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Vat Savitri 2024 : 6 जून को 7:07 मिनट तक वट सावित्री पूजा का शुभ मुहूर्त, इस विधि से करें वट वृक्ष पूजा

Vat Savitri Vrat : सूर्य उदय तिथि की मानें तो 6 जून को वट सावित्री व्रत और शनि जयंती मनाई जाएगी। इस दिन महिलाएं व्रत रखकर वट वृक्ष की पूजा कर अखंड सौभाग्य की कामना करती है।

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Shrishti Chaubey लाइव हिन्दुस्तान, शाहजहांपुरThu, 6 June 2024 12:18 PM
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Vat Savitri Vrat : अखंड सौभाग्य की कामना को लेकर महिलाएं ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को वट सावित्री का व्रत करती है। इस बार वट सावित्री व्रत 06 जून दिन गुरुवार को रखा जायेगा। इस दिन महिलाएं व्रत रखकर वट वृक्ष की पूजा कर देवी सावित्री के पतिव्रता धर्म का स्मरण कर अखंड सौभाग्य की कामना करती है। सुहागिन पति की दीर्घायु और सुखद वैवाहिक जीवन के लिए इस व्रत का पालन करती हैं। वट सावित्री व्रत के लिए पूजन का अभिजीत मुहूर्त सुबह 11.36 बजे से शुरू है और यह पूजन 12.14 बजे तक रहेगा।

वट सावित्री की कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, देवी सावित्री ने पति को संकट से उबारने के लिए घोर तप किया, जिससे प्रसन्न होकर यमराज ने पति सत्यवान के प्राण वट वृक्ष के नीचे लौटा दिए थे और वरदान भी दिया था कि, जो सुहागिन वट वृक्ष की पूजा करेंगी, उन्हें अखंड सौभाग्य रहने का आर्शीवाद मिलेगा।

कैसे करें वट वृक्ष की पूजा

जर्नादन पंडित के मुताबिक वट सावित्री व्रत में सुहागिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नानादि से निवृत होकर व्रत का संकल्प लेती है। महिलाएं सोलह श्रृंगार कर दो टोकरी में पूजा का सामान लेकर वट वृक्ष के नीचे बैठकर वट सावित्री की कथा सुनती है और वट वृक्ष को जल से सींचती है। इसके बाद वट वृक्ष को रोली, चंदन का टीका लगाती हैं और हाथ में कच्चा सूत लेकर वृक्ष में लपेटते हुए परिक्रमा करके पूजा संपन्न करती है। पंचांग के मुताबिक ज्येष्ठ अमावस्या तिथि 05 जून की शाम 07 बजकर 54 मिनट पर शुरू होगी और 06 जून की शाम 06 बजकर 07 मिनट तक रहेगी। उदय तिथि के अनुसार व्रत सावित्री व्रत 06 जून को रखा जाएगा।

इस बार वट सावित्री व्रत और शनि जयंती चार योग में होने जा रही है। ज्येष्ठ कृष्ण अमावस्या पांच जून को शाम आठ बजे से शुरू होकर छह जून को शाम 6.09 बजे तक रहेगी। सूर्य उदय तिथि को देखें तो छह जून को वट सावित्री व्रत और शनि जयंती मनाई जाएगी।

चार योग में मनाया जाएगा त्योहार

ज्योतिषाचार्य भारत ज्ञान भूषण के अनुसार, इस जेठ अमावस पर चन्द्रमा अपनी उच्च वृष राशि में होंगे। रोहिणी नक्षत्र में, धृति योग, बुधादित्य योग, गजकेसरी योग व लक्ष्मी योग चार योगों में बड़मावस व शनि जयंती होगी। शुभ मुहूर्त में पहला योग प्रातः 05:22 से 07:07 बजे तक और लाभामृत योग दोपहर 12:19 बजे से 03:48 बजे तक होगा। ज्योतिषाचार्या रुचि कपूर के अनुसार शनि जयंती पर पूजन के साथ दान का विशेष महत्व है। शनि जंयती के दिन काले कुत्ते को सरसों के तेल से चुपड़ी रोटी खिलाएं। ऐसा करने से शनि दोष से मुक्ति मिलती है।

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