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जीवन में सांसारिक सुख और अंत काल में मोक्ष प्रदान करता है यह व्रत

हर मास आने वाली कृष्ण और शुक्ल पक्ष एकादशी तिथि का बहुत महत्व है। एक एकादशी का व्रत ऐसा भी है जिसके प्रभाव से समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं साथ ही अंत काल में मोक्ष की भी प्राप्ति होती है। भगवान श्री हरि विष्णु को समर्पित योगिनी एकादशी व्रत में विधि विधान से उपवास रखने से सांसारिक सुख-सुविधाओं की प्राप्ति होती है। अंत काल में श्री हरि के चरणों में स्थान प्राप्त होता है।

इस व्रत को विधि विधान से करना चाहिए। योगिनी एकादशी के उपवास में प्रात: काल नित्यकर्म से निवृत्त होकर व्रत का संकल्प लें। भगवान श्री हरि विष्णु की आराधना करें। भगवान नारायण की पुष्प, धूप, दीप आदि से आरती करें। इस दिन दान अवश्य करें। रात्रि में श्री हरि विष्णु के भजनों का गायन कर जागरण करें। इस दिन दुर्व्यसनों से दूर रहें। सात्विक जीवन जीएं। इस व्रत के प्रभाव से मन शांत एवं स्थिर होता है। इस व्रत में किसी की भी निंदा न करें। इस व्रत में अन्न वर्जित है। दिन में निराहार रहें और शाम में पूजा के बाद फल ग्रहण कर सकते हैं। माना जाता है कि इस एकादशी पर पीपल के पेड़ की पूजा करने से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। 

इस आलेख में दी गई जानकारियां धार्मिक आस्थाओं और लौकिक मान्यताओं पर आधारित हैं, जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है।

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  • Web Title:Yogini Ekadashi
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