2026 में लगेंगे 4 ग्रहण: क्या भारत में दिखेंगे? जानें तारीख और समय

Feb 12, 2026 06:03 pm ISTYogesh Joshi लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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Surya aur Chandra Grahan 2026: साल 2026 खगोलीय घटनाओं के लिहाज से काफी खास रहने वाला है। इस साल आसमान में कुल चार बड़े ग्रहण देखने को मिलेंगे, जिनमें दो सूर्य ग्रहण और दो चंद्र ग्रहण शामिल हैं। ये घटनाएं वैज्ञानिक रूप से पूरी तरह प्राकृतिक और खगोलीय प्रक्रिया मानी जाती हैं। 

2026 में लगेंगे 4 ग्रहण: क्या भारत में दिखेंगे? जानें तारीख और समय

साल 2026 खगोलीय घटनाओं के लिहाज से काफी खास रहने वाला है। इस साल आसमान में कुल चार बड़े ग्रहण देखने को मिलेंगे, जिनमें दो सूर्य ग्रहण और दो चंद्र ग्रहण शामिल हैं। ये घटनाएं वैज्ञानिक रूप से पूरी तरह प्राकृतिक और खगोलीय प्रक्रिया मानी जाती हैं। जब सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी एक सीध में आते हैं, तभी ग्रहण लगता है। इसलिए विज्ञान इसे अंतरिक्ष में होने वाली सामान्य गतिविधि के रूप में देखता है। लेकिन भारत में ग्रहण को सिर्फ वैज्ञानिक नजर से नहीं, बल्कि धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं से भी जोड़ा जाता है। सदियों से चली आ रही मान्यताओं के अनुसार ग्रहण का समय आध्यात्मिक रूप से संवेदनशील माना जाता है। यही कारण है कि जैसे ही ग्रहण की तारीख सामने आती है, लोग पहले से तैयारी शुरू कर देते हैं और पंचांग देखकर समय नोट करते हैं। ग्रहण के दौरान सूतक काल का विशेष महत्व होता है। इस समय कई लोग पूजा-पाठ, मंत्र जप और ध्यान करते हैं, जबकि शुभ कार्य, यात्रा या नए काम की शुरुआत टाल दी जाती है। कुछ घरों में ग्रहण के समय भोजन बनाने और खाने से भी परहेज किया जाता है। आइए जानते हैं, 2026 में कब-कब लगेंगे ग्रहण और भारत में दिखेंगे या नहीं….

भारत में नहीं दिखेंगे सूर्य ग्रहण- 2026 में दो बार सूर्य ग्रहण लगेगा, लेकिन ये दोनों सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देंगे। पहला सूर्य ग्रहण 17 फरवरी 2026 को लगेगा और दूसरा 12 अगस्त 2026 को। दूसरा ग्रहण ‘रिंग ऑफ फायर’ यानी वलयाकार सूर्य ग्रहण होगा, जिसमें सूरज के चारों ओर आग की अंगूठी जैसा दृश्य बनता है। लेकिन चूंकि ये दोनों भारत में नजर नहीं आएंगे, इसलिए यहां सूतक काल नहीं माना जाएगा और सामान्य दिनचर्या चलती रहेगी।

भारत में दिखेगा चंद्र ग्रहण- सूर्य ग्रहण भले न दिखें, लेकिन दोनों चंद्र ग्रहण में से एक भारत में दिखाई देंगा, इसलिए इसका धार्मिक महत्व रहेगा। पहला चंद्र ग्रहण 3 मार्च 2026 को होगा। यह शाम 6:26 बजे से 6:46 बजे तक दिखाई देगा। यह हल्का ग्रहण होगा, जिसमें चंद्रमा थोड़ा धुंधला नजर आएगा। जहां ग्रहण दिखेगा, वहां सूतक काल लागू रहेगा। दूसरा चंद्र ग्रहण 28 अगस्त 2026 को लगेगा। यह आंशिक ग्रहण होगा, यानी चंद्रमा का कुछ हिस्सा छाया में जाएगा। यह ग्रहण भी भारत में नहीं दिखाई देगा।

सूतक में क्या सावधानी रखें?- परंपरा के अनुसार ग्रहण के समय कुछ लोग पूजा-पाठ, मंत्र जप या ध्यान करते हैं। कई घरों में इस दौरान खाना नहीं बनाया जाता और शुभ काम टाल दिए जाते हैं। हालांकि ये धार्मिक मान्यताएं हैं, विज्ञान की नजर से ग्रहण एक सामान्य खगोलीय घटना है। इसलिए लोग अपनी आस्था के हिसाब से नियमों का पालन करते हैं।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य है और सटीक है। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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लेखक के बारे में

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संक्षिप्त विवरण


योगेश जोशी डिजिटल पत्रकारिता में 8 वर्षों से सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। ज्योतिष और धार्मिक विषयों पर उनका लेखन पाठक-केंद्रित और व्यावहारिक दृष्टिकोण के लिए जाना जाता है। राशिफल, ग्रह-गोचर, दशा-महादशा, अंकज्योतिष, सामुद्रिक शास्त्र, वास्तु, फेंगशुई और पूजा-विधि जैसे विषय उनके काम का प्रमुख हिस्सा हैं।


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परिचय और अनुभव


योगेश जोशी ने डिजिटल मीडिया में काम करते हुए खबर और कंटेंट के बदलते स्वरूप को नजदीक से समझा है। पत्रकारिता में 8 वर्षों के अनुभव के साथ वह फिलहाल लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर की भूमिका निभा रहे हैं।


न्यूज़ और फीचर कंटेंट से शुरू हुआ उनका सफर आज ज्योतिष और धार्मिक विषयों तक पहुंच चुका है, जहां वह पारंपरिक ज्ञान को मौजूदा समय और डिजिटल पाठक की जरूरतों के हिसाब से प्रस्तुत करते हैं। उनका फोकस हमेशा इस बात पर रहता है कि कंटेंट जानकारी दे, उलझाए नहीं।


शैक्षणिक पृष्ठभूमि


योगेश जोशी ने मास कम्युनिकेशन में स्नातक की पढ़ाई की है। पत्रकारिता की इस पढ़ाई ने उन्हें तथ्यों के साथ जिम्मेदारी और संतुलन बनाए रखने की समझ दी, जो उनके लेखन में साफ झलकती है।


करियर की शुरुआत और प्रोफेशनल सफर


योगेश ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत अमर उजाला के डिजिटल प्लेटफॉर्म से की। यहां उन्होंने डिजिटल न्यूज़, कंटेंट राइटिंग और एडिटिंग पर काम करते हुए मजबूत आधार तैयार किया। इसके बाद डिजिटल मीडिया में लगातार काम करते हुए उन्होंने एस्ट्रोलॉजी और धार्मिक विषयों से जुड़े कंटेंट में विशेषज्ञता विकसित की।
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काम के अलावा योगेश को सामाजिक विषयों पर पढ़ना, लिखना और भारतीय परंपराओं को समझना पसंद है। उनका मानना है कि एक पत्रकार के लिए सीखना और खुद को अपडेट रखना सबसे जरूरी है।


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