Surya Grahan 2026 Kab Lagega: कल दोपहर 3:26 बजे लगेगा सूर्य ग्रहण, जानें भारत में दिखेगा या नहीं?

Feb 16, 2026 12:44 pm ISTYogesh Joshi लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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Surya Grahan 2026 Kab Lagega: साल 2026 का पहला सूर्य ग्रहण 17 फरवरी 2026, फाल्गुन अमावस्या पर लगने जा रहा है। भारतीय समयानुसार यह ग्रहण दोपहर 3:26 बजे से शुरू होकर शाम 7:57 बजे तक रहेगा, यानी लगभग 4 घंटे 30 मिनट तक इसका प्रभाव रहेगा। 

Surya Grahan 2026 Kab Lagega: कल दोपहर 3:26 बजे लगेगा सूर्य ग्रहण, जानें भारत में दिखेगा या नहीं?

Surya Grahan 2026: साल 2026 का पहला सूर्य ग्रहण 17 फरवरी 2026, फाल्गुन अमावस्या पर लगने जा रहा है। भारतीय समयानुसार यह ग्रहण दोपहर 3:26 बजे से शुरू होकर शाम 7:57 बजे तक रहेगा, यानी लगभग 4 घंटे 30 मिनट तक इसका प्रभाव रहेगा। इस अद्भुत खगोलीय घटना को वैज्ञानिक भाषा में वलयाकार सूर्य ग्रहण (Annular Solar Eclipse) कहते हैं। ग्रहण के दौरान चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह नहीं ढक पाएगा, जिससे सूर्य के चारों ओर रोशनी की चमकदार अंगूठी की तरह दृश्य बनता है, जिसे लोग आमतौर पर ‘रिंग ऑफ फायर’ यानी “आग का छल्ला” कहते हैं। वैज्ञानिकों के मुताबिक यह स्थिति तब बनती है, जब चंद्रमा पृथ्वी से थोड़ा ज्यादा दूर होता है। दूरी ज्यादा होने की वजह से चंद्रमा सूर्य से छोटा नजर आता है और सूर्य का बाहरी हिस्सा चमकदार घेरा बनाता है। यही वजह है कि इसे वलयाकार सूर्य ग्रहण कहा जाता है। यह नजारा काफी दुर्लभ और देखने लायक होता है, इसलिए हर बार जब ऐसा ग्रहण पड़ता है, तो दुनियाभर के खगोल प्रेमियों की नजरें उस पर टिकी रहती हैं।

भारत में दिखाई देगा या नहीं? और सूतक काल लगेगा या नहीं?- इस ग्रहण का मुख्य मार्ग दक्षिणी गोलार्ध से होकर जाएगा और यह भारत के आसमान से दिखाई नहीं देगा। चूंकि ग्रहण भारत में दृश्य नहीं होगा, इसलिए धार्मिक मान्यताओं से जुड़ा सूतक काल भी भारत में मान्य नहीं रहेगा। ग्रहण की वजह से शुभ कार्यों पर रोक लगने जैसा कोई नियम भारत में लागू नहीं होगा।

2 मिनट 20 सेकेंड का पल होगा खास- 17 फरवरी 2026 को लगने वाले वलयाकार सूर्य ग्रहण का सबसे खास पल करीब 2 मिनट 20 सेकेंड का होगा, जब चंद्रमा सूर्य के केंद्र का लगभग 96 फीसदी हिस्सा ढक देगा और सूर्य का बाहरी किनारा चमकदार ‘रिंग ऑफ फायर’ की तरह दिखाई देगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक यह ग्रहण भारतीय समयानुसार दोपहर 3:26 बजे शुरू होगा, इसका पीक पल करीब शाम 5:42 बजे के आसपास आएगा और ग्रहण शाम 7:57 बजे समाप्त होगा। हालांकि यह दृश्य भारत में नजर नहीं आएगा, क्योंकि उस वक्त यहां सूर्य क्षितिज के नीचे रहेगा, इसलिए भारत में सूतक काल भी मान्य नहीं होगा।

क्या है वलयाकार सूर्य ग्रहण?

वलयाकार सूर्य ग्रहण ऐसे सूर्य ग्रहण को कहा जाता है जब चंद्रमा अपने कक्ष में पृथ्वी से थोड़ा दूर का होता है। इस वजह से वह सूर्य को पूरी तरह ढक नहीं पाता और सूर्य के केंद्र के चारों ओर चमकदार प्रकाश का एक छल्ला दिखाई देता है - यही वजह है इसे “रिंग ऑफ फायर” कहा जाता है।

कहां दिखाई देगा ये ग्रहण- इस सूर्य ग्रहण का सबसे अच्छा नजारा अंटार्कटिका में दिखने की संभावना है। वहां रिसर्च स्टेशनों के आसपास अधिकतम ग्रहण नजर आ सकता है। इसके अलावा दक्षिणी अफ्रीका के कुछ देशों जैसे दक्षिण अफ्रीका, तंजानिया, जाम्बिया और जिम्बाब्वे में आंशिक रूप से ग्रहण दिखेगा। दक्षिण अमेरिका के कुछ हिस्सों, खासकर अर्जेंटीना और चिली में भी लोग इस ग्रहण को देख पाएंगे। खगोल विशेषज्ञों का कहना है कि वलयाकार ग्रहण का रास्ता काफी दुर्गम इलाकों से होकर गुजरता है। जिन जगहों पर ग्रहण का पूरा असर दिखेगा, वहां पहुंचना आसान नहीं होता। यही वजह है कि बहुत कम लोग इसे सीधे आंखों से देख पाएंगे।

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योगेश जोशी डिजिटल पत्रकारिता में 8 वर्षों से सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। ज्योतिष और धार्मिक विषयों पर उनका लेखन पाठक-केंद्रित और व्यावहारिक दृष्टिकोण के लिए जाना जाता है। राशिफल, ग्रह-गोचर, दशा-महादशा, अंकज्योतिष, सामुद्रिक शास्त्र, वास्तु, फेंगशुई और पूजा-विधि जैसे विषय उनके काम का प्रमुख हिस्सा हैं।


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परिचय और अनुभव


योगेश जोशी ने डिजिटल मीडिया में काम करते हुए खबर और कंटेंट के बदलते स्वरूप को नजदीक से समझा है। पत्रकारिता में 8 वर्षों के अनुभव के साथ वह फिलहाल लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर की भूमिका निभा रहे हैं।


न्यूज़ और फीचर कंटेंट से शुरू हुआ उनका सफर आज ज्योतिष और धार्मिक विषयों तक पहुंच चुका है, जहां वह पारंपरिक ज्ञान को मौजूदा समय और डिजिटल पाठक की जरूरतों के हिसाब से प्रस्तुत करते हैं। उनका फोकस हमेशा इस बात पर रहता है कि कंटेंट जानकारी दे, उलझाए नहीं।


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योगेश जोशी ने मास कम्युनिकेशन में स्नातक की पढ़ाई की है। पत्रकारिता की इस पढ़ाई ने उन्हें तथ्यों के साथ जिम्मेदारी और संतुलन बनाए रखने की समझ दी, जो उनके लेखन में साफ झलकती है।


करियर की शुरुआत और प्रोफेशनल सफर


योगेश ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत अमर उजाला के डिजिटल प्लेटफॉर्म से की। यहां उन्होंने डिजिटल न्यूज़, कंटेंट राइटिंग और एडिटिंग पर काम करते हुए मजबूत आधार तैयार किया। इसके बाद डिजिटल मीडिया में लगातार काम करते हुए उन्होंने एस्ट्रोलॉजी और धार्मिक विषयों से जुड़े कंटेंट में विशेषज्ञता विकसित की।
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