Why do we offer milk to shivaling know the mythological story of bhagwatpuran - शिवलिंग पर क्यों चढ़ाया जाता है दूध, भागवतपुराण में लिखी है उनके नीलकंठ बनने की यह कहानी DA Image
7 दिसंबर, 2019|2:19|IST

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शिवलिंग पर क्यों चढ़ाया जाता है दूध, भागवतपुराण में लिखी है उनके नीलकंठ बनने की यह कहानी

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भगवान शिव को कई नामों से जाना जाता है। वहीं, उनके स्वभाव को लेकर भी कहा जाता है कि शिव सबसे भोले होने के साथ सबसे क्रोधित देव भी हैं। जिन्हें सृष्टि में घट रही कुछ अनहोनी घटनाओं पर क्रोध आता है इसलिए वो अपना रुद्ध अवतार लेते हैं। सीमित संसाधनों के बीच कैलाश पर रहने वाले भोले को दूध चढ़ाने के पीछे भी एक ऐसी कहानी है, जिससे पता चलता है कि वो सृष्टि का विनाश के लिए ही नहीं जाने जाते बल्कि उन्होंने जीवों की रक्षा के लिए कई मुश्किल काम भी किए हैं। आइए, जानते हैं- 

पुराणों में वर्णित है भगवान शिव से जुड़ी यह कहानी 
समुद्रमंथन की पूरी कथा विष्णुपुराण और भागवतपुराण में वर्णित है। जिसमें एक कथा मिलती है। इस कथा के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान जब विष की उत्पत्ति हुई थी, तो पूरा संसार इसके तीव्र प्रभाव में आ गया था। जिस कारण सभी लोग भगवान शिव की शरण में आ गए क्योंकि विष की तीव्रता को सहने की ताकत केवल भगवान शिव के पास थी। शिव ने बिना किसी भय के संसार के कल्याण हेतु विषपान कर लिया। विष की तीव्रता इतनी अधिक थी कि भगवान शिव का कंठ नीला हो गया।

 

milk pouring

 

विष के प्रभाव से भगवान शिव का नीला हुआ गला 
विष का घातक प्रभाव शिव और शिव की जटा में विराजमान देवी गंगा पर पड़ने लगा। ऐसे में शिव को शांत करने के जल की शीलता भी काफी नहीं थी। सभी देवताओं ने उनसे दूध ग्रहण करने का निवेदन किया। लेकिन अपने जीव मात्र की चिंता के स्वभाव के कारण भगवान शिव ने दूध से उनके द्वारा ग्रहण करने की आज्ञा मांगी। स्वभाव से शीतल और निर्मल दूध ने शिव के इस विनम्र निवेदन को तत्काल ही स्वीकार कर लिया। शिव ने दूध को ग्रहण किया जिससे उनकी तीव्रता काफी सीमा तक कम हो गई पंरतु उनका कंठ हमेशा के लिए नीला हो गया और उन्हें नीलकंठ के नाम से जाना जाने लगा।


कठिन समय में बिना अपनी चिंता किए दूध ने शिव और संसार की सहायता के लिए दूध ने शिव के पेट में जाकर विष की तीव्रता को सहन किया इसलिए शिव को दूध अत्यधिक प्रिय है। वहीं दूसरी तरफ शिव को सांप भी बहुत प्रिय है क्योंकि सांपों ने विष के प्रभाव को कम करने के लिए विष की तीव्रता स्वंय में समाहित कर ली थी इसलिए अधिकतर सांप बहुत जहरीले होते हैं।

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