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Vishwakarma Puja 2018: हर साल एक ही दिन क्यों मनाते हैं विश्वकर्मा पूजा

विश्वकर्मा पूजा (साभारः गूगल)

हिन्दू धर्म में हरेक त्योहार या व्रत हिन्दू पंचांग की तिथि के अनुसार मनाया जाता है। लेकिन विश्वकर्मा जयंती को हर साल सिर्फ 17 सितंबर को मनाया जाता है। अब ऐसे में यह सवाल सबके मन में आता है कि, विश्वकर्मा पूजा हर साल एक ही दिन क्यों मनाई जाती है। तो आइए आपको इसका कारण बताते हैं।

हर साल एक ही दिन क्यों मनाई जाती है विश्वकर्मा जयंती

विश्वकर्मा जयंती को लेकर हिन्दू धर्म में कई मान्यताएं हैं। कुछ धर्मपंडितों के अनुसार भगवान विश्वकर्मा का जन्म अश्विन कृष्णपक्ष की प्रतिपदा तिथि को हुआ था, जबकि कुछ का मानना है कि भाद्रपद की अंतिम तिथि को विश्वकर्मा पूजा करना शुभ होता है। इसलिए विश्वकर्मा पूजा को सूर्य के पारगमन के आधार पर तय किया जाता है। जिसके चलते हर साल 17 सितंबर को ही विश्वकर्मा जयंती मनाई जाती है।

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कौन है भगवान विश्वकर्मा
भगवान विश्वकर्मा को निर्माण का देवता माना जाता है। हिन्दू मान्यताओं के अनुसार पौराणिक काल में देवताओं के अस्त्र-शस्त्र व महलों को भगवान विश्वकर्मा ने ही बनाया था। इसके साथ ही इन्होंने सोने की लंका, पुष्पक विमान, इंद्र का व्रज, भगवान शिव का त्रिशूल, पांडवों की इंद्रप्रस्थ नगरी, भगवान कृष्ण की द्वारिका नगरी को भी बनाया था। इस वजह से निर्माण और सृजन से जुड़े लोग विश्वकर्मा जयंती को श्रद्धा भाव से पूजा करते हैं।

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ये जानकारियां धार्मिक आस्थाओं और लौकिक मान्यताओं  पर आधारित हैं, जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया  गया है

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  • Web Title:why vishwakarma puja is being celebrated on 17 september in india know who is bhagwan vishwakarma