हरतालिका तीज की शाम 6.28 बजे से पूजा मुहूर्त, जानें कैसे करें शिव-पार्वती पूजा
Teej pooja kaise kare, Hartalika Teej Time 2026 : हरतालिका तीज सोमवार की सुबह तक तृतीया तिथि रहेगी। उसके बाद चतुर्थी तिथि शुरू हो जाएगी। आज शुभ मुहूर्त में विधिवत तरीके से शिव-पार्वती की पूजा करने का विधान है।

Teej pooja kaise kare, Hartalika Teej Time 2026 : 14 सितंबर को निर्जला व्रत रखकर भगवान शिव और माता पार्वती की विधिवत पूजा होगी। पंचांग के अनुसार, सोमवार की सुबह 07.06 बजे तक तृतीया तिथि रहेगी। उसके बाद चतुर्थी तिथि शुरू हो जाएगी। इसलिए हरतालिका तीज की मुख्य पूजा सुबह तृतीया तिथि में करना शुभ रहेगा। किसी कारणवश आप सुबह में पूजा न कर पाएं तो शाम में भी पूजा कर सकते हैं। आज शुभ मुहूर्त में विधिवत तरीके से पूजा करने का विधान है। ऐसे में आइए जानते हैं हरतालिका तीज पर पूजा करने का सही तरीका, मंत्र, कथा और मुहूर्त -
हरतालिका तीज की सुबह सिर्फ 1 घंटे का पूजा मुहूर्त, जानें क्या शाम में भी होगी शिव-पार्वती पूजा
हिंदू पंचांग के अनुसार, सोमवार को हरतालिका तीज की पूजा का शुभ समय सुबह 06.06 बजे से 07.06 बजे तक रहेगा। सोमवार की शाम प्रदोष काल में 06.28 बजे 07.37 बजे तक पूजा का शुभ समय बताया गया है। इस दौरान शिव-पार्वती की आरती करें। हरतालिका तीज के व्रत का पारण दूसरे दिन मंगलवार 15 सितंबर को सुर्योदय होने के बाद ही किया जाएगा।
कैसे करें हरतालिका तीज की पूजा?
सबसे पहले चौकी सजाएं। गंगाजल से घर व पूजा स्थल को शुद्ध कर दें। चौकी के चारों-ओर केले के पत्तों को कलावे से बांध दें। चौकी पर साफ कपड़ा बिछाकर कलश की स्थापना करें। गणेश जी को प्रणाम करें। इस पूजन में मिट्टी या बालू से शिव परिवार बनाकर पूजा करें। प्रभु का जलाभिषेक करें। 16 श्रृंगार का सामान, अगरबत्ती, धूप, दीप, शुद्ध घी, पान, कपूर, सुपारी, नारियल, चंदन, फल, फूल के साथ आम, केला, बेल व शमी के पत्ते से पूजा करें। हरतालिका तीज व्रत की कथा का पाठ करें। फिर आरती के बाद श्रद्धा के साथ भोग लगाकर क्षमा-याचना करें।
लिंग पुराण में कथा के अनुसार, भगवान शिव को पति रूप मे प्राप्त करने के लिये माता पार्वती ने हिमालय पर गंगा तट पर तपस्या की थी। इसी तिथि को भगवान शिव ने दर्शन देकर उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किये थे। उसी समय से यह महापर्व एवं इस पवित्र तिथि को मनाया जाता है। महिलाएं निर्जल रहकर भगवान शिव एवं माता गौरी की पूजा अर्चना करती है। यह व्रत महिलाएं अपने पति के लंबी आयु की कामना से रखती है। कई जगहों पर कुमारी कन्या भी शिव की तरह ही पति प्राप्त करने की कामना से इस महान व्रत को करती है। इसे शास्त्रों में हरतालिका व्रत भी कहा जाता है। माता गौरी शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिये घोर तपस्या कर रही थी, जिससे उनका शरीर कमजोर हो चुका था, जिसे देख उनके सहेलियों ने उन्हें कठिन तपस्या करते देख उनका अपहरण कर लिया था, जिस कारण इसका नाम हरतालिका पर गया। हरत का मतलब होता है अगवा करना और आलिका का मतलब होता है, सहेलियों द्वारा अपहरण करना इसी के कारण इसका नाम हरतालिका पर गया। इस व्रत के दौरान महिलाएं गौरी, गणेश, महेश के साथ-साथ अन्य देवी देवताओं की भी पूजा अर्चना होती है। रात्रि में महिलाएं सोती नहीं है। रात भर भगवान शिव और माता गौरी में ध्यान लगाकर पूजा के साथ कथा श्रवण भी करती है। महिलाएं इस व्रत के दौरान सोलह श्रृंगार करती हैं और नए वस्त्र घारण करती हैं। बेलपत्र, शमी, धतूरे का फल, फूल, मदार का पुष्प सहित अन्य सामग्री के साथ पूजा अर्चना करें।
इन मंत्रों का करें जाप
ॐ नमः शिवाय
पार्वत्यै नम:
ऊं उमायै नम:
जगद्धात्रयै नम:
ब्रह्मरूपिण्यै नम:
शिवायै नम:
डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।


