vat savitri vrat 2019 read full katha of vat savitri vrat - वट सावित्री व्रत 2019: आज है वट सावित्री, पढ़ें पूरी कथा DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

वट सावित्री व्रत 2019: आज है वट सावित्री, पढ़ें पूरी कथा

vrat savitri 2019

ज्‍येष्‍ठ माह के शुक्‍ल पक्ष की अमावस्या को वट पूर्णिमा व्रत किया जाता है। सुहागन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए यह व्रत रखती हैं। कहा जाता है कि इस दिन सावित्री अपने पति सत्‍यवान के प्राण यमराज से वापस लेकर आईं थीं। जिसके बाद उन्‍हें सती सावित्री कहा जाने लगा। इस साल वट सावित्री व्रत 3 जून को मनाया जा रहा है, पढ़ें व्रत की पूरी कथा...

पौराणिक कथा

बहुत पहले की बात है अश्‍वपति नाम का एक सच्चा ईमानदार राजा था। उसकी सावित्री नाम की बेटी थी। जब सावित्री शादी के योग्‍य हुई तो उसकी मुलाकात सत्‍यवान से हुई। सत्‍यवान की कुंडली में सिर्फ एक वर्ष का ही जीवन शेष था। सावित्री पति के साथ बरगद के पेड़ के नीचे बैठी थी। सावित्री की गोद में सिर रखकर सत्‍यवान लेटे हुए थे। तभी उनके प्राण लेने के लिये यमलोक से यमराज के दूत आये पर सावित्री ने अपने पति के प्राण नहीं ले जाने दिए। तब यमराज खुद सत्‍यवान के प्राण लेने के लिए आते हैं। 

सावित्री के मना करने पर यमराज उसे वरदान मांगने को कहते हैं। सावित्री वरदान में अपने सास-ससुर की सुख शांति मांगती है। यमराज उसे दे देते हैं पर सावित्री यमराज का पीछा नहीं छोड़ती है। यमराज फिर से उसे वरदान मांगने को कहते हैं। सावित्री अपने माता पिता की सुख समृद्धि मांगती है। यमराज तथास्‍तु बोल कर आगे बढ़ते हैं पर सावित्री फिर भी उनका पीछा नहीं छोड़ती है। यमराज उसे आखिरी वरदान मांगने को कहते हैं तो सावित्री वरदान में एक पुत्र मांगती है। यमराज जब आगे बढ़ने लगते हैं तो सावित्री कहती हैं कि पति के बिना मैं कैसे पुत्र प्राप्ति कर स‍कती हूं। इसपर यमराज उसकी लगन, बुद्धिमत्‍ता देखकर प्रसन्‍न हो जाते हैं और उसके पति के प्राण वापस कर देते हैं।  

इस आलेख में दी गई जानकारियां धार्मिक आस्थाओं और लौकिक मान्यताओं पर आधारित हैं, जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है।

 

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:vat savitri vrat 2019 read full katha of vat savitri vrat