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पंचग्रही योग में शनि जयंती, वट सावित्री व्रत, ज्योतिषाचार्य से जान लें शनिदेव का भोग, पूजा-विधि और शुभ मुहूर्त

Vat Savitri Vrat Shani Jayanti : आज वट सावित्री व्रत और शनि जयंती है। वट सावित्री व्रत को सुहागिन महिलाएं व्रत रखकर पति की दीर्घायु की कामना करती हैं। इस पर चार विशेष योग बन रहे हैं।

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Yogesh Joshi लाइव हिन्दुस्तान टीम, नई दिल्लीThu, 6 June 2024 09:59 AM
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आज वट सावित्री व्रत और शनि जयंती है। वट सावित्री व्रत को सुहागिन महिलाएं व्रत रखकर पति की दीर्घायु की कामना करती हैं। इस पर चार विशेष योग बन रहे हैं। ज्येष्ठ कृष्ण अमावस्या पांच जून की रात 8 बजे से आरंभ हो गई और गुरुवार की सुबह 6:09 बजे तक रहेगी। सूर्य उदय तिथि होने के कारण वट सावित्री व्रत और शनि जयंती गुरुवार को ही मनाई जाएगी।
यह जानकारी देते हुए लाइनपार कैल्टन स्कूल के पास स्थित हरि ज्योतिष संस्थान के ज्योतिर्विद पंडित सुरेंद्र शर्मा ने बताया ज्येष्ठ अमावस्या को शनि जयंती को शनिदेव का जन्म हुआ था। इन्हें सूर्यदेव और माता छाया की संतान माना जाता है। इस बार शनि जयंती के दिन शोभन योग का निर्माण हो रहा है और शनि देव स्वराशि कुंभ में ही रहेंगे। जिससे शश योग भी बन रहा है। साथ ही चंद्रमा गुरु के साथ मेष राशि में होने से गजकेसरी योग भी बनेगा। शनि के जन्मोत्सव पर वृषभ राशि में बुध, सूर्य,शुक्र, गुरु, चंद्रमा का संयोग पंचग्रही योग बना रहा है।

शनिदेव को लगाएं भोग:-

ज्योतिर्विद ने बताया कि शनिदेव की जयंती पर उन्हें उनका प्रिय भोग काले तिल,इनसे बनी मिठाई, काली उड़द की दाल, इस दाल की खिचड़ी और अन्य काली वस्तुओं का भोग लगाने से इस दिन का महत्व और बढ़ जाता है। शनिदेव की पूजा करने से साढ़ेसाती, ढैय्या और महादशा के अशुभ प्रभाव में कमी आती है। शनिदेव प्रसन्न होकर कृपा बरसाते हैं। शुभ योग में इन उपायों को करने से शनि दोष से मुक्ति मिलती है।

यह करें पूजा-अनुष्ठान:-

इस दिन शनि शांति के कर्म, पूजा-अनुष्ठान, पाठ, दान आदि करने से शनि और पितृदोष की शांति होती है। शनि चालीसा, हनुमान चालीस और सुंदर कांड का पाठ करने से शनिदेव प्रसन्न होते हैं।

मूहुर्त:-

अमृत काल सुबह 5:35 बजे से सुबह 7:16 बजे तक।

पूजन का शुभ मूहुर्त सुबह 8:56 बजे से सुबह 10:37 बजे तक।

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