ट्रेंडिंग न्यूज़

अगला लेख

अगली खबर पढ़ने के लिए यहाँ टैप करें

Hindi News AstrologyWill Apara Ekadashi fast be observed on both days of 23 June Note date time pooja vidhi muhurat vrat paran samay

Apara Ekadashi: 2-3 जून क्या दो दिन रखा जाएगा अपरा एकादशी व्रत?, नोट करें सही डेट, मुहूर्त, पूजाविधि, व्रत पारण टाइम

Apara Ekadashi Fast : अपरा एकादशी का व्रत ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी को रखा जाता है। एकादशी व्रत रखने से जातक की मनोकामनाएं पूर्ण हो सकती हैं।

Apara Ekadashi: 2-3 जून क्या दो दिन रखा जाएगा अपरा एकादशी व्रत?, नोट करें सही डेट, मुहूर्त, पूजाविधि, व्रत पारण टाइम
Shrishti Chaubeyलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीSat, 01 Jun 2024 11:20 AM
ऐप पर पढ़ें

Apara Ekadashi fast : अपरा एकादशी तिथि भगवान विष्णु की पूजा के लिए समर्पित है। एकादशी की तिथि को व्रत रखकर विधि विधान से भगवान विष्णु की पूजा अर्चना की जाती है। यह व्रत ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी को रखा जाता है। पंचांग के अनुसार, अपरा एकादशी व्रत 2 जून और 3 जून दोनों दिन पड़ रहा है। आइए जानते हैं कब किस दिन रखा जाएगा अपरा एकादशी व्रत, मुहूर्त, पूजाविधि और व्रत पारण समय-

कब है अपरा एकादशी?
इस साल अपरा एकादशी दो दिन मनाई जाएगी। पंचांग के अनुसार, 2 जून के दिन सुबह 05:04 मिनट से एकादशी तिथि की शुरुआत होगी, जो 3 जून के दिन सुबह 02:41 मिनट तक रहेगी। गृहस्थ लोग 2 जून के दिन यह व्रत रखेंगे वहीं, वैष्णव संप्रदाय के लोग 3 जून के दिन यह व्रत रखेंगे।

शुभ मुहूर्त 
अपरा एकादशी एकादशी तिथि प्रारम्भ - जून 02, 2024 को 05:04 ए एम बजे
अपरा एकादशी एकादशी तिथि समाप्त - जून 03, 2024 को 02:41 ए एम बजे
3 जून को, पारण (व्रत तोड़ने का) समय - 08:05 ए एम से 08:10 ए एम
पारण तिथि के दिन हरि वासर समाप्त होने का समय - 08:05 ए एम
वैष्णव अपरा एकादशी- सोमवार, जून 3 2024 
4 जून को वैष्णव एकादशी के लिए पारण (व्रत तोड़ने का) समय - 05:23 ए एम से 08:10 ए एम
पारण के दिन द्वादशी सूर्योदय से पहले समाप्त हो जाएगी।

पूजा की विधि 
स्नान आदि कर मंदिर की साफ सफाई करें
भगवान श्री हरि विष्णु का जलाभिषेक करें
प्रभु का पंचामृत सहित गंगाजल से अभिषेक करें
अब प्रभु को पीला चंदन और पीले पुष्प अर्पित करें
मंदिर में घी का दीपक प्रज्वलित करें
संभव हो तो व्रत रखें और व्रत लेने का संकल्प करें
अपरा एकादशी की व्रत कथा का पाठ करें
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करें
पूरी श्रद्धा के साथ भगवान श्री हरि विष्णु और लक्ष्मी जी की आरती करें
प्रभु को तुलसी सहित भोग लगाएं
अंत में क्षमा प्रार्थना करें

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।