Hindi Newsधर्म न्यूज़Vinayak Chaturthi Kab Hai 2024 : date shubh muhurat poojavidhi and significance of vinayak chaturthi in June 2024

Vinayak Chaturthi June 2024:9 या 10 जून,विनायक चतुर्थी कब है? जानें सही तिथि,शुभ मुहूर्त, पूजाविधि और महत्व

Vinayak Chaturthi Kab Hai 2024 : ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की विनायक चतुर्थी 10 जून 2024 को मनाई जाएगी। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन गणेशजी की विधिवत पूजा करने से सभी संकटों से मुक्ति मिलती है।

Arti Tripathi लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्लीSun, 9 June 2024 04:25 PM
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Vinayak Chaturthi June 2024 Date : हिंदू धर्म में हर माह के शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को गणेशजी की पूजा-आराधना का बड़ा महत्व है। शुक्ल पक्ष में आने वाली चतुर्थी तिथि को विनायक चतुर्थी और कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है। दृक पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि 10 जून 2024 को पड़ रही है। इस दिन विनायक चतुर्थी मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यता है कि विनायक चतुर्थी के दिन गणेशजी के व्रत और पूजन से समस्त दुखों से छुटकारा मिलता है और जीवन में सुख-समृद्धि और खुशहाली आती है। आइए जानते हैं विनायक चतुर्थी की सही तिथि, पूजा का शुभ मुहूर्त, पूजाविधि और महत्व...

विनायक चतुर्थी कब है ?

दृक पंचांग के अनुसार, 9 जून 2024 को दोपहर 03 बजकर 44 मिनट से विनायक चतुर्थी आरंभ होगी और अगले दिन यानी 10 जून 2024 को शाम 04 बजकर 14 मिनट पर समाप्त होगी। इसलिए उदयातिथि के अनुसार, इस साल 10 जून 2024 को विनायक चतुर्थी मनाई जाएगी।

पूजा का शुभ मुहूर्त : इस दिन यानी 10 जून 2024 को सुबह 10 बजकर 26 मिनट से लेकर दोपहर 01 बजकर 06 मिनट तक पूजा का शुभ मुहूर्त बन रहा है।

चंद्रोदय का समय : 10 जून को रात 08 बजकर 40 मिनट पर चंद्रोदय होगा और रात 10 बजकर 54 मिनट पर चंद्रास्त होगा। कुल 2 घंटे और 47 मिनट तक चंद्रदेव को जल अर्घ्य देने का समय रहेगा।

विनायक चतुर्थी की पूजाविधि:

विनायक चतुर्थी के दिन सुबह जल्दी उठें।
स्नानादि के बाद स्वच्छ कपड़े धारण करें।
घर के मंदिर की साफ-सफाई करें।
मंदिर में एक छोटी चौकी पर लाल या पीले वस्त्र बिछाएं।
अब इस पर गणेशजी की प्रतिमा स्थापित करें।
इसके बाद उन्हें फल,पीले फूल, दूर्वा, अक्षत अर्पित करें।
गणेश जी को धूप-दीप और नेवैद्य अर्पित करें।
इसके बाद गणेशजी को मोदक या लड्डू का भोग लगाएं।
गणेश जी के बीज मंत्र 'ऊँ गं गणेशाय नमः' का 108 बार जाप करें।
गणपति बप्पा की आरती उतारें।
संभव हो, तो गणेशजी के मंदिर जाएं और उनका आशीर्वाद लें।
इसके बाद दिनभर उपवास रखें और शाम को चंद्रदेव को अर्घ्य देने के बाद व्रत खोलें।
इस दिन व्रती को सात्विक भोजन का सेवन करना चाहिए।

विनायक चतुर्थी का महत्व : सनातन धर्म में विनायक चतुर्थी के दिन गणेशजी की विधिवत पूजा करना शुभ फलदायी माना गया है। मान्यता है कि इस दिन व्रत और पूजन से गणेशजी अपने भक्तों के सभी कष्ट दूर करते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि और खुशहाली का आशीर्वाद देते हैं। इस दिन चंद्रदेव की पूजा का बड़ा महत्व है। धार्मिक मान्यता है कि चंद्रदेव को जल अर्घ्य दिए बिना पूजा का संपूर्ण फल नहीं मिलता है।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य है और सटीक है। इन्हें अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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