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17 नबम्बर, 2019|5:35|IST

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योगदा सत्संग सोसाइटी ऑफ इंडिया 20 अक्टूबर को आयोजित करेगा सत्संग, अमरीकी संत-स्वामी चिदानंद गिरी करेंगे अध्यक्षता

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आजकल के भागते-दौड़ते जीवन में हर व्यक्ति किसी न किसी तनाव में जी रहा है। जिम्मेदारियों को निभाते-निभाते हम भौतिक वस्तुओं को तो प्राप्त कर लेते हैं, लेकिन हम मन की शांति को खो बैठते हैं। ऐसे में खुद को आध्यात्मिकता के साथ जोड़ना बहुत जरूरी है। 
इस दिशा में योगदा सत्संग सोसाइटी ऑफ इंडिया एक सार्थक कदम उठा रहा है। 
आगामी 20 अक्टूबर को इस संस्था द्वारा सत्संग के एक कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि अमरीकी संत- श्री श्री स्वामी चिदानंद गिरी अक्टूबर-नवंबर 2019 में भारत यात्रा पर आने वाले हैं और 20 अक्टूबर को नोएडा  आश्रम में वो भक्तों के साथ मिलकर सत्संग करेंगे। यह कार्यक्रम मुख्य रूप से  तीन प्रमुख शहरों –  नोएडा, हैदराबाद, और मुंबई में आयोजित किया जाएगा, जिसकी  अध्यक्षता श्री श्री स्वामी चिदानंद गिरी करेंगे। स्वामी चिदानंद गिरी, योगदा सत्संग सोसाइटी ऑफ इंडिया और सेल्फ-रियलाइजेशन फैलोशिप संस्थाओं के अध्यक्ष, और इन संस्थाओं के संस्थापक श्री श्री परमहंस योगानंद जी के परम अनुयायी माने जाते हैं। 


पश्चिम में योग के जनक माने जाते हैं 'परमहंस योगानंद'
श्री श्री परमहंस योगानंद को पश्चिम में योग के जनक  के रूप में माना जाता है। उनकी लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उनकी गणना भारत के प्राचीन ज्ञान का पाश्चात्य देशों में प्रचार करने वाले महानतम आध्यात्मिक दूतों में होती है। उनका जीवन और उनकी शिक्षाएँ आज भी सभी जातियों, संस्कृतियों और सम्प्रदायों के लोगों के बीच प्रेरणास्त्रोत मान जाता है। 
पश्चिम में बिताए अपने 30 वर्षों की अवधि में उन्होंने 1,00,000 से भी अधिक स्त्री-पुरुषों को इसकी दीक्षा दी थी। इसके अलावा उन्होंने विज्ञान, व्यापार और कला क्षेत्र की जानी-मानी हस्तियों ने भी उनसे शिक्षा पाई। 1935–36 में परमहंस योगानंदजी भारत वापस आए थे, उनकी भारत यात्रा के दौरान उन्होंने महात्मा गांधी से उनके वर्धा आश्रम में भेंट की थी। बापू के अनुरोध पर, योगानंदजी ने उन्हें और उनके कई अनुगामियों को क्रिया योग की शिक्षा दी थी।


'स्वामी चिदानंद गिरी' क्रिया योग शिक्षाओं का विदेशों में कर रहे हैं प्रचार-प्रसार 
30 अगस्त 2017 को स्वामी चिदानंदजी श्री मृणालिनी माताजी के बाद इन दोनों संस्थाओं के पांचवें अध्यक्ष और आध्यात्मिक प्रमुख बने। इसके अलावा वो  40 से अधिक वर्षों से इन संस्थाओं में संन्यासी रहे हैं। अपने संन्यास जीवन के लगभग प्रारंभ से ही, उन्होंने परमहंस योगानंदजी के अंतरंग शिष्य/शिष्याओं के सानिध्य में कार्य किया। स्वामी चिदानंदजी को 1997 में श्री दया माताजी द्वारा संन्यास की दीक्षा दी गई। उन्होंने परमहंस योगानंदजी की क्रिया योग सम्बन्धी शिक्षाओं का अमेरिका, कनाडा, योरोप और भारत में प्रसार किया है। अध्यक्ष बनने के कुछ ही समय बाद वो नवम्बर 2017 में स्वामी चिदानंदजी वाई।एस।एस। आश्रमों का दौरा करने भारत आये थे। जहां उनका स्वागत रांची आश्रम में भारत के राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने किया था। यहां उन्होंने 'ईश्वर-अर्जुन संवाद: श्रीमद भगवद्गीता' पुस्तक का विधिवत विमोचन भी किया था। 
 

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