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7 अप्रैल, 2021|4:47|IST

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बच्चों को लगती है बार-बार चोट तो यह उपाय अपनाएं 

माना जाता है कि 12 वर्ष की आयु तक बच्चा चन्द्रमा के प्रभाव में होता है। चन्द्रमा की स्थिति अनुकूल नहीं होने पर बच्चा अपनी चंचलता के कारण अक्सर स्वयं को चोट लगा बैठता है। ऐसे में वास्तु में कुछ आसान से उपायों को अपनाकर बच्चों को चोट लगने से बचाया जा सकता है। आइए जानते हैं इन आसान से उपायों के बारे में। 

अर्धचन्द्र का लॉकेट बच्चों को पहनाने से उनका स्वास्थ्य अच्छा रहता है और चोट एवं दुर्घटना में भी कमी आती है। बच्चे या बड़े भी दुर्घटनाओं से बचाव के लिए मंगलवार को हनुमान मंदिर में जाकर मिट्‍टी के दीये में चमेली के तेल का दीपक अवश्य जलाएं। पक्षियों को लाल मसूर खिलाने से भी हादसों से बचाव होता है। हनुमान मंदिर से जाएं तो बच्चों की कलाई पर मौली अवश्य बंधवाएं। हनुमानजी के मंदिर में गुड़-चने का प्रसाद बांटें। घर की छत पर लाल पताका लगाने से भी दुर्घटनाओं से बचाव होता है। माना जाता है कि दुर्घटना से बचाव के लिए घर से निकलते समय मुंह मीठा कर कभी न निकलें। बच्चों के सोते समय ध्यान रखें कि उनके बेड के सिरहाने जूते या चप्पल न रखे हों। न ही जल को सिरहाने रखकर सोएं। बच्चे को मोती धारण कराने से भी हादसों से बचाव होता है। पिरामिड सकारात्‍मक ऊर्जा का स्‍त्रोत होता है। इसे कार या फिर किसी भी वाहन में रखने से सकारात्‍मक ऊर्जा और एकाग्रता का प्रभाव बढ़ता है। मारुती यंत्र को भी वाहन में स्थापित किया जा सकता है। 

इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं तथा इन्हें अपनाने से अपेक्षित परिणाम मिलेगा। इन्हें अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।