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हिंदी न्यूज़ धर्मनवरात्र में जौ बोने का क्या है महत्व , उगने के बाद रंग देते हैं ये शुभ संकेत

नवरात्र में जौ बोने का क्या है महत्व , उगने के बाद रंग देते हैं ये शुभ संकेत

नवरात्र में कलश स्थापना के साथ ही जौ बोये जाते हैं बिना इसके माता की पूजा अधूरी मानी जाती है। जौ किस तेजी से बढ़ रहा है इसके पीछे कई शुभ और अशुभ संकेत छिपे होते हैं। 

नवरात्र में जौ बोने का क्या है महत्व , उगने के बाद रंग देते हैं ये शुभ संकेत
Archana Pathakलाइव हिंदुस्तान,नई दिल्लीMon, 26 Sep 2022 12:55 PM

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नवरात्रि साल में दो बार बेहद धूम -धाम से मनाई जाती है। शारदीय नवरात्र में पहले दिन कलश स्थापना और उसके साथ जौ बोना बहुत शुभ माना जाता है। कहा जाता है कि धरती पर पहली फसल जौ की बोई गई थी। शारदीय नवरात्र में भक्त घरों में कलश स्थापना कर नौ दिनों तक माता के अलग -अलग स्वरूपों की पूजा करते हैं।

नवरात्र में कलश स्थापना के साथ ही जौ बोये जाते हैं बिना इसके माता की पूजा अधूरी मानी जाती है। जौ किस तेजी से बढ़ रहा है इसके पीछे कई शुभ और अशुभ संकेत छिपे होते हैं। 

शुभ संकेत- नवरात्र के पहले दिन जौ बोने के कुछ दिनों बाद अगर वो तेजी से उगने लगे और उसका रंग पीला और हरा हो तो इसे बेहद शुभ संकेत मानते हैं। जिसका अर्थ है कि घर से जल्द ही सभी तरह की निगेटिव एनर्जी दूर हो जाएगी। तेजी से जौ बढ़ने का मतलब है घर की सुख -समृद्धि में तेजी से वृद्धि होगी। इसका एक और अर्थ है कि माता आपकी पूजा से प्रसन्न है और माता रानी का आशीर्वाद आपके परिवार पर बना हुआ है।

अशुभ संकेत-  यदि नवरात्रि में बोई गई जौ सुख कर झरने लगती है या ठीक से बढ़ नहीं रही तो इसे बेहद अशुभ संकेत माना जाता है। इसका अर्थ है कि आपके जीवन में नई परेशानियां आने वाली है और  आपको जल्द से जल्द इसका समाधन करना होगा। जिसके लिए आपको पूरे मन से माता की आराधना करनी चाहिए। जिससे मां प्रसन्न हो और आने वाली हर परेशानियों से आपकी रक्षा करे और उन्हें जल्द दूर करें। 

इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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