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हिंदी न्यूज़ धर्मGanesh Jayanti 2021: आज है गणेश जयंती, इस शुभ मुहूर्त में करें भगवान गणेश की पूजा, पूरी होगी मनोकामना

Ganesh Jayanti 2021: आज है गणेश जयंती, इस शुभ मुहूर्त में करें भगवान गणेश की पूजा, पूरी होगी मनोकामना

माघ मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को गणेश जयंती मनाते हैं। इस साल गणेश जयंती का पर्व 15 फरवरी 2021 को मनाया जा रहा है। गणेश जयंती को गणेश चतुर्थी, माघ विनायक चतुर्थी और वरद चतुर्थी के नाम से...

Ganesh Jayanti 2021: आज है गणेश जयंती, इस शुभ मुहूर्त में करें भगवान गणेश की पूजा, पूरी होगी मनोकामना
Saumya Tiwariलाइव हिन्दुस्तान टीम,नई दिल्लीMon, 15 Feb 2021 05:13 AM
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माघ मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को गणेश जयंती मनाते हैं। इस साल गणेश जयंती का पर्व 15 फरवरी 2021 को मनाया जा रहा है। गणेश जयंती को गणेश चतुर्थी, माघ विनायक चतुर्थी और वरद चतुर्थी के नाम से जानते हैं। मान्यता है कि इस दिन भगवान गणेश का जन्म हुआ था। कहते हैं कि इस दिन विधि-विधान से भगवान गणेश की पूजा करने से भक्तों को मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

गणेश जयंती पूजा शुभ मुहूर्त-

गणेश जयंती- 15, फरवरी 2021 (सोमवार)
चतुर्थी तिथि प्रारम्भ- 15, फरवरी 2021, देर रात 01:58 बजे से
चतुर्थी तिथि समाप्त- 16, फरवरी 2021, देर रात 03:36 बजे
वर्जित चन्द्रदर्शन का समय- सुबह 09:14 बजे से रात 09:32 बजे तक।

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गणेश चतुर्थी पूजा विधि-

1. गणेश चतुर्थी के दिन सुबह गणपति बप्पा के व्रत का संकल्प लें।
2. शुभ मुहूर्त में किसी पाटे, चौकी लाल कपड़ा बिछाकर गणेश जी की प्रतिमा या चित्र को स्थापित करें।
3. गंगाजल का छिड़काव करें और गणपति जी को प्रणाम करें।
4. गणेश जी को सिंदूर अर्पित करें और धूप-दीप जलाएं।
5. गणेश भगवान को मोदक, लड्डू, पुष्प, सिंदूर, जनेऊ और 21 दूर्वा अर्पित करें।
6. पूरे परिवार सहित गणेश जी की आरती करें।

विनायक चतुर्थी की व्रत कथा-

एक दिन भगवान भोलेनाथ स्नान करने के लिए कैलाश पर्वत से भोगवती गए। महादेव के प्रस्थान करने के बाद मां पार्वती ने स्नान प्रारंभ किया और घर में स्नान करतो हुए अपने मैल से एक पुतला बनाकर और उस पुतले में जान डालकर उसको सजीव किया गया। पुतले में जान आने के बाद देवी पार्वती ने पुतले का नाम गणेश रखा। पार्वतीजी ने बालक गणेश को स्नान करते जाते वक्त मुख्य द्वार पर पहरा देने के लिए कहा। माता पार्वती ने कहा कि जब तक में स्नान करके न आ जाऊं किसी को भी अंदर नहीं आने देना।

भोगवती में स्नान कर जब श्रीगणेश अंदर आने लगे तो बाल स्वरूप गणेश ने उनको द्वार पर रोक दिया। भगवान शिव के लाख कोशिश के बाद भी गणेश ने उनको अंदर नहीं जाने दिया। गणेश द्वारा रोकने को उन्होंने अपना अपमान समझा और बालक गणेश का सर धड़ से अलग कर वो घर के अंदर चले गए। शिवजी जब घर के अंदर गए तो वह बहुत क्रोधित अवस्था में थे। ऐसे में देवी पार्वती ने सोचा कि भोजन में देरी की वजह से वो नाराज हैं, इसलिए उन्होंने दो थालियों में भोजन परोसकर उनसे भोजन करने का निवेदन किया।

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शिव न लगाया था हाथी के बच्चे का सिर-

दो थालियां लगी देखकर शिवजी ने उनसे पूछा कि दूसरी थाली किसके लिए है? तब शिवजी ने जवाब दिया कि दूसरी थाली पुत्र गणेश के लिए है, जो द्वार पर पहरा दे रहा है। तब भगवान शिव ने देवी पार्वती से कहा कि उसका सिर मैने क्रोधित होने की वजह से धड़ से अलग कर दिया। इतना सुनकर पार्वतीजी दुखी हो गई और विलाप करने लगी। उन्होंने भोलेनाथ से पुत्र गणेश का सिर जोड़कर जीवित करने का आग्रह किया। तब महादेव ने एक हाथी के बच्चे का सिर धड़ काटकर गणेश के धड़ से जोड़ दिया। अपने पुत्र को फिर से जीवित पाकर माता पार्वती अत्यंत प्रसन्न हुई। कहा जाता है कि जिस तरह शिव ने श्रीगणेश को नया जीवन दिया था, उसी तरह भगवान गणेश भी नया जीवन अर्थात आरम्भ के देवता माने जाते हैं।

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