DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

सक्सेस मंत्र : तकलीफों का बोझ पीठ पर उठाकर लंबी दूरी नहीं तय सकते

success mantra

हम दुखों के बोझ को जितने ज्यादा समय तक उठाये रखेंगे हम उतने ही दुखी और निराश रहेंगे। यह हम पर निर्भर करता है कि हम दुखों के बोझ को थोड़ी सी देर उठाए रखते हैं या हमेशा। दुख-सुख, सफलता या असफलता यह दोनों ही जीवन के पहलू हैं। यह हर किसी के जीवन में आते हैं। कुछ लोग होते हैं जो अपने लक्ष्य पर अडिग रहते हैं और रास्ते में आने वाली तकलीफों या असफलताओं करे दरकिनार कर आगे बढ़ते रहते हैं। ऐसा कुछ आज की हमारी कहानी में भी बताया जा रहा है।

बहुत समय पहले की बात है, एक गांव में एक महात्मा रहते थे। आसपास के गांवों के लोग अपनी समस्याओं और परेशानियों के समाधान के लिए महात्मा के पास जाते थे और संत उनकी समस्याओं, परेशानियों को दूर करके उनका मार्गदर्शन करते थे। एक दिन एक व्यक्ति ने महात्मा से पूछा- गुरुवर, संसार में खुश रहने का रहस्य क्या है? महात्मा ने उससे कहा कि तुम मेरे साथ जंगल में चलो, मैं तुम्हे खुश रहने का रहस्य बताता हूं।

महात्मा और वह व्यक्ति जंगल की तरफ चल दिए। रास्ते में चलते हुए महात्मा ने एक बड़ा सा पत्थर उठाया और उस व्यक्ति को देते हुए कहा कि इसे पकड़ो और चलो। उस व्यक्ति ने वह पत्थर लिया और वह महात्मा के साथ-साथ चलने लगा। कुछ देर बाद उस व्यक्ति के हाथ में दर्द होने लगा लेकिन वह चुप रहा और चलता रहा। जब चलते-चलते बहुत समय बीत गया और उस व्यक्ति से दर्द सहा नहीं गया तो उसने महात्मा से कहा कि उसे बहुत दर्द हो रहा है। महात्मा ने कहा कि इस पत्थर को नीचे रख दो। पत्थर को नीचे रखते ही उस व्यक्ति को बड़ी राहत मिली। 

महात्मा ने उससे पूछा, जब तुमने पत्थर को अपने हाथ में उठा रखा था तब तुम्हे कैसा लग रहा था। उस व्यक्ति ने कहा, शुरू में दर्द कम था तो मेरा ध्यान आप पर ज्यादा था पत्थर पर कम था लेकिन जैसे-जैसे दर्द बढ़ता गया मेरा ध्यान आप पर से कम होने लगा और पत्थर पर ज्यादा होने लगा और एक समय मेरा पूरा ध्यान पत्थर पर आ गया और मैं इससे अलग कुछ नहीं सोच पा रहा था।

महात्मा ने उससे फिर से सवाल किया, जब तुमने पत्थर को नीचे रखा तब तुम्हे कैसा महसूस हुआ।
इस पर उस व्यक्ति ने कहा- पत्थर नीचे रखते ही मुझे बहुत राहत महसूस हुई और खुशी भी महसूस हुई।
तब महात्मा ने कहा, यही है खुश रहने का रहस्य!
इस पर वह व्यक्ति बोला, गुरुवर, मैं कुछ समझा नहीं।
तब महात्मा ने उसे समझाते हुए कहा, जिस तरह इस पत्थर को थोड़ी देर हाथ में उठाने पर थोड़ा सा दर्द होता है, थोड़ी और ज्यादा देर उठाने पर थोड़ा और ज्यादा दर्द होता है और अगर हम इसे बहुत देर तक उठाए रखेंगे तो दर्द भी बढ़ता जाएगा। उसी तरह हम दुखों के बोझ को जितने ज्यादा समय तक उठाए रखेंगे हम उतने ही दुखी और निराश रहेंगे। यह हम पर निर्भर करता है कि हम दुखों के बोझ को कितनी देर उठाए रखते हैं।

इस कहानी से हमें सीख मिलती है

  • असफलताओं या निराशा के बोझ से जितनी जल्दी हो सके छुटकारा पा लेना ही बेहतर होता है। इस बोझ को ज्यादा देर तक ढोना समझदारी नहीं है। आप पिछली गलतियों के अफसोस में बैठे रहेंगे तो आपके दूरे मौके खत्म हो सकते हैं।
  • इसी तरह तकलीफ देने वाली बीती बातों को बार-बार दोहराने से जीवन में आगे आने वाली खुशियों पर भी पानी फिर जाता है। एक व्यक्ति पहले ही गलती कर चुका है। अब उन बातों को बार-बार सोच कर आप भी उसी गलती को दोहरा रहे हैं। जीवन बहुत बड़ा है और अच्छे-बुरे अवसरों से भरा हुआ है। इसलिए जो बीत गई उन बातों को छोड़कर आगे बढ़ना ही सही होता है।
     
  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:You can t cover long distance with baggage of past bitter experiences
Astro Buddy