Hindi Newsधर्म न्यूज़vat savitri vrat 2024 shani jayanti puja vidhi shubh muhurat niyam

Vat Savitri Puja : वट सावित्री व्रत पर उच्च राशि में रहेंगे चंद्रमा, इस समय में भूलकर भी न करें पूजा, मालामाल होने के लिए करें ये उपाय

Shani Jayanti Vat Savitri 2024 : इस बार वट सावित्री व्रत और शनि जयंती चार योग में होने जा रही है। ज्येष्ठ कृष्ण अमावस्या पांच जून को शाम आठ बजे से शुरू होकर छह जून को शाम 6.09 बजे तक रहेगी।

Yogesh Joshi लाइव हिन्दुस्तान टीम, नई दिल्लीThu, 6 June 2024 09:47 AM
हमें फॉलो करें

इस बार वट सावित्री व्रत और शनि जयंती चार योग में होने जा रही है। ज्येष्ठ कृष्ण अमावस्या पांच जून को शाम आठ बजे से शुरू होकर छह जून को शाम 6.09 बजे तक रहेगी। सूर्य उदय तिथि को देखें तो छह जून को वट सावित्री व्रत और शनि जयंती मनाई जाएगी।

ज्योतिषाचार्या रुचि कपूर के अनुसार शनि जयंती पर पूजन के साथ दान का विशेष महत्व है। शनि जंयती के दिन काले कुत्ते को सरसों के तेल से चुपड़ी रोटी खिलाएं। ऐसा करने से शनि दोष से मुक्ति मिलती है। इस साल शनि जयंती 6 जून गुरुवार के दिन है। शनिदेव न्याय के देवता हैं।

वहीं वट सावित्री व्रत भी छह जून को मनाया जाएगा। सुहागिन पति की दीर्घायु और सुखद वैवाहिक जीवन के लिए इस व्रत का पालन करती हैं। वट सावित्री व्रत के लिए पूजन का अभिजीत मुहूर्त सुबह 11.36 बजे से शुरू है और यह पूजन 12.14 बजे तक रहेगा।

शनि जयंती पर सर्वार्थ सिद्धि योग

ज्योतिष अन्वेषक अमित गुप्ता के अनुसार शनि जयंती पर सर्वार्थ सिद्धि योग भी होगा। पौराणिक कथाओं के अनुसार, बरगद के पेड़ में त्रिमूर्ति अर्थात ब्रह्मा, विष्णु और महेश का वास माना जाता है। वट वृक्ष पर्यावरण संरक्षण में बहुत योगदान रखता है।

चार योगों में मनाया जाएगा त्योहार

ज्योतिषाचार्य भारत ज्ञान भूषण के अनुसार इस जेठ अमावस पर चन्द्रमा उच्च वृष राशि में होंगे। रोहिणी नक्षत्र में धृति योग, बुधादित्य योग, गजकेसरी योग व लक्ष्मी योग चार योगों में बड़मावस व शनि जयंती होगी। शुभ मुहूर्त में पहला योग प्रातः 05:22 से 07:07 बजे तक और लाभामृत योग दोपहर 12:19 बजे से 03:48 बजे तक होगा।

वट सावित्री व्रत पर उच्च राशि में रहेंगे चंद्रमा, राहूकाल में नही करें पूजन

ज्योतिषचार्य विभोर इंदूसुत के अनुसार वट अमावस्या 6 जून गुरुवार के दिन है। वट सावित्री पूजन के लिए सुबह 10 बजकर 34 मिनट से दोपहर 12 बजकर 18 मिनट के बीच चर चौघड़िया और इसके बाद 12:18 से दोपहर 1:30 तक लाभ चौघड़िया ये दोनों ही पूजन के लिए श्रेष्ठ मुहूर्त होंगे। इसमें व्रती महिलाएं वट वृक्ष पूजन और वट सावित्री व्रत कथा सुन सकती हैं। (वट सावित्री व्रत 6 जून के दिन दोपहर 1:30 से 3 के बीच राहुकाल रहेगा, इसलिए वट सावित्री व्रत कथा और वट वृक्ष पूजन दोपहर 1:30 से पहले ही कर लें।

यह उपाय देंगे शुभ परिणाम

1. अपने पितरों के निमित्त दूध और सफेद मिठाई मंदिर में पंडित जी को दें।

2. किसी भी मंदिर में वट वृक्ष के नीचे तिल के तेल का दिया जलाएं।

3. प्रातःकाल शनि मंदिर जाकर शनि देव का सरसों के तेल से अभिषेक करें।

4 वृद्धाश्रम व कुष्ठाश्रम में अपनी सामर्थ्यानुसार भोजन/भोजन सामग्री दान करें।

5. उड़द की दाल की खिचड़ी का प्रसाद वितरित करें।

ऐप पर पढ़ें