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कोइला में कान्हा के चरण स्पर्श को यमुना ने लिया था उफान

koila mathura

मथुरा जनपद में आज भी ऐसे अनेक अनेक प्रमाण मौजूद हैं, जोकि योगीराज कृष्ण की गाथाओं को आज भी जीवंत करते हैं। योगीराज कृष्ण के जन्म उपरान्त कंस के प्रकोप से बचाने को वासुदेव जी द्वारा कृष्ण को छुपा कर गोकुल लेकर जा रहे थे। इसी बीच रास्ते में पड़ी यमुना महारानी ने योगीराज कृष्ण के चरण स्पर्श को उफान पर आने लगी। इससे वासुदेव जी काफी घबरा गए और चिंतित होने लगे और यमुना घाट पर इसी स्थान पर कुल वासियों को मदद के लिए पुकारा कि मेरे लाला को कोई-ले कोई-ले तभी से इस गांव का नाम कोईले पड़ गया।

जनपद की सदर तहसील के अंतर्गत जनपद मुख्यालय से करीब 12 किलोमीटर दूर यमुना किनारे खादर में बसे गांव कोयला का विशेष वर्णन श्रीमद् भागवत कथा में किया गया है। भगवान कृष्ण को कंस की कारागार में जन्म के उपरांत कंस के प्रकोप से सुरक्षित बचाने के लिए वासुदेव जी सिर पर डला में कृष्ण को छुपाकर गोकुल ले जा रहे थे तभी रास्ते में पड़ी यमुना को पार कर ही रहे थे कि अचानक यमुना में उफान आने लगा और वासुदेव जी पूरी तरह से डूबने लगे तभी वासुदेव जी को चिंता और भय सताया की यमुना नदी और उफान लेती है तो मेरे लाला को डुबो देगी। कैसे मैं उसे गोकुल तक सुरक्षित पहुंच जाऊंगा। पिता वासुदेव जी की चिंता और व्याकुलता को देख योगीराज कृष्ण ने डला से अपने पैर नीचे लटका दिए। जिनका यमुना महारानी ने स्पर्श किया और अपनी साधारण अवस्था में वापस आ गई। उन्हें गोकुल जाने का रास्ता दे दिया। 

यह स्थान ब्रज चौरासी कोस परिक्रमा के मार्ग में भी आता है। यह स्थान जो कि वासुदेव घाट के नाम से विख्यात है और देखरेख के अभाव में बेहाल पड़ा हुआ था। एक दशक पूर्व इस वासुदेव घाट का जीर्णोद्धार दा ब्रज फाउंडेशन नामक संस्था ने बीकानेर निवासी मुंथड़ा परिवार बगीची वाले के आर्थिक सहयोग से इसका कराया गया और इसे रमणीक और पर्यटन का केंद्र बनाया। वासुदेव जी के उस अवतार की एक प्रतिमा लगवाई गई, जिसमें वासुदेव जी के सर पर डला और उसमें विराजमान कृष्ण बाल रूप में मौजूद हैं।

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  • Web Title:when river yamuna was flooded to touch the feed lord krishna in Koila Mathura
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