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Vijaya Ekadashi: 6 या 7 मार्च, दोनों दिन रखा जाएगा विजया एकादशी व्रत? जानें पूजा-विधि, शुभ मुहूर्त, व्रत पारण टाइम

Vijaya Ekadashi Vrat : विजया एकादशी का व्रत रखने से जातक की सभी इच्छाएं पूर्ण हो सकती हैं। वहीं, इस साल की विजया एकादशी की तिथि पर कन्फ्यूजन बना हुआ है।

Vijaya Ekadashi: 6 या 7 मार्च, दोनों दिन रखा जाएगा विजया एकादशी व्रत? जानें पूजा-विधि, शुभ मुहूर्त, व्रत पारण टाइम
Shrishti Chaubeyलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीWed, 06 Mar 2024 05:48 PM
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Vijaya Ekadashi Fast: इस साल 6 और 7 मार्च के दिन विजया एकादशी पड़ रही है। यह एकादशी फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को मनाई जाती है, जो प्रभु श्री हरी विष्णु को समर्पित है। इस दिन पूरे विधि-विधान से विष्णु भगवान की उपासना की जाएगी। प्रभु को प्रसन्न करने के लिए यह दिन महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यताओं के अनुसार, विजया एकादशी का व्रत रखने से जातक की सभी इच्छाएं पूर्ण हो सकती हैं। इसलिए आइए जानते हैं विजया एकादशी का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और व्रत पारण का समय-

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दोनों दिन रखा जाएगा विजया एकादशी व्रत?
इस साल विजया एकादशी 6 और 7 मार्च, 2024 को मनाई जाएगी। पंचांग के अनुसार, 6 मार्च के दिन 06:30 ए एम से एकादशी तिथि की शुरुआत होगी, जो 07 मार्च के दिन 04:13 ए एम मिनट तक रहेगी। गृहस्त लोग 6 मार्च के दिन विजया एकादशी का व्रत रख सकते हैं। वहीं, सन्यासी और मोक्ष प्राप्ति के इच्छुक श्रद्धालु 7 मार्च को एकादशी व्रत कर सकते हैं। जब-जब एकादशी व्रत दो दिन होता है तब-तब दूजी एकादशी और वैष्णव एकादशी एक ही दिन होती हैं। भगवान विष्णु के भक्तों को दोनों दिन एकादशी व्रत रखने की सलाह दी जाती है।

विजया एकादशी शुभ मुहूर्त
एकादशी तिथि प्रारम्भ - मार्च 06, 2024 को 06:30 ए एम बजे
एकादशी तिथि समाप्त - मार्च 07, 2024 को 04:13 ए एम बजे
7 मार्च को, पारण (व्रत तोड़ने का) समय - 01:28 पी एम से 03:49 पी एम
पारण तिथि के दिन हरि वासर समाप्त होने का समय - 09:30 ए एम, 7 मार्च 
8 मार्च को, पारण (व्रत तोड़ने का) समय - 06:23 ए एम से 08:45 ए एम
पारण के दिन (8 मार्च) द्वादशी सूर्योदय से पहले समाप्त हो जाएगी।

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पूजा-विधि 
स्नान आदि कर मंदिर की साफ सफाई करें
भगवान श्री हरि विष्णु का जलाभिषेक करें
प्रभु का पंचामृत सहित गंगाजल से अभिषेक करें
अब प्रभु को पीला चंदन और पीले पुष्प अर्पित करें
मंदिर में घी का दीपक प्रज्वलित करें
संभव हो तो व्रत रखें और व्रत लेने का संकल्प करें
विजया एकादशी की व्रत कथा का पाठ करें
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करें
पूरी श्रद्धा के साथ भगवान श्री हरि विष्णु और लक्ष्मी जी की आरती करें
प्रभु को तुलसी दल सहित भोग लगाएं
अंत में क्षमा प्रार्थना करें

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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