि सम कहिअत भिन्न न भिन्न, बंदउंं सीता राम पद जिन्हहि परम प्रिय खिन्न’ अर्थात् जो वाणी और उसके अर्थ तथा जल और जल की लहर के समान कहने में अलग-अलग हैं, परन्तु वास्तव में अभिन्न (एक) हैं, उन श्री सीतारामजी के चरणों की मैं वंदना करता हूंं जिन्हें दीन-दुःखी बहुत ही प्रिय हैं। गोस्वामी तुलसीदास महाराज ने मानस की इन पंक्तियों के माध्यम से अयोध्या व मिथिला के सनातन सांस्कृतिक सम्बन्धों को नया आयाम दिया था। यही सनातन सम्बन्ध एक बार फिर अपनी पूरी गरिमा और गौरव के साथ उपस्थित है। अवसर है श्रीसीताराम विवाहोत्सव का।
कहने को तो जनकपुर के लिए बारात जा चुकी है। फिर भी संत- श्रद्धालु सभी श्रीअवध में है और यहां जनकपुर की घटना का साक्षात्कार कर रहे हैं अर्थात् अवध भी मिथिला के रंग में पूरी तरह से रंग गयी है और मिथिला में मंगल गीत गूंज रहे है, ‘मंगल आजु जनकपुर, चंहुदिश मंगल-मंगल हे, मिथिला के नतवा से बढि गेलै शान रे। जेहने किशोरी मोरी तेहने किशोर हे।
विधना लगा ओल जोड़ी केहन वेजोर हे..।’ वैसे ही यहां भी मंदिर-मंदिर मंगल गीत गूंज रहे हैं। जानकीमहल, विअहुति भवन, रंगमहल, रामसखी मंदिर, रसमोद कुंज, दिव्यकला कुंज, हनुमानबाग व रामहर्षण कुंज में कहींं किशोरीजी का हल्दी उत्सव, कहीं मटकोर व भगवान के तिलकोत्सव का आयोजन किया गया। इसी तरह से कनकभवन में शनिवार को मंडप पूजन किया गया। देर रात तक विवाह की तैयारियों को पूरा किया गया।
दाम्पत्य जीवन की मर्यादा के लिए विवाह लीला का संवरण
दशरथ राजमहल बड़ा स्थान में बिंदुगद्याचार्य स्वामी देवेन्द्र प्रसादाचार्य महाराज के निर्देशन में विवाहोत्सव के उपलक्ष्य में चल रही रामकथा में प्रसिद्ध कथाव्यास जगदगुरु रामानुजाचार्य स्वामी रत्नेश प्रपन्नाचार्य ने कहा कि यद्यपि श्रीसीताराम भगवान अभिन्न है। फिर भी लोक जगत की प्रतिष्ठापना व दाम्पत्य जीवन की मर्यादा के लिए उन्होंने विवाह लीला का संवरण किया। आचार्य प्रवर ने कहा कि इसके परिणामस्वरूप परमात्मा को भक्ति की अधिष्ठात्री की प्राप्ति होती है। यही विवाह का परम सौष्ठव है। उन्होंने भगवान के बाल स्वरूप की वंदना करते हुए कहा कि अयोध्या की पावन भूमि में परात्पर ब्रह्म की लीला की अनुभूति की जा सकती है। उन्होंने कहा कि शास्त्रों ने जिस ब्रह्म को अत्यंत दुरुह माना है, वह भक्ति के पराभूत होकर महाराज दशरथ के आगंन में किलकारियां मार रहे है। उनके इस सगुण साकार स्वरूप का दर्शन पाने के लिए भगवान शिव व गरुड़ अयोध्या की वीथियों में विचरण कर रहे है। कथा संचालन द्वाराचार्य महंत रामभूषण दास कृपालु महाराज ने किया।
लोकगायन लोक नृत्य की प्रस्तुति ने बांधा समां
शिखर ध्वजारोहण के मुख्य आयोजन के पहले शाम को संस्कृति विभाग द्वारा तीन जगहों पर कलाकारों द्वारा कार्यक्रम की प्रस्तुति की गई। मंगलवार को 12 जगहों पर मंच के माध्यम से सांस्कृतिक कार्यक्रम दिखाई देंगे। 11 मंच साकेत महाविद्यालय से श्री राम मंदिर के जगदगुरू आद्य शंकराचार्य द्वार तक सजाए गए हैं। एक मंच चूड़ामणि चौराहे पर भी बनाया गया है। हर एक मंच पर 15 कलाकारों द्वारा प्रस्तुति दी जाएगी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आगमन के दौरान मार्ग पर एक दर्जन मंचों के माध्यम से सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम होगी। उन्नाव की समर जीत रंधावा ने सूफी गायन, विकास तिवारी और रामदेव शर्मा ने भजन, सीमा मोरवाल ने ब्रज के लोक गायन, अमित मिश्रा ने भजन, प्रकृति यादव ने लोक नृत्य, रामजी त्रिपाठी ने भजन, राम विनोद शरण ने लोक गायन, हेमंत बृजवासी ने भजन और सुगम गायन व निहारिका सफाया ने कथक नृत्य नाटिका प्रस्तुत किया।

लेखक के बारे में
Anuradha Pandeyशार्ट बायो
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