सूर्य ग्रहण 2026: कब, कितने बजे और कहां दिखेगा, भारत में सूतक लगेगा या नहीं? यहां जानें सबकुछ
सूर्य ग्रहण को लेकर हर बार लोगों में अलग तरह की दिलचस्पी देखने को मिलती है। कोई इसे खगोलीय घटना के तौर पर समझना चाहता है तो कोई इसके धार्मिक और ज्योतिषीय पहलू को जानने में रुचि रखता है। सीधी बात करें तो सूर्य ग्रहण तब लगता है जब चंद्रमा, पृथ्वी और सूर्य एक सीध में आ जाते हैं।

सूर्य ग्रहण को लेकर हर बार लोगों में अलग तरह की दिलचस्पी देखने को मिलती है। कोई इसे खगोलीय घटना के तौर पर समझना चाहता है तो कोई इसके धार्मिक और ज्योतिषीय पहलू को जानने में रुचि रखता है। सीधी बात करें तो सूर्य ग्रहण तब लगता है जब चंद्रमा, पृथ्वी और सूर्य एक सीध में आ जाते हैं और चंद्रमा कुछ देर के लिए सूर्य की रोशनी को ढक लेता है। इस वजह से दिन में भी रोशनी कम हो जाती है और माहौल थोड़ा अलग महसूस होता है।
साल का दूसरा सूर्य ग्रहण कब है?-
पंचांग के अनुसार, साल 2026 का दूसरा सूर्य ग्रहण 12 अगस्त को लगेगा। इसका समय रात 9 बजकर 4 मिनट से शुरू होकर 13 अगस्त सुबह 4 बजकर 25 मिनट तक रहेगा। समय भारत के अनुसार है, लेकिन यह ग्रहण यहां दिखाई नहीं देगा। वजह यह है कि जब ग्रहण लगेगा, उस समय भारत में रात होगी। सूर्य दिखाई नहीं देगा, इसलिए ग्रहण भी नजर नहीं आएगा। यही कारण है कि भारत में इस ग्रहण का सूतक काल मान्य नहीं माना जाता।
कहां दिखाई देगा सूर्य ग्रहण?-
आर्कटिक क्षेत्र, ग्रीनलैंड और आइसलैंड में इसे साफ देखा जा सकेगा। उत्तरी स्पेन और अटलांटिक महासागर के कुछ हिस्सों में भी यह नजर आएगा। इसके अलावा फ्रांस, ब्रिटेन और इटली जैसे देशों में यह आंशिक रूप में दिखाई दे सकता है।
ग्रहण को लेकर परंपराएं
ग्रहण को लेकर कई तरह की परंपराएं भी चली आ रही हैं। बहुत से लोग मानते हैं कि इस दौरान खाना नहीं खाना चाहिए। कुछ लोग ग्रहण से पहले ही भोजन बनाकर रख लेते हैं और ग्रहण खत्म होने के बाद ही खाते हैं। इसके पीछे मान्यता है कि ग्रहण के समय बना भोजन अच्छा नहीं माना जाता। हालांकि इस बात को लेकर अलग-अलग राय भी है।
कुछ लोग ग्रहण के दौरान सोने से बचते हैं और ध्यान या मंत्र जाप करना ठीक मानते हैं। उनका मानना है कि इससे मन शांत रहता है। गर्भवती महिलाओं को लेकर भी अक्सर सावधानी बरतने की बात कही जाती है। आम तौर पर उन्हें घर के अंदर रहने और तेज या नुकीली चीजों से दूरी बनाने की सलाह दी जाती है। हालांकि ये सभी बातें परंपराओं और मान्यताओं पर आधारित हैं।
भारत में सूतक का असर नहीं होगा
12 अगस्त 2026 का यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए यहां इसका सीधा असर नहीं माना जाएगा। फिर भी, लोग इसे लेकर जानकारी रखना पसंद करते हैं और अपने हिसाब से सावधानियां अपनाते हैं।
डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य है और सटीक है। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।
लेखक के बारे में
Yogesh Joshiयोगेश जोशी डिजिटल पत्रकारिता में 8 वर्षों से सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। ज्योतिष और धार्मिक विषयों पर उनका लेखन पाठक-केंद्रित और व्यावहारिक दृष्टिकोण के लिए जाना जाता है। राशिफल, ग्रह-गोचर, दशा-महादशा, अंकज्योतिष, सामुद्रिक शास्त्र, वास्तु, फेंगशुई और पूजा-विधि जैसे विषय उनके काम का प्रमुख हिस्सा हैं।
परिचय और अनुभव
योगेश जोशी ने डिजिटल मीडिया में काम करते हुए खबर और कंटेंट के बदलते स्वरूप को नजदीक से समझा है। पत्रकारिता में 8 वर्षों के अनुभव के साथ वह फिलहाल लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर की भूमिका निभा रहे हैं।
न्यूज़ और फीचर कंटेंट से शुरू हुआ उनका सफर आज ज्योतिष और धार्मिक विषयों तक पहुंच चुका है, जहां वह पारंपरिक ज्ञान को मौजूदा समय और डिजिटल पाठक की जरूरतों के हिसाब से प्रस्तुत करते हैं। उनका फोकस हमेशा इस बात पर रहता है कि कंटेंट जानकारी दे, उलझाए नहीं।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
योगेश जोशी ने मास कम्युनिकेशन में स्नातक की पढ़ाई की है। पत्रकारिता की इस पढ़ाई ने उन्हें तथ्यों के साथ जिम्मेदारी और संतुलन बनाए रखने की समझ दी, जो उनके लेखन में साफ झलकती है।
करियर की शुरुआत और प्रोफेशनल सफर
योगेश ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत अमर उजाला के डिजिटल प्लेटफॉर्म से की। यहां उन्होंने डिजिटल न्यूज़, कंटेंट राइटिंग और एडिटिंग पर काम करते हुए मजबूत आधार तैयार किया। इसके बाद डिजिटल मीडिया में लगातार काम करते हुए उन्होंने एस्ट्रोलॉजी और धार्मिक विषयों से जुड़े कंटेंट में विशेषज्ञता विकसित की।
पाठक किस भाषा में बात समझता है और किस तरह की जानकारी उसके लिए उपयोगी होती है—यह समझ उनके प्रोफेशनल सफर की सबसे बड़ी ताकत रही है।
एस्ट्रोलॉजी लेखन और उद्देश्य
योगेश के लिए ज्योतिष केवल भविष्य बताने का जरिया नहीं है। वह इसे आत्मचिंतन और सही फैसलों में मदद करने वाले एक मार्गदर्शक के रूप में देखते हैं। इसी सोच के साथ वह राशिफल और अन्य ज्योतिषीय विषयों को संतुलित, व्यावहारिक और भरोसेमंद तरीके से प्रस्तुत करते हैं। उनका उद्देश्य पाठकों को डराना नहीं, बल्कि जानकारी के जरिए उन्हें सोचने और समझने की दिशा देना है।
व्यक्तिगत रुचियां
काम के अलावा योगेश को सामाजिक विषयों पर पढ़ना, लिखना और भारतीय परंपराओं को समझना पसंद है। उनका मानना है कि एक पत्रकार के लिए सीखना और खुद को अपडेट रखना सबसे जरूरी है।
विशेषज्ञता (Areas of Expertise):
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