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योगिनी एकादशी है मुक्ति का आसान रास्ता, जानें कब और कैसे रखना है व्रत

Devshayani Ekadashi 2019: हिन्दू धर्म में हर साल 24 एकादशी के व्रत रखे जाते हैं. यह परंपरा सालों पुरानी है. लेकिन जिस साल मलमास पड़ता है उस साल एकदशी व्रत की संख्या बढ़कर 26 हो जाती है. इन्हीं में एक एकादशी को योगिनी एकादशी कहा जाता है, जो कि आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष में आती है. इस साल यह एकादशी शनिवार 29 जून को है. हालांकि कुछ लोग इसे 28 जून को ही मान रहे हैं. आइये जानते हैं इसका पौराणिक महत्व कितना है.

योगिनी एकादशी की पूजा को शास्त्रों में काफी अहमियत दी गई है. इसकी पूजा का विधान भी बताया गया है. सर्वप्रथम स्नान आदि करने के बाद व्रत का संकल्प लिया जाता है. पद्मपुराण में इस दिन तिल का उबटन लगाकर स्नान करने को शुभ माना गया है. इसके बाद व्रत में भगवान विष्णु और पीपल के वृक्ष की पूजा करने का शास्त्रों में विधान है.  

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पूजा विधी की बात करें तो सबसे पहले भगवान विष्णु को पंचामृत से स्नान कराया जाता है. इस दौरान भगवान विष्णु के मंत्र का जप करना चाहिए. इसके पश्चात चरणामृत को व्रती और परिवार के सदस्यों पर छिड़कें और पिएं. माना जाता है कि इससे शरीर के रोग, विकार और कष्ट दूर होते हैं. 

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दरअसल 28 जून को सुबह 6 बजकर 36 मिनट पर एकदाशी शुरू हो जायेगी. लेकिन सूर्योदय दशमी तिथि में साढ़े पांच बने हो रहा है. लिहाजा 28 तारीख को उदया तिथि नहीं मिलने की वजह से 29 तारीख को वैष्णवों और सभी वर्ग के लिए एकादशी का व्रत रखना अनुकूल होगा, ऐसा शास्त्रों का मानना है. इसके अलावा 29 जून को मोक्ष की इच्छा रखने वाले लोग एकदाशी का व्रत रख सकते हैं. यह उनके लिए उचित होगा.

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