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श्रीगणेश दूर करेंगे हर संकट, कभी न करें उनकी पीठ के दर्शन

भगवान श्रीगणेश बुद्धि प्रदान करने वाले हैं। कोई भी शुभ कार्य उनकी पूजा के बिना पूर्ण नहीं होता। उनकी कृपा से समस्त वास्तु दोष दूर हो जाते हैं। भगवान श्री गणेश की आराधना के बिना वास्तु देवता की उपासना भी अपूर्ण मानी जाती है। वास्तु शास्त्र में भगवान श्रीगणेश की कृपा पाने के लिए कई उपाय बताए गए हैं, आइए जानते हैं इनके बारे में।

भगवान श्रीगणेश जी को नमन करते समय मुख सदा पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए। श्रीगणेशजी की पीठ के दर्शन कभी न करें। सामने से ही सदैव उनके दर्शन करें। या फिर दाएं या बाएं से दर्शन करना भी अशुभ नहीं है। माना जाता है कि श्रीगणेश की पीठ के दर्शन करने से घर परिवार पर दरिद्रता का प्रभाव बढ़ जाता है। घर में श्रीगणेश की बहुत सारी मूर्तियां न रखें। पूजा स्थान पर एक साथ श्रीगणेश की तीन मूर्तियां कभी न रखें। पीत वर्ण के गणपति सर्वोत्तम माने जाते हैं। श्रीगणेश को कभी तुलसी दल अर्पित न करें। बच्चों के कमरे में उनकी मूर्ति लगाएं। शयन कक्ष में भगवान की मूर्ति न रखें और श्रीगणेश जी की तो कभी नहीं। घर में सकारात्मक ऊर्जा के लिए आम, पीपल एवं नीम से बने श्रीगणेश की मूर्ति लगाएं। इसे हमेशा घर के मुख्य द्वार पर लगाएं। घर में श्रीगणेश की वही मूर्ति स्थापित करें, जिसमें उनकी सूंढ़ बाईं ओर हो। कार्यस्थल पर खड़े हुई मुद्रा में श्रीगणेश का चित्र लगाना चाहिए। उनके दोनों पैर जमीन का स्पर्श करते हुए हों। इससे कार्यक्षेत्र में स्थिरता आती है। घर में सदैव बैठे हुए श्रीगणेश की मूर्ति रखना चाहिए। इससे परिवार में सुख शांति आती है।

इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं तथा इन्हें अपनाने से अपेक्षित परिणाम मिलेगा। इन्हें अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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