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कुंडली में Venus गोचर- किसी को ऐश्वर्य, धन माया, देंगे शुक्र तो किसी की पिता से अनबन कराते हैं शुक्र

Venus Transit : ज्योतिषशास्त्र में ग्रहों के राशि परिवर्तन को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। असुरों के गुरु शुक्र को भोग और सुख साधन का ग्रह माना जाता है। इनके 12 भावों में अलग-अलग फल होते हैं

कुंडली में Venus गोचर- किसी को ऐश्वर्य, धन माया, देंगे शुक्र तो किसी की पिता से अनबन कराते हैं शुक्र
Anuradha Pandeyडॉ संजीव कुमार शर्मा,नई दिल्लीWed, 31 Jan 2024 06:26 AM
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असुरों के गुरु शुक्र को भोग और सुख साधन का ग्रह माना जाता है। इनके 12 भावों में अलग-अलग फल होते हैं

प्रथम भाव इसमें कारक हों तो व्यक्ति सुखी, बुद्धिमान, कोमल स्वभाव का, युवा दिखाई देता है। अकारक हो तो भोग-विलास में पैसा उड़ाएगा।

द्वितीय भाव कारक होने पर व्यक्ति सहयोगी, कलात्मक प्रवृत्ति, मधुर वाणी, चतुर वक्ता और कुटुंब के साथ अच्छा व्यवहार करने वाला होगा।

तृतीय भाव व्यक्ति भाई-बहन से प्रेम करनेवाला, कंजूस और छोटी यात्राएं करेगा। नीच हो तो भाई-बहन से झगड़े होंगे या भाई या बहन बीमार होंगे।

चतुर्थ भाव कारक हो तो व्यक्ति शांत, सुखी, सुखी गृहस्थ जीवन, मकान-वाहन सुख, माता से धन की प्राप्ति। अकारक हो तो मां के स्वास्थ्य की हानि। मकान या गाड़ी खरीदने में झंझट होगा।

पंचम भाव कारक हो तो व्यक्ति विद्वान, सुखी, सट्टा-लॉटरी या व्यापार से पैसा अर्जित करेगा। मारक हो तो व्यक्ति स्त्रियों पर पैसा खर्च करेगा और उदर रोगी।

षष्ठ भाव ऐसा व्यक्ति दुराचारी और संकीर्ण मनोवृत्ति का होगा। वह अस्वस्थ रहेगा।

सप्तम भाव कारक हो तो व्यक्ति पिता से अधिक प्रभावशाली, उच्च स्तर का रहन-सहन, साझेदारी में लाभ। अकारक हो तो वैवाहिक जीवन दुखी।

अष्टम भाव पत्नी रोगी और अल्पायु, असफल प्रेमी, माता को कष्ट तथा गुप्त कार्यों में समय बिताएगा।

नवम भाव कारक हो तो व्यक्ति उदार, तपस्वी, प्रतिभाशाली, साहित्य में रुचि, राज्य से सम्मान। मारक है तो पिता रोगी होगा और पिता से अनबन। भाग्य में कमी।

दशम भाव कारक होने पर व्यक्ति धनी, कलाकार, विद्वान, पैतृक संपत्ति का योग, कानून-विशेषज्ञ। माता-पिता का भक्त। नीच हो तो काम या व्यापार नहीं चलेगा।

एकादश भाव कारक हो तो व्यक्ति प्रभावशाली, उदार, बुद्धिमान, रत्न व मनोरंजन के सामानों का व्यापार कर सकता है।

द्वादश भाव में हो तो आध्यात्मिक मार्ग की ओर जा सकता है। विदेश यात्रा का योग भी होता है। अकारक हो तो कंजूस, अनैतिक कार्य करेगा।

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