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बुराइयों का कारण जाने बिना हम उससे मुक्त नहीं हो सकते

evilबुद्ध अपने आसन पर आकर बैठ गए। उन्होंने किसी से कुछ नहीं कहा और कपड़े के टुकड़े में थोड़ी-थोड़ी दूरी पर पांच गांठें लगा दीं। सब शिष्य इंतजार कर रहे थे कि बुद्ध अब क्या कहेंगे। बुद्ध ने वहां उपस्थित

Anuradha Pandey हिन्दुस्तान, नई दिल्लीThu, 13 June 2024 07:14 AM
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हर रोज की तरह एक दिन भगवान बुद्ध सुबह भिक्षुओं की सभा में आए। सभा में प्रतीक्षा कर रहे उनके शिष्य यह देखकर चकित हुए कि बुद्ध पहली बार अपने हाथ में कुछ लेकर आए हैं। वह हमेशा खाली हाथ आते हैं। लेकिन आज उनके हाथ में कपड़े का एक टुकड़ा था। सभी शिष्य यह देखकर समझ गए कि आज कोई विशेष प्रयोजन है।

बुद्ध अपने आसन पर आकर बैठ गए। उन्होंने किसी से कुछ नहीं कहा और कपड़े के टुकड़े में थोड़ी-थोड़ी दूरी पर पांच गांठें लगा दीं। सब शिष्य इंतजार कर रहे थे कि बुद्ध अब क्या कहेंगे। बुद्ध ने वहां उपस्थित अपने सभी शिष्यों से पूछा कि क्या कोई मुझे बता सकता है कि क्या यह कपड़े का वही टुकड़ा है, जो गांठें लगने से पहले था। शारिपुत्र ने कहा, ‘एक प्रकार से तो यह कपड़े का टुकड़ा वही है क्योंकि इसमें किसी तरह का परिवर्तन नहीं हुआ है। लेकिन दूसरी तरह से देखें तो पहले इस कपड़े में पांच गांठें नहीं थीं। इस नजरिये से यह पहले जैसा नहीं रहा। यद्यपि इसकी मूल प्रकृति अपरिवर्तित है। इसका केवल बाहरी रूप बदला है। बाकी सब कुछ वही है।’

बुद्ध ने शारिपुत्र से सहमति जताते हुए कहा कि तुम सही कह रहे हो। अब मैं इन गांठों को खोल देता हूं। यह कहकर बुद्ध उस कपड़े के दोनों सिरों को पकड़ कर खींचने लगे। उन्होंने शारिपुत्र की ओर देखते हुए पूछा कि क्या तुम्हें लगता है कि मैं इस प्रकार इनकी गांठों को खोल पाऊंगा।

शारिपुत्र ने कहा, ‘नहीं तथागत, इस प्रकार तो यह गांठें और कस जाएंगी। इस प्रकार यह कभी नहीं खुलेंगी।’ बुद्ध ने कहा, ‘ठीक है। अब बताओ ये गांठें किस प्रकार खुलेंगी। इसके लिए मुझे क्या करना होगा और तुम इसे कैसे खोलोगे?’ शारिपुत्र ने कहा, ‘प्रभु इसके लिए मुझे सबसे पहले इसे पास से देखना होगा कि इसमें गांठें कैसे लगाई गई हैं। यह जाने बिना मैं इसे खोलने का उपाय नहीं बता सकता।’

बुद्ध ने कहा, ‘तुम सत्य कहते हो शारिपुत्र। यही जानना सबसे अधिक आवश्यक है। जिस समस्या में तुम पड़े हो, उससे बाहर निकलने के लिए यह जानना सबसे जरूरी है कि तुम उस समस्या में पड़े कैसे? अगर तुमने उसका कारण जान लिया, तो तुम उस समस्या से छुटकारा पा जाओगे।’

‘हम सब का भी यही हाल है। हम काम, क्रोध, लोभ, माया, अहंकार जैसी वृत्तियों से छुटकारा तो चाहते हैं, लेकिन हम इसका कारण नहीं खोजते कि हम इसके गुलाम कैसे हुए। जिस दिन हम अपनी बुराइयों का कारण खोज लेंगे, उस दिन हम इससे मुक्त होना भी सीख जाएंगे।’

अश्वनी कुमार

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