फाल्गुन अमावस्या पर लगेगा सूर्य ग्रहण, जानें भारत में दिखेगा या नहीं? नोट कर लें टाइमिंग

Feb 09, 2026 10:53 am ISTYogesh Joshi लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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Surya Grahan 2026: सूर्य ग्रहण को ज्योतिष और विज्ञान दोनों नजरिए से काफी अहम माना जाता है। जब चांद, पृथ्वी और सूर्य के बीच आ जाता है, तब सूर्य ग्रहण लगता है। ज्योतिष के मुताबिक ग्रहण का असर देश-दुनिया और लोगों के जीवन पर पड़ता है। शास्त्रों में ग्रहण को शुभ नहीं माना गया है।

फाल्गुन अमावस्या पर लगेगा सूर्य ग्रहण, जानें भारत में दिखेगा या नहीं? नोट कर लें टाइमिंग

Surya Grahan 2026: सूर्य ग्रहण को ज्योतिष और विज्ञान दोनों नजरिए से काफी अहम माना जाता है। जब चांद, पृथ्वी और सूर्य के बीच आ जाता है, तब सूर्य ग्रहण लगता है। ज्योतिष के मुताबिक ग्रहण का असर देश-दुनिया और लोगों के जीवन पर पड़ता है। शास्त्रों में ग्रहण को शुभ नहीं माना गया है। सूर्य ग्रहण तीन तरह के होते हैं- पूर्ण सूर्य ग्रहण, आंशिक सूर्य ग्रहण और वलयाकार सूर्य ग्रहण। पूर्ण सूर्य ग्रहण में चांद सूर्य को पूरी तरह ढक लेता है और कुछ जगहों पर दिन में भी अंधेरा हो जाता है। इस दौरान चांद पृथ्वी के काफी पास होता है और सूर्य, चांद और पृथ्वी एक सीध में आ जाते हैं। आंशिक सूर्य ग्रहण में चांद सूर्य का सिर्फ एक हिस्सा ढकता है, इसलिए अंधेरा पूरी तरह नहीं होता। वलयाकार सूर्य ग्रहण में चांद सूर्य से थोड़ा छोटा दिखता है, इस वजह से सूर्य चारों तरफ से एक रिंग की तरह चमकता नजर आता है, जिसे आम भाषा में ‘रिंग ऑफ फायर’ कहा जाता है। इस साल फाल्गुन अमावस्या पर 17 फरवरी 2026 को साल का पहला सूर्य ग्रहण लग रहा है। यह ग्रहण वलयाकार होगा, यानी चांद सूर्य को पूरी तरह नहीं ढकेगा और किनारों से सूर्य की रोशनी दिखेगी। इसी वजह से इसे आम भाषा में ‘रिंग ऑफ फायर’ भी कहा जाता है।

भारत में दिखेगा या नहीं?- यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। यह ग्रीनलैंड, आइसलैंड और स्पेन जैसे देशों में देखा जा सकेगा। भारत में न दिखने की वजह से इस ग्रहण का सूतक काल भी मान्य नहीं होगा।

सूर्य ग्रहण की टाइमिंग (भारतीय समय के मुताबिक)- यह सूर्य ग्रहण रात करीब 3:26 बजे शुरू होगा और सुबह 7:57 बजे खत्म होगा। भारत में उस समय रात रहेगी, इसलिए यहां से इसे देखा नहीं जा सकेगा।

सूतक लगेगा या नहीं?- भारत में इस सूर्य ग्रहण का सूतक नहीं लगेगा। आमतौर पर सूर्य ग्रहण का सूतक 12 घंटे पहले लग जाता है, लेकिन जो ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देता, उसका सूतक यहां मान्य नहीं होता। इसलिए पूजा-पाठ या रोजमर्रा के काम पर कोई रोक नहीं रहेगी।

कुंभ राशि में लगेगा सूर्य ग्रहण- ज्योतिषशास्त्र के अनुसार यह सूर्य ग्रहण कुंभ राशि में लगेगा। ग्रहण के समय सूर्य कुंभ राशि में रहेंगे और यह धनिष्ठा नक्षत्र में पड़ेगा। ज्योतिष के लिहाज से इसका असर सभी राशियों पर पड़ेगा, लेकिन कुंभ राशि पर इसका असर ज्यादा देखने को मिल सकता है।

कितने सूर्य ग्रहण लगेंगे साल 2026 में?- साल 2026 में दो सूर्य ग्रहण लगेंगे। पहला 17 फरवरी को और दूसरा 12 अगस्त को। दोनों ही सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देंगे। दूसरा सूर्य ग्रहण पूर्ण सूर्य ग्रहण होगा।

राशियों पर क्या असर हो सकता है?- इस सूर्य ग्रहण का धार्मिक असर भले ही भारत में न हो, लेकिन ज्योतिष के हिसाब से इसका असर सभी 12 राशियों पर माना जाता है। मेष राशि वालों को करियर में आगे बढ़ने का मौका मिल सकता है और रुके काम पूरे हो सकते हैं। वृष राशि के लिए पैसों से जुड़ी योजना बनाने का समय ठीक रहेगा, खर्च पर थोड़ा कंट्रोल रखना फायदेमंद होगा। मिथुन राशि वालों को नई जिम्मेदारी मिल सकती है, काम में नाम बनेगा। कर्क राशि के लिए घर-परिवार से जुड़ी चिंता बढ़ सकती है, लेकिन बात संभल जाएगी। सिंह राशि वालों को काम में पहचान मिल सकती है, बस जल्दबाजी से बचें। कन्या राशि के लिए सेहत और रोजमर्रा के काम पर ध्यान देना जरूरी रहेगा। तुला राशि वालों को रिश्तों में संतुलन बनाए रखना होगा। वृश्चिक राशि के लिए पैसों और निवेश से जुड़े फैसले सोच-समझकर लेने होंगे। धनु राशि वालों के लिए पढ़ाई और करियर में अच्छे मौके बन सकते हैं। मकर राशि वालों को मेहनत का फल धीरे-धीरे मिलेगा। कुंभ राशि वालों के जीवन में बदलाव की शुरुआत हो सकती है, जिम्मेदारियां बढ़ेंगी। मीन राशि वालों को मन थोड़ा बेचैन रह सकता है, धैर्य से काम लेंगे तो फायदा होगा।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

Yogesh Joshi

लेखक के बारे में

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संक्षिप्त विवरण


योगेश जोशी डिजिटल पत्रकारिता में 8 वर्षों से सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। ज्योतिष और धार्मिक विषयों पर उनका लेखन पाठक-केंद्रित और व्यावहारिक दृष्टिकोण के लिए जाना जाता है। राशिफल, ग्रह-गोचर, दशा-महादशा, अंकज्योतिष, सामुद्रिक शास्त्र, वास्तु, फेंगशुई और पूजा-विधि जैसे विषय उनके काम का प्रमुख हिस्सा हैं।


विस्तृत बायो


परिचय और अनुभव


योगेश जोशी ने डिजिटल मीडिया में काम करते हुए खबर और कंटेंट के बदलते स्वरूप को नजदीक से समझा है। पत्रकारिता में 8 वर्षों के अनुभव के साथ वह फिलहाल लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर की भूमिका निभा रहे हैं।


न्यूज़ और फीचर कंटेंट से शुरू हुआ उनका सफर आज ज्योतिष और धार्मिक विषयों तक पहुंच चुका है, जहां वह पारंपरिक ज्ञान को मौजूदा समय और डिजिटल पाठक की जरूरतों के हिसाब से प्रस्तुत करते हैं। उनका फोकस हमेशा इस बात पर रहता है कि कंटेंट जानकारी दे, उलझाए नहीं।


शैक्षणिक पृष्ठभूमि


योगेश जोशी ने मास कम्युनिकेशन में स्नातक की पढ़ाई की है। पत्रकारिता की इस पढ़ाई ने उन्हें तथ्यों के साथ जिम्मेदारी और संतुलन बनाए रखने की समझ दी, जो उनके लेखन में साफ झलकती है।


करियर की शुरुआत और प्रोफेशनल सफर


योगेश ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत अमर उजाला के डिजिटल प्लेटफॉर्म से की। यहां उन्होंने डिजिटल न्यूज़, कंटेंट राइटिंग और एडिटिंग पर काम करते हुए मजबूत आधार तैयार किया। इसके बाद डिजिटल मीडिया में लगातार काम करते हुए उन्होंने एस्ट्रोलॉजी और धार्मिक विषयों से जुड़े कंटेंट में विशेषज्ञता विकसित की।
पाठक किस भाषा में बात समझता है और किस तरह की जानकारी उसके लिए उपयोगी होती है—यह समझ उनके प्रोफेशनल सफर की सबसे बड़ी ताकत रही है।

एस्ट्रोलॉजी लेखन और उद्देश्य


योगेश के लिए ज्योतिष केवल भविष्य बताने का जरिया नहीं है। वह इसे आत्मचिंतन और सही फैसलों में मदद करने वाले एक मार्गदर्शक के रूप में देखते हैं। इसी सोच के साथ वह राशिफल और अन्य ज्योतिषीय विषयों को संतुलित, व्यावहारिक और भरोसेमंद तरीके से प्रस्तुत करते हैं। उनका उद्देश्य पाठकों को डराना नहीं, बल्कि जानकारी के जरिए उन्हें सोचने और समझने की दिशा देना है।


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काम के अलावा योगेश को सामाजिक विषयों पर पढ़ना, लिखना और भारतीय परंपराओं को समझना पसंद है। उनका मानना है कि एक पत्रकार के लिए सीखना और खुद को अपडेट रखना सबसे जरूरी है।


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