why tirupati balaji is called poor find reason in this mythological story - करोड़ों के चढ़ावे के बाद भी क्यों गरीब माने जाते हैं तिरुपति बालाजी महाराज, जानें क्या है पौराणिक कहानी DA Image
12 दिसंबर, 2019|6:30|IST

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करोड़ों के चढ़ावे के बाद भी क्यों गरीब माने जाते हैं तिरुपति बालाजी महाराज, जानें क्या है पौराणिक कहानी

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आंध्र प्रदेश में स्थित तिरुपति बालाजी मंदिर चढ़ावे में आए सोना, चांदी, कीमती सामान और पैसों की वजह से सुर्खियों में रहता है। इसी वजह से तिरुपति बालाजी मंदिर को वीआईपी मंदिर भी माना जाता है। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें, तो हर साल भगवान तिरुपति पर करोड़ों का चढ़ावा चढ़ता है लेकिन फिर भी पौराणिक कहानी के अनुसार भगवान तिरुपति यानी विष्णु के अवतार इस देवता को गरीब माना जाता है। 

 

क्या है पौराणिक कहानी
प्राचीन कथा के अनुसार एक बार महर्षि  भृगु बैकुंठ पधारे और आते ही शेष शैय्या पर योगनिद्रा में लेटे भगवान विष्णु छाती पर एक लात मारी। भगवान विष्णु ने तुरंत भृगु के चरण पकड़ लिेए और पूछने लगे कि ऋषिवर पैर में चोट तो नहीं लगी। भगवान विष्णु  का इतना कहना था कि भृगु ऋषि ने दोनों हाथ जोड़ लिए और उन्होंने अपनी गलती स्वीकार कर ली। भृगु ऋषि हाथ जोड़कर बोले ‘प्रभु आप ही सबसे सहनशील देवता हैं इसलिए यज्ञ भाग के प्रमुख अधिकारी आप ही हैं, लेकिन इस अपमान से देवी लक्ष्मी भृगु ऋषि  को दंड देना चाहती थी। भगवान विष्णु केे कुछ न कहने पर देवी लक्ष्मी नाराज हो गई। नाराजगी इस बात से थी कि भगवान ने भृगु ऋषि को दंड क्यों नहीं दिेया। नाराजगी में देवी लक्ष्मी बैकुंठ छोड़कर चली गई। भगवान विष्णु ने देवी लक्ष्मी को ढूंढना शुरु किया तो पता चला कि देवी ने पृथ्वी पर पद्मावती नाम की कन्या के रुप में जन्म लिया है। भगवान विष्णु ने भी तब अपना रुप बदला और पहुंच गए पद्मावती के पास। भगवान ने पद्मावती के सामने विुवाह का प्रस्ताव रखा जिसे देवी ने स्वीकार कर लिया लेकिन प्रश्न सामने यह आया कि विवाह के लिए धन कहां से आएगा।

 

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देवी लक्ष्मी से शादी के लिए लिया कर्ज 
विष्णु जी ने समस्या का समाधान निकालने के लिए भगवान शिव और ब्रह्मा जी को साक्षी रखकर कुबेर से काफी धन कर्ज लिया। इस कर्ज से भगवान विष्णु के वेंकटेश रुप और देवी लक्ष्मी के अंश पद्मवती ने विवाह किया। कुबेर से कर्ज लेते समय भगवान ने वचन दिया था कि कलियुग के अंत तक वह अपना सारा कर्ज चुका देंगे। कर्ज समाप्त होने तक वह ब्याज चुकाते रहेंगे। भगवान के कर्ज में डूबे होने की इस मान्यता के कारण बड़ी मात्रा में भक्त धन-दौलत भेंट करते हैं, ताकि भगवान कर्ज मुक्त हो जाएं।

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