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Vat Savitri Puja Vidhi : वट सावित्री व्रत में दिनभर पर कर सकते हैं पूजा, नोट कर लें संपूर्ण पूजा-विधि

Vat Savitri Vrat Puja : पतिव्रता स्त्रियों के पति की अकालमृत्यु से रक्षाकर अखंड सौभाग्य प्रदान करने वाला वट सावित्री व्रत पूजन ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष अमावस्या 6 जून गुरूवार को किया जाएगा।

Yogesh Joshi लाइव हिन्दुस्तान टीम, नई दिल्लीThu, 6 June 2024 09:44 AM
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Vat Savitri : पतिव्रता स्त्रियों के पति की अकालमृत्यु से रक्षाकर अखंड सौभाग्य प्रदान करने वाला वट सावित्री व्रत पूजन ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष अमावस्या 6 जून गुरूवार को किया जाएगा। इस दिन सुहागिन स्त्रियां वटवृक्ष की विधिवत पूजा करने के साथ सतयुग में हुए पुराणों में वर्णित सत्यवान व सावित्री की कथा सुनकर अपने पति की लंबी आयु की कामना करती है।

व्रत पर्व विधिज्ञा अनिशा सोनी पाण्डेय ने बताया कि धर्मग्रंथों के अनुसार सावित्री के पतिव्रत व भक्ति से प्रसन्न होकर यमराज ने मृत हुए सत्यवान को जीवित कर दिया था तथा अखंड सौभाग्य का वरदान दिया था। सावित्री ने वरदान के रुप में यमराज से मांगा था कि जो भी स्त्री ज्येष्ठ अमावस्या को वटवृक्ष की पूजा करेंगी उसके पति की कभी भी अकाल मृत्यु नहीं होगी। यह घटना वटवृक्ष के नीचे हुई थी, उसी समय से ये पूजन शुरू हुआ।

महिलाओं को पूजन के बाद कच्चे सूत या कलावा से वट की 7 परिक्रमा कर बांधना चाहिए। पूजन में रोली, कलावा, पान, सुपारी, फल, कच्चा आम डंथल सहित, गेंहू, मिष्ठान,पकवान, पंखा, गंगाजल आदि सामान की आवश्यकता होती है धार्मिक मान्यतानुसार इस दिन वटवृक्ष का पूजन करने के साथ जल, पंखा आदि का दान भी करना चाहिए। अमावस्या तिथि 5 जून की रात्रि 7 बजकर 55 मिनट से 6 जून की शाम 6 बजकर 7 मिनट तक रहेगा।

वट सावित्री व्रत करने का शुभ मुहूर्त

6 जून गुरुवार को सूर्योदय के बाद से सायं 5:34 तक वट सावित्री व्रत की पूजा की जाएगी l धृति नाम का योग पूरे दिन प्राप्त हो रहा हैl पूजा के लिए शुभ मुहुर्त गुरूवार को सुबह 11 बजकर 52 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 48 मिनट तक है। जबकि सूर्योदय के बाद से दिन में 1:30-3:00 बजे तक का समय छोडकर पूरे दिन पूजा की जा सकती है l

वट सावित्री व्रत करने की विधि

वट सावित्री व्रत वाले दिन सुहागिन महिलाएं सुबह उठ कर स्नान करें l स्नान के बाद इस व्रत का संकल्प लें l सोलह शृंगार करें l साथ ही इस दिन पीला सिंदूर भी जरूर लगाएं l इस दिन बरगद के पेड़ के नीचे सावित्री-सत्यवान और यमराज की मूर्ति रखें l बरगद के पेड़ में जल डालकर उसमें पुष्प, अक्षत, फूल और मिठाई चढ़ाएं l वृक्ष में रक्षा सूत्र बांधकर आशीर्वाद की प्रार्थना करें l वट वृक्ष की कच्च धागा लपेटकर सात परिक्रमा करें इसके बाद हाथ में काले चने को लेकर इस व्रत की कथा सुनें l कथा के बाद ब्राह्मण को दान दे l दान में वस्त्र दक्षिणा और चने दें l अगले दिन व्रत को तोड़ने से पहले बरगद के वृक्ष का कोपल खाकर उपवास समाप्त करें l

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