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21 अक्तूबर, 2020|8:08|IST

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केरल के इस मंदिर की रखवाली करता है एक शाकाहारी मगरमच्छ, खाने में खाता है सिर्फ मंदिर का प्रसाद

crocodile

भारत में ऐसे कई मंदिर और तीर्थ स्थल हैं, जो अपनी मान्यताओं और रहस्यों की वजह से पूरे विश्व भर में प्रसिद्ध हैं। ऐसा ही एक अनोखा रहस्य अपने गर्भ में समेटे हुए है, केरल के कासरगोड जिले में स्थित अनंतपुर मंदिर। मंगलवार को इस मंदिर में एक अनोखा दृश्य देखने को मिला। दरअसल मंदिर के तालाब में सालों से रह रहे एक शाकाहारी मगरमच्छ ने अचानक पहली बार मंदिर में प्रवेश करके वहां मौजूद लोगों को चौंका दिया।

हालांकि कई रिपोर्ट्स के मुताबिक कहा जा रहा है कि बाबिया नाम के इस मगरमच्छ ने गर्भगृह में प्रवेश किया था जो कि सही बात नहीं है। मंदिर के अधिकारी चंद्रशेखरन के अनुसार मंगलवार शाम को बाबिया मगरमच्छ ने मंदिर परिसर में घुसकर कुछ समय बिताया था लेकिन मंदिर के पुजारी चंद्रप्रकाश नंबिसन के कहने के बाद वह अपने स्थायी आवास जो कि मंदिर का तलाब है वापस चला गया था।  

कोई नहीं जानता कि बबिया कहां से आया है-
इस मंदिर के तालाब में करीब 70 सालों से बबिया नाम का एक मगरमच्छ रहता है। इस मगरमच्छ के बारे में कहा जाता है कि यह कोई नहीं जानता कि बबिया कहां से आया है और इसका नाम किसने रखा है। खास बात यह है कि बबिया ने आज तक कभी मांस नहीं खाया और न ही तालाब में रहते हुए कभी किसी मछली को कोई नुकसान पहुंचाया है। 

बबिया पूरी तरह शाकाहारी है-
कहा जाता है कि बबिया पूरी तरह शाकाहारी है, जो सिर्फ वही प्रसाद खाता है जो उसे मंदिर के पुजारी खिलाते हैं। यही वजह है कि बबिया को मंदिर का रक्षक भी माना जाता है। बबिया के पास जाने या उसे प्रसाद खिलाने की इजाजत किसी अन्य व्यक्ति को नहीं है। पुजारी के झील के किनारे पर आने पर बबिया भी वहां आ जाता है, जिसके बाद उसे मंदिर में चढ़ा प्रसाद खिलाया जाता है। 

क्या है मंदिर की मान्यता-
इस मंदिर के बार में कहा जाता है कि बबिया पहला मगरमच्छ नहीं है जो यहां का रक्षक होने के साथ ही शाकाहारी भी है। जब एक मगरमच्छ की मृत्यु हो जाती है तो दूसरा मगरमच्छ अपने आप आ जाता है। हालांकि यह बात आज तक कोई नहीं जानता है कि ये मगरमच्छ कहां से आते हैं। लेकिन जो भी नया मगरमच्छ आता है, वो पुराने मगरमच्छ की ही तरह मंदिर की रक्षा करते हुए खाने में मंदिर का प्रसाद ही खाता है। इस मंदिर को पद्मनाभस्वामी मंदिर (तिरुवनंतपुरम) का मूलस्थान माना जाता है। कहते हैं कि यह वही जगह है जहां 'अनंतपद्मनाभा' की स्थापना हुई थी।

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  • Web Title:Vegetarian crocodile Babiya makes surprise entry into Kerala anantapur temple but retreats after request from priest eats only prasad