Surya Grah Dosh: सूर्य दोष के लक्षण क्या है? जानिए इसे मजबूत करने के उपाय
Surya Grah Dosh Kya Hai: अगर सूर्य कमजोर या अशुभ स्थिति में हो, तो जातक को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। चलिए जानते हैं कि सूर्य ग्रह दोष के लक्षण क्या है और इसे मबजूत करने के उपाय क्या है। चलिए इसके बारे में जानते हैं।

वैदिक ज्योतिष के मुताबिक किसी भी व्यक्ति की कंडली में सूर्य की दशा गहरा प्रभाव डालती है। सूर्य आत्मा, ऊर्जा, आत्मविश्वास और अधिकार का प्रतीक माना जाता है। यह नेतृत्व, प्रसिद्धि और व्यक्तिगत शक्ति से जुड़ा होता है। मान्यता है कि अगर कुंडली में सूर्य मजबूत स्थिति में हो, तो करियर में उन्नति और समाज में सम्मान मिलता है। लेकिन अगर सूर्य कमजोर या अशुभ स्थिति में हो, तो जातक को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। चलिए जानते हैं कि सूर्य ग्रह दोष के लक्षण क्या है और इसे मबजूत करने के उपाय क्या है। चलिए इसके बारे में जानते हैं।
सूर्य दोष के लक्षण
- मान्यता है कि सूर्य के कुंडली में कमजोर होने पर व्यक्ति में अहंकार आ जाता है।
- आत्मविश्वास की कमी झलकती है।
- इसके साथ ही व्यक्ति की मान सम्मान में कमी आ जाती है।
- इतना ही नहीं व्यक्ति हिंसक प्रवृत्ति का होता है और वह स्वार्थ, क्रोध, ईर्ष्या आदि से भी व्यक्ति ग्रसित हो जाता है।
- सूर्य दोष है, तो जातक को पिता या पितातुल्य लोगों का सहयोग नहीं मिलता है।
- नौकरी में परेशानियां, कानूनी विवाद और सेहत से जुड़ी परेशानियां भी कुंडली में सूर्य के कमजोर होने का लक्षण हैं।
- सूर्य के कमजोर होने पर जातक को शारीरिक और मानसिक कष्ट से गुजरना पड़ता है।
- इसके साथ ही घर पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
कैसे जानें
आप अपनी कुंडली देखकर सूर्य की दुर्बल स्थिति का पता लगा सकते हैं। कुंडली में अगर सूर्य तुला राशि में विराजमान हैं तो वह प्रतिकूल परिणाम देंगे। इसके साथ ही अगर सूर्य कुंडली के छठे, 8वें, 12वें भाव में किसी नीच ग्रह के साथ हैं तो भी सूर्य कमजोर माने जाते हैं।
सूर्य दोष को दूर करने के उपाय
वैदिक ज्योतिष में सूर्य दोष से बचने के लिए कई उपाय भी बताए गए हैं। चलिए इन कुछ विशेष उपायों के बारे में जानते हैं।
रविवार को रखें व्रत
अगर आप कुंडली में सूर्य ग्रह को मजूबत करना चाहते हैं, तो रविवार को व्रत रखना बेहद शुभ फलदायी होगा। क्योंकि रविवार का दिन भगवान सूर्य को समर्पित है। साथ ही इस दिन सूर्य देव को लाल फूल अर्पित करना भी शुभ माना जाता है। इससे सूर्य दोष के प्रभावों को कम किया जा सकता है।
इनकी करें पूजा करें
भगवान विष्णु की पूजा भी सूर्य के नकारात्मक प्रभाव को कम करने में सहायक मानी जाती है। इसके आलाव सुबह उगते सूर्य को जल (अर्घ्य) देना और गायत्री मंत्र या सूर्य बीज मंत्र का जाप करना लाभदायक माना जाता है।
रविवार को दान करें ये चीजें
दान करना बेहद पुण्य का काम होता है। इससे कई ग्रह दोष दूर होते हैं। अगर आप सूर्य दोष के प्रभाव को कम करना चाहिते हैं, तो रविवार के दिन जरूरतमंद लोगों को गेहूं, गुड़ या तांबे की वस्तुएं दान करें।
पहनें ये रत्न
ज्योतिष शास्त्र में कई ऐसे रत्नों का जिक्र मिलता है, जिनका संबंध ग्रहों से होता है और इन्हें धारण करने से भी ग्रह दोष दूर होते हैं। सूर्य देव से संबंधित रत्न माणिक्य है। यग सूर्य की सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाने में मदद कर सकता है।
अन्य उपाय
गायत्री मंत्र का जप करने से भी सूर्य की ऊर्जा संतुलित होती है और मानसिक शांति मिलती है। रोज सूर्य नमस्कार करना शरीर में सूर्य की ऊर्जा को संतुलित करता है और शरीर को स्वस्थ रखता है।
डिस्क्लेमरः इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।
लेखक के बारे में
Dheeraj Palसंक्षिप्त विवरण
धीरज पाल एक डिटिजल पत्रकार है, जिन्हें इस क्षेत्र में 7 से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वो भारत की प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान लाइव हिंदुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन का हिस्सा हैं। यहां वह ग्रह गोचर, वास्तु शास्त्र, न्यूमरोलॉजी, रत्न शास्त्र से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
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धीरज पाल डिजिटल मीडिया में उभरता एक ऐसा नाम है, जो पाठक को धर्म से जुड़ी खबरों को प्रमाणिक तौर पर और आमबोल चाल की भाषा परोसते हैं। वो ग्रह नक्षत्रों, वास्तु शास्त्र, अंक ज्योतिष,रत्न शास्त्र जैसे विषयों पर लेख लिखकर पाठक को उसकी अहमियत के बारे में बताते हैं। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़े हैं और पिछले 4 सालों से काम कर रहे हैं। अपने करियर के दौरान धीरज ने समाचार, फीचर, और एक्सप्लेनर कंटेंट में काम करते हुए अब ज्योतिषीय विषयों को डिजिटल पाठकों तक पहुंचाने में विशेष पहचान बनाई है।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
धीरज ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए इन मीडिया स्टडीज और राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज से जनसंचार एवं पत्रकारिता से परास्नातक की पढ़ाई की। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान संस्थानों से विषयों को तत्थात्मक और प्रभावी तरीके से समझने का सलीका सीखा। यहीं से उन्हें पत्रकारिता की सीढ़ी मिली।
धीरज पाल ने अपने पत्रकारिता कर की शुरुआत एपीएन न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने लोकमत न्यूज हिंदी और एनडीटीवी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। इसके बाद वो लाइव हिंदुस्तान की एस्ट्रोलॉजी टीम का हिस्सा बने। अब इनका एकमात्र उद्देश्य ज्योतिषीय जानकारी को रुचिगत, सरल, प्रमाणिक रूप में प्रस्तुत करना है।
व्यक्तिगत रुचियां
उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के निवासी धीरज पाल को पत्रकारिता और ज्योतिषीय अध्ययन के साथ-साथ घूमने, किताबें पढ़ने और क्रिकेट खेलने का शौक है।
विशेषज्ञता (Areas of Expertise):
ग्रह और नक्षत्रों का असर
वास्तु शास्त्र
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