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Vinayaka Chaturthi : विनायक चतुर्थी आज, नोट कर लें पूजा- विधि, शुभ मुहूर्त, उपाय और पूजन सामग्री की लिस्ट

vinayaka chaturthi : हर माह में शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को विनायक चतुर्थी पड़ती है। यह तिथि भगवान गणेश को समर्पित होती है। इस दिन विधि- विधान से भगवान गणेश की पूजा- अर्चना की जाती है।

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Yogesh Joshi लाइव हिन्दुस्तान टीम, नई दिल्लीMon, 10 June 2024 04:48 AM
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इस समय ज्येष्ठ का महीना चल रहा है। हर माह में शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को विनायक चतुर्थी पड़ती है। यह तिथि भगवान गणेश को समर्पित होती है। इस दिन विधि- विधान से भगवान गणेश की पूजा- अर्चना की जाती है। भगवान गणेश प्रथम पूजनीय देव हैं। किसी भी शुभ कार्य से पहले भगवान गणेश की पूजा की जाती है। भगवान गणेश का एक नाम विनायक भी है। ज्येष्ठ माह की विनायक चतुर्थी 10 जून, सोमवार को पड़ रही है है। विनायक चतुर्थी के दिन विधि- विधान से भगवान गणेश की अराधना करने से सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं। आइए जानते हैं विनायक चतुर्थी पूजा- विधि, शुभ मुहूर्त, महत्व और सामग्री की पूरी लिस्ट...

ज्येष्ठ, शुक्ल चतुर्थी प्रारम्भ - 03:44 पी एम, जून 09

ज्येष्ठ, शुक्ल चतुर्थी समाप्त - 04:14 पी एम, जून 10

विनायक चतुर्थी पूजा विधि

  • इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान कर लें।
  • इसके बाद घर के मंदिर में सफाई कर दीप प्रज्वलित करें।
  • दीप प्रज्वलित करने के बाद भगवान गणेश का गंगा जल से जलाभिषेक करें।
  • इसके बाद भगवान गणेश को साफ वस्त्र पहनाएं।
  • भगवान गणेश को सिंदूर का तिलक लगाएं और दूर्वा अर्पित करें।
  • भगवान गणेश को दूर्वा अतिप्रिय होता है। जो भी व्यक्ति भगवान गणेश को दूर्वा अर्पित करता है, भगवान गणेश उसकी सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करते हैं। 
  • भगवान गणेश की आरती करें और भोग लगाएं। आप गणेश जी को मोदक, लड्डूओं का भोग लगा सकते हैं। 
  • इस पावन दिन भगवान गणेश का अधिक से अधिक ध्यान करें। 
  • अगर आप व्रत रख सकते हैं तो इस दिन व्रत रखें।

विनायक चतुर्थी महत्व

  • इस पावन दिन का बहुत अधिक महत्व होता है।
  • विनायक चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की पूजा- अर्चना करने से मनवांछित फल की प्राप्ति होती है। 
  • विनायक चतुर्थी के दिन व्रत रखने से विघ्न दूर हो जाते हैं। 

विनायक चतुर्थी पूजा सामग्री लिस्ट

  • भगवान गणेश की प्रतिमा
  • लाल कपड़ा
  • जनेऊ
  • कलश
  • नारियल
  • पंचामृत
  • पंचमेवा
  • गंगाजल
  • रोली
  • मौली लाल

भगवान गणेश को प्रसन्न करने के लिए विनायक चतुर्थी के पावन दिन श्री गणेश चालीसा का पाठ जरूर करें। श्री गणेश चाालीसा का पाठ करने से भगवान गणेश की विशेष कृपा प्राप्त होती है। भगवान गणेश की कृपा से धन- संपदा में वृद्धि होती है। आगे पढ़ें श्री गणेश चालीसा...

  • श्री गणेश चालीसा

जय गणपति सद्गुण सदन कविवर बदन कृपाल।
विघ्न हरण मंगल करण जय जय गिरिजालाल॥

जय जय जय गणपति राजू। मंगल भरण करण शुभ काजू॥

जय गजबदन सदन सुखदाता। विश्व विनायक बुद्धि विधाता॥

वक्र तुण्ड शुचि शुण्ड सुहावन। तिलक त्रिपुण्ड भाल मन भावन॥

राजित मणि मुक्तन उर माला। स्वर्ण मुकुट शिर नयन विशाला॥

पुस्तक पाणि कुठार त्रिशूलं। मोदक भोग सुगंधित फूलं॥

सुंदर पीतांबप तन साजित। चरण पादुका मुनि मन राजित॥

धनि शिवसुवन षडानन भ्राता। गौरी ललन विश्व-विधाता॥

ऋद्धि सिद्धि तव चंवर डुलावे। मूषक वाहन सोहत द्वारे॥

कहौ जन्म शुभ कथा तुम्हारी। अति शुचि पावन मंगल कारी॥

एक समय गिरिराज कुमारी। पुत्र हेतु तप कीन्हा भारी॥

भयो यज्ञ जब पूर्ण अनूपा। तब पहुंच्यो तुम धरि द्विज रूपा।

अतिथि जानि कै गौरी सुखारी। बहु विधि सेवा करी तुम्हारी॥

अति प्रसन्न ह्वै तुम वर दीन्हा। मातु पुत्र हित जो तप कीन्हा॥

मिलहि पुत्र तुहि बुद्धि विशाला। बिना गर्भ धारण यहि काला॥

गणनायक गुण ज्ञान निधाना। पूजित प्रथम रूप भगवाना॥

अस कहि अन्तर्धान रूप ह्वै। पलना पर बालक स्वरूप ह्वै॥

बनि शिशु रुदन जबहि तुम ठाना। लखि मुख सुख नहिं गौरि समाना॥

सकल मगन सुख मंगल गावहिं। नभ ते सुरन सुमन वर्षावहिं॥

शम्भु उमा बहुदान लुटावहिं। सुर मुनि जन सुत देखन आवहिं॥

लखि अति आनन्द मंगल साजा। देखन भी आए शनि राजा॥

निज अवगुण गुनि शनि मन माहीं। बालक देखन चाहत नाहीं॥

गिरजा कछु मन भेद बढ़ायो। उत्सव मोर न शनि तुहि भायो॥

कहन लगे शनि मन सकुचाई। का करिहौ शिशु मोहि दिखाई॥

नहिं विश्वास उमा कर भयऊ। शनि सों बालक देखन कह्यऊ॥

पड़तहिं शनि दृग कोण प्रकाशा। बालक शिर उड़ि गयो आकाशा॥

गिरजा गिरीं विकल ह्वै धरणी। सो दुख दशा गयो नहिं वरणी॥

हाहाकार मच्यो कैलाशा। शनि कीन्ह्यों लखि सुत को नाशा॥

तुरत गरुड़ चढ़ि विष्णु सिधाए। काटि चक्र सो गज शिर लाए॥

बालक के धड़ ऊपर धारयो। प्राण मन्त्र पढ़ शंकर डारयो॥

नाम गणेश शंभु तब कीन्हे। प्रथम पूज्य बुद्धि निधि वर दीन्हे॥

बुद्धि परीक्षा जब शिव कीन्हा। पृथ्वी की प्रदक्षिणा लीन्हा॥

चले षडानन भरमि भुलाई। रची बैठ तुम बुद्धि उपाई॥

चरण मातु-पितु के धर लीन्हें। तिनके सात प्रदक्षिण कीन्हें॥

धनि गणेश कहि शिव हिय हरषे। नभ ते सुरन सुमन बहु बरसे॥

तुम्हरी महिमा बुद्धि बड़ाई। शेष सहस मुख सकै न गाई॥

मैं मति हीन मलीन दुखारी। करहुँ कौन बिधि विनय तुम्हारी॥

भजत रामसुन्दर प्रभुदासा। लख प्रयाग ककरा दुर्वासा॥

अब प्रभु दया दीन पर कीजै। अपनी शक्ति भक्ति कुछ दीजै॥

  •  दोहा

 श्री गणेश यह चालीसा पाठ करें धर ध्यान।

नित नव मंगल गृह बसै लहे जगत सन्मान॥

सम्वत् अपन सहस्र दश ऋषि पंचमी दिनेश।

पूरण चालीसा भयो मंगल मूर्ति गणेश॥

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